Ranchi: भाजपा ने झारखंड में बड़ा सांगठनिक फेरबदल किया है. 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को दी गई है. केंद्रीय नेतृत्व ने दीपक प्रकाश को हटाकर बाबूलाल मरांडी को झारखंड का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. पार्टी ने बाबूलाल मरांडी के अनुभव और सांगठनिक कौशल पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी है. इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है. बाबूलाल मरांडी फिलहाल भाजपा विधायक दल के नेता हैं. भाजपा ने सदन में उन्हें नेता प्रतिपक्ष भी चुना है. वे जल्द ही नई टीम (प्रदेश कार्यसमिति) का गठन कर प्रदेश में संगठन की पेंच कसना शुरू करेंगे. बाबूलाल मरांडी भाजपा के कार्यकर्ताओं की नब्ज, पार्टी की कार्यशैली और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति काफी अच्छे से समझते हैं. उनके लंबे सांगठनिक अनुभव का लाभ 2014 में भाजपा को मिलेगा. राज्य के बड़े आदिवासी नेता के रूप में वे जाने जाते हैं. उन्होंने झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन को भी लोकसभा चुनाव में हराया है. भाजपा में अपनी दूसरी पारी शुरू करने के बाद से ही वे लगातार सोरेन परिवार पर हमलावर हैं. लगातार झामुमो के गढ़ संथाल परगना में कैंप कर झामुमो के किले को ध्वस्त करने की भी कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी राह इतनी आसान नहीं है. उनके सामने अभी कई चुनौतियां भी हैं. इसे भी पढ़ें -चंदवा">https://lagatar.in/chandwa-woman-hanged-herself-after-a-fight-with-her-lover/">चंदवा
: प्रेमी के साथ झगड़ा के बाद महिला ने लगाई थी फांसी, ठेकेदार ने जंगल में फेंका था शव, गिरफ्तार
खबरः हजारीबाग के पदमा में कुएं में गिरी टाटा सूमो, 6 की मौत, 3 गंभीर [wpse_comments_template]
: प्रेमी के साथ झगड़ा के बाद महिला ने लगाई थी फांसी, ठेकेदार ने जंगल में फेंका था शव, गिरफ्तार
सभी गुट के नेताओं-कार्यकर्ताओं को करना होगा संतुष्ट
झारखंड में भाजपा के कई गुट बने हुए हैं. इनमें सबसे मजबूत पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का गुट है. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और दीपक प्रकाश के भी समर्थकों का गुट बना हुआ है. बाबूलाल मरांडी के सामने अब यह चुनौती है कि इन सभी नेताओं के समर्थकों को अपनी नई टीम में कैसे एडजस्ट करेंगे, क्योंकि अगर पद बांटने में थोड़ा भी इधर-उधर हुआ तो संगठन के अंदर गुटबाजी और तेज होगी. इससे पार्टी कमजोर होगी और भाजपा की चुनावी तैयारी प्रभावित होगी.बाबूलाल मरांडी के सामने चुनौतियां
14 लोकसभा सीटों पर भाजपा को मजूबत करने की चुनौती राजमहल और सिंहभूम सीट पर भाजपा को जीताने की चुनौती आदिवासियों के बीच भाजपा के खोये जनाधार को वापस लाना संगठन के अंदर गुटबाजी और मनमुटाव को खत्म करना भाजपा छोड़कर गये अच्छे नेताओं को वापस लाना विधानसभा की 28 एसटी सुरक्षित सीटों में पकड़ मजबूत करनाबाबूलाल मरांडी की खूबियां
सहयोगियों के साथ विरोधियों की बात भी धैर्य से सुनते हैं जनहित से जुड़े मामलों को जोर-शोर से उठाते हैं झारखंड और राज्यवासियों के हित को लेकर उनके पास विजन है किसी भी मामले की तह तक जाकर पूरी जानकारी हासिल करते हैं कार्यकर्ताओं और समर्थकों को तरजीह देते हैं विरोधियों को घेरने की कला में माहिर हैंबाबूलाल मरांडी की कमजोरी
प्रेशर के वक्त चीजों को टालने की कोशिश करते हैं किसी भी सहयोगी पर बहुत जल्द भरोसा कर लेते हैं जिन लोगों से नुकसान होता है, उन्हें भी बर्दाश्त करते हैं सहयोगियों की गलतियों को बहुत ज्यादा नजरअंदाज करते हैंबाबूलाल के पुराने साथियों में जगी उम्मीद
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी जब भाजपा में वापस आये थे, तब उनके साथ झाविमो के भी सैकड़ों लोग थे. उस वक्त संगठन की बागडोर दीपक प्रकाश के पास थी. अधिकांश पद भाजपा कार्यकर्ताओं को मिले थे, झाविमो से आये 500 से अधिक लोगों में से 10 लोगों को भी पार्टी में पद नहीं मिला. इससे बाबूलाल के समर्थकों में निराशा और बाबूलाल के प्रति अविश्वास का भाव पैदा हुआ. अब बाबूलाल प्रदेश अध्यक्ष बने हैं. उनके पुराने साथियों को उम्मीद जगी है कि वे उन्हें भाजपा में सम्मान और पद जरूर दिलाएंगे.इन राज्यों के भी प्रदेश अध्यक्ष बदले
भाजपा ने मंगलवार को झारखंड सहित देश के चार राज्यों में अपने अध्यक्ष बदले हैं. केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को तेलंगाना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री डी. पुरंदेश्वरी को आंध्र प्रदेश और सुनील जाखड़ को पंजाब में पार्टी की कमान दी गई है.साढ़े 3 साल तक कुशल संगठनकर्ता का अभाव महसूस करती रही भाजपा
दीपक प्रकाश का कार्यकाल 25 फरवरी 2023 को ही खत्म हो चुका था. वे एक्सटेंशन पर चल रहे थे. अपने कार्यकाल में दीपक प्रकाश ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई काम किए, लेकिन प्रदेश भाजपा साढ़े तीन साल तक एक कुशल संगठनकर्ता का अभाव महसूस करती रही. यही वजह है कि उनके कार्यकाल में हुए विधानसभा के 5 उपचुनाव में से एक उपचुनाव भी भाजपा नहीं जीत पाई. उनके कार्यकाल में पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरें नहीं आई, लेकिन कार्यकर्ताओं में उनके खिलाफ असंतोष जरूर दिखा. अनुशासन के नाम पर पार्टी नेताओं-प्रवक्ताओं के साथ-साथ सांसदों और विधायकों की भी बोलने की आजादी छीन ली गई थी. इसे भी पढ़ें -बड़ी">https://lagatar.in/big-news-tata-sumo-fell-into-a-well-in-padma-hazaribagh-6-dead-3-serious/">बड़ीखबरः हजारीबाग के पदमा में कुएं में गिरी टाटा सूमो, 6 की मौत, 3 गंभीर [wpse_comments_template]
Leave a Comment