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मान्यता नहीं दिए जाने के खिलाफ गौशाला न्यास के सदस्यों ने लगायी कोर्ट से गुहार

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Ranchi: गौशाला न्यास समिति का सदस्य बना कर भी मान्यता नहीं दिए जाने के खिलाफ 110 सदस्यों का सब्र जवाब दे चुका है. चेयरमैन रतन जालान ने आमसभा में 15 दिनों के अंदर फैसला करने की बात कही थी, लेकिन पखवारा गुजर जाने के बाद भी फैसला करने में आना-कानी करते रहे. इससे खफा सदस्यों ने थक-हार कर आखिंरकार न्यायालय की शरण ले ही ली. अदालत का दरवाजा खट-खटा रहे सदस्यों का कहना है कि सारे प्रमाण देने के बाद भी ट्रस्टी और पदाधिकारी तानाशाही कर रहे हैं. हुकूमत करने के लिए धार्मिक स्थल को चुनना कहां तक जायज है. आप सब भी गौ माता की सेवा भावना से जुड़े हैं, हम सब की भी वैसी ही भावना है. फिर भेद -भाव क्यों?. पूर्व में हम सब 153 सदस्यों ने 21 से लेकर लाख रुपये तक गौशाला को डोनेशन दिए थे. सदस्यता शुल्क के रूप में 11 सौ रुपये का चेक दिया था. बाद में पूर्व ट्रस्टी और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर से आजीवन सदस्य बनाये जाने का प्रमाण पत्र भी दिया गया. बावजूद इसके माननीयों का यह कहना कि सब कुछ गड़बड है. ट्रस्टी के हस्ताक्षर से लेकर उनके द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं. तानाशाही नहीं तो इसे और क्या कहें?. ट्रस्टी और पदाधिकारियों ने मिलीभगत कर के गौशाला की 15.95 एकड़ जमीन बेच दी. सुकुरहुटू गौशाला के सात एकड़ जमीन को 99 साल के लिए कम किराये पर लीज कर दिया. यह अंधेर नगरी, चौपट राजा वाली को चरितार्थ करने जैसा ही है. सदस्यों का कहना है कि हक और न्याय के लिए जहां तक जाना हो जाएंगे. [caption id="attachment_861341" align="alignnone" width="720"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/03/webform7-31.jpg"

alt="" width="720" height="321" /> गौशाला के अंदर की तस्वीर[/caption]

हमारे साथ किया गया अन्याय : मोहक जैन

मोहक जैन बताते है कि गौशाला के आजीवन सदस्यता देने के नाम पर हमसे 31 हजार रुपये डोनेशन लिए गये. सदस्यता फार्म के लिए 11 सौ रुपये का चेक भी दिया था. बाद में सदस्यता प्रमाण पत्र भी गौशाला न्यास की ओर से दिया गया, लेकिन अब नयी कार्यकारिणी इसे मान्यता देने से इंकार कर रहे हैं. मोहक बताते हैं कि गौशाला में सेवा के लिए ही तो जुड़ रहा था, इससे भी हमे दूर कर दिया गया. हमे ठगा गया है, बस यही कसक है.

माननीयों की नियत ठीक नहीं : पवन पोद्दार

पवन पोद्दार बताते हैं कि गौशाला के माननीयों की नियत ठीक नहीं है. 110 नये सदस्य आ जायेंगे तो उनकी मनमानी पर अंकुश लग जायेगा, शायद इसी डर से सदस्यता के सारे प्रमाण रहने के बाद भी सदस्यों को मान्यता नहीं दी जा रही है. वे बताते हैं कि हक और न्याय पाने के लिए जहां तक जाना होगा जायेंगे. पवन बताते हैं कि उन्होंने करोना काल में गौ सेवा से प्रेरित होकर 51 हजार रुपये का डोनेशन दिया है. वर्तमान में जो सदस्य बनाये गये हैं, उनसे 51 हजार रुपये लिए गये हैं.

बाप-दादाओं ने गौशाला को दान देकर सहेजा है : अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल बताते हैं कि गौशाला को बाप-बादाओं ने दान देकर सहेजा है. हमारी भी गो सेवा की भावना है. इसी कारण 2019 में बकायदा सारी प्रक्रियाएं पूरी कर के सदस्यता प्राप्त किया. अब कहा जा रहा है कि आप गौशाला के कुछ नहीं हैं. यह कहां का न्याय है. यदि सदस्य नहीं बनाना था तो शुरुआत में ही पैसा लौटा कर मना कर देते. चार सालों तक क्यों लटका के रखा. गौशाल को कुछ ट्रस्टी और पदाधिकारी जागीर समझ लिए हैं. मट्टी के मोल गौशाला की जमीन बेच दी, कम किराये पर स्कूल को लिज कर दिया, क्या ही गौ सेवा और गौशाला का विकास कर रहे हैं?

पहले जो दिया वह जाली है, तो अब देंगे उसकी क्या गारंटी : बेनी प्रसाद

बेनी प्रसाद अग्रवाल बताते हैं कि कुछ दिन पहले एक ट्रस्टी ने फोन कर के जानकारी दी कि आपको नोमिनेट कर लिया गया है. सदस्यता के लिए कुछ नहीं करना होगा, पुराना रसीद और एक 11 हजार और दूसरा डोनेशन के लिए 51 हजार रुपये का चेक भेजवा दें, अपको सदस्यता भी दे दी जायेगी और चुनाव भी लड़ाकर पद भी दिलवा दिया जायेगा. वे बताते हैं पहले जो प्रक्रिया पूरी की थी और सदस्यता प्रमाण पत्र भी मिला था, वह क्या जाली था, अब देंगे उसकी क्या गारंटी है. हमने मना कर दिया. कहा कि मेरे अकेले की बात नहीं है, हमारे साथ 135 लोगों के मान-सम्मान की बात है. सदस्यता दिए जाने के सारे पुख्ता सबूत हमारे पास है. नाजायज बर्दास्त नहीं करेंगे. हमें सिर्फ न्याय चाहिए. [wpse_comments_template]  

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