Ranchi : झारखंड राज्य के करीब 20 साल पूरे होने को हैं. इस बीच राज्य में कई अर्ध-न्यायिक निकायों का गठन किया गया. इनके गठन का उद्देश्य था, आम लोगों को राहत मिल सके. लेकिन आज इन निकायों की स्थिति काफी लचर है. ऐसे निकायों में राज्य और जिला उपभोक्ता फोरम, राज्य महिला आयोग, झारखंड एजुकेशन ट्रिब्यूनल, झारखंड राज्य उपभोक्ता सुरक्षा काउंसिल प्रमुखता से शामिल हैं. राज्य का शायद ही कोई अधिकारी यह कहने की स्थिति में हैं कि आखिर उपरोक्त सभी अर्ध न्यायिक निकायों का कब सुचारू रूप से संचालन हो सकेगा. इसे भी पढ़ें- जज">https://lagatar.in/judge-uttams-death-case-adg-sanjay-latkar-said-investigation-going-in-the-right-direction-will-be-exposed-soon/122388/">जज
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जिला और राज्य उपभोक्ता मंच आयोग में करीब 40 से अधिक मामले दर्ज हैं
आंकड़ों को देखें तो जिला और राज्य उपभोक्ता मंच आयोग में अभी करीब 40 से अधिक मामले दर्ज हैं. लेकिन निकाय का सही तरीके से संचालित नहीं हो रहा है. सदस्यों की कमी है. इससे दर्ज मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही हैं. बता दें कि उपभोक्ता मंच का गठन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत किया गया था, लेकिन आज उपभोक्ता विवाद के लिए बनायी गयी प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. अगर रांची की बात करें, तो जिला फोरम विगत 30 जून 2018 से नहीं काम नहीं कर रहा है. इसे भी पढ़ें- टोक्यो">https://lagatar.in/tokyo-olympics-kamalpreet-misses-out-in-womens-discus-throw-finishes-sixth/122357/">टोक्योओलंपिक : महिला डिस्कस थ्रो में कमलप्रीत चूकीं, छठे स्थान पर रहीं
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