alt="" width="718" height="481" /> बैठक में मौजूद जेएमएम और झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि[/caption] इसे भी पढ़ें-माता">https://lagatar.in/irctc-will-provide-sightseeing-tour-of-north-india-including-mata-vaishno-devi/">माता
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कोलियरी मजदूर यूनियन की बैठक में निम्न बातों पर लिया गया है निर्णय
- मोदी सरकार के निजीकरण के फैसले का किया गया विरोध. साथ ही कहा गया है कि सरकार ने कोयले खनन के लिए 100% एफडीआई की अनुमति दी है. इससे मोदी सरकार की मंशा संदिग्ध साबित होती है. इससे देश का कोयला खान निजी और विदेशी संस्थाओं के हाथों में चले जाएंगे जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाला जाएगा.
- मोदी सरकार के द्वारा मजदूरों के अधिकार और लाभ से संबंधित 44 श्रम कानून को समाप्त कर चार कोड में समेट दिया गया है, जिसका यूनियन ने किया विरोध.
- 11वें राष्ट्रीय वेतन समझौता में देरी हो रहा है. यूनियन ने चिंता व्यक्त की है, साथ ही कोयला मंत्रालय एवं कोल इंडिया प्रबंधन से शीघ्र ही 11वां राष्ट्रीय वेतन समझौता लागू करने की मांग की है. वहीं यूनियन ने कोल इंडिया प्रबंधन के द्वारा 72,500 रुपये बोनस देने के फैसले का स्वागत भी किया है.
- कोल इंडिया के सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल के विभिन्न कोल परियोजना में अधिग्रहित रैयती भूमि बंदोबस्ती, वन भूमि अधिकार प्राप्त पट्टे, वर्षों से जोत आबाद भूमि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार 30 वर्षों से काश्तकारी दखल भूमि का नौकरी एवं मुआवजा, भू-अर्जन एवं पुनर्वास कानून 2013 के तहत चार गुणा मुआवजा का भुगतान देने की मांग की है.
- कोल इंडिया में वैकल्पिक रोजगार के तहत सभी तरह के टेंडर ठेका में 25 करोड़ तक प्रभावित स्थानीय विस्थापितों एवं सभी तरह के बहाली में विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग.
- गैर-मजरूआ बंदोबस्ती भूमि को गलत ढंग से संदेहास्पद जमाबंदी घोषित कर रद्द किया गया है. भौतिक सत्यापन कर 30 वर्षों से कायम दखल कब्जा एवं जमाबंदी रैयत को नौकरी और मुआवजा दिया जाये.
- सी.बी एक्ट 1957 एवं भू अर्जन पुनर्वासन 2013 के तहत खनन किए गए भूमि को पूर्व की भांति समतल कर मूल-रैयतों को वापस किया जाये.
- गैर-मजरूआ सरकारी बंदोबस्ती भूमि के बदले नौकरी एवं मुआवजा को लेकर जो विवाद उत्पन्न हुए हैं, उसका निष्पादन हो. इसके लिए जरूरी है कि यूनियन के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर समाधान निकालेंगे.
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