Medininagar (Palamu): मेदिनीनगर सदर अस्पताल में गुरुवार को दिव्यांग शिक्षकों को दिव्यांग्ता प्रमाण पत्र की जांच के लिए बुलाया गया था. सभी शिक्षक तय समय पर पहुंचे. लेकिन उनकी जांच नहीं हो सकी. जांच टीम के चिकित्सकों ने तकनीकी पेंच बताते हुए जांच नहीं किया. बता दें कि डीएसइ मारिया गोरेती तिर्की ने सिविल सर्जन डॉ अनील कुमार को सभी 28 दिव्यांगों के विकलांगता प्रमाण पत्र के फिजिकल जांच करने का आग्रह किया था. इसे लेकर सिविल सर्जन ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था. इसमें सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ विजय कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रोहित पांडेय, डॉ सुभाष कुमार और डॉ शालिनी निरूपमा टोप्पो शामिल थे. सिविल सर्जन ने सभी 28 दिव्यांगों के विकलांगता प्रमाण पत्र के फिजिकल जांच के लिए 23 दिसंबर को तिथि निर्धारित की थी. सभी दिव्यांग शिक्षक जांच स्थल पर पहुंचे. लेकिन जांच नहीं हो सकी. फिलहाल जांच टीम ने सभी दिव्यांग शिक्षकों से विकलांगता प्रमाण पत्र का सत्यापित सर्टिफिकेट जमा करवा लिया है. बता दें कि पलामू जिले में प्रारंभिक स्कूलों में वित्तीय वर्ष 2015-16 में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. इसमें कुछ ऐसे शिक्षक भी थे, जो दिव्यांग नहीं थे. उन लोगों ने भी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र देकर नियुक्ति का लाभ लिया था. संतोष कुमार ने इस मामले को उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था. हाईकोर्ट ने संतोष कुमार बनाम राज्य सरकार अन्य में पारित न्यायादेश में जिले में पदस्थापित 28 दिव्यांगों के दिव्यांगता प्रमाण के फिजिकल जांच करने का आदेश दिया.
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चिकित्सकों ने कहा कि अधिकांश दिव्यांगता सर्टिफेकेट सदर अस्पताल द्वारा निर्गत किया गया है. कुछ शिक्षकों का इस जिले के बाहर का दिव्यांगता प्रमाण पत्र है. इस कारण इसके जांच के लिए सदर अस्पताल के ऊपर के चिकित्सकों की टीम गठन करना चाहिए. दिव्यांगता प्रमाण पत्र अलग-अलग वर्ष में जारी है. अब मूल सर्टिफेकेट निकालकर ही मिलान करना संभव है. इसके लिए समय लगेगा. जांच टीम ने कहा कि तकनीकी समस्या से वे सभी सिविल सर्जन को अवगत करायेंगे. एक चिकित्सक ने कहा कि 40 प्रतिशत से ऊपर के दिव्यांगता को ही लाभ मिल सकता है. यदि किसी का एक आंख डैमेज है तो उसे मात्र 30 प्रतिशत तक ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिया जा सकता है.
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