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राष्ट्रीय कायस्थवृंद के सदस्यों ने 61वीं पुण्यतिथि पर डॉ राजेंद्र प्रसाद को किया याद

डॉ. राजेंद्र प्रसाद सादगी पसंद, दयालु और निर्मल स्वभाव के थे :  त्रिपुरारी बक्सी Giridih  :  भारत के पहले राष्ट्रपति और महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 61वीं पुण्यतिथि है. कायस्थों की अग्रणी संस्था राष्ट्रीय कायस्थवृंद ने पुण्यतिथि पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद को याद किया. साथ ही डॉ राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. स्थानीय कर्बला रोड जेपी नगर स्थित राष्ट्रीय कायस्थवृंद के जिला कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद बक्सी ने की. वहीं संचालन जिला सचिव संजीव सिन्हा `सज्ज्न` ने किया. कार्यक्रम में त्रिपुरारी बक्सी, राजेश कुमार, शिवेन्द्र सिन्हा, संजीव रंजन सिन्हा, विकास सिन्हा, कुमार राकेश, राजेश कुमार सिन्हा `राजू`, दीपक कुमार सिन्हा, मुकेश कुमार सिन्हा, अभय कुमार, रंजीत सिन्हा आदि मौजूद रहे.

राजेंद्र बाबू ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में निभायी थी महत्वपूर्ण भूमिका 

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने राजेंद्र प्रसदा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद सादगी पसंद, दयालु और निर्मल स्वभाव के व्यक्ति थे. वक्ताओं ने बताया कि राजेंद्र बाबू का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई नामक गांव में हुआ था. उनके पूर्वज मूलरुप से कुआंगांव-अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले थे. राजेंद्र बाबू के पिता महादेव सहाय और माता कमलेश्वरी देवी थी. पिता संस्कृत और फारसी के विद्वान थे. वहीं माता धार्मिक महिला थीं. वे उन भारतीय नेताओं में से थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. महात्मा गांधी ने उन्हें अपने सहयोगी के रूप में चुना था और साबरमती आश्रम की तर्ज पर सदाकत आश्रम की एक नयी प्रयोगशाला का दायित्व भी सौंपा था.

लगातार दो बार राष्टपति बनने वाले पहले व्यक्ति थे डॉ राजेंद्र प्रसाद

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद चाहे धर्म हो, वेदांत हो, साहित्य हो, संस्कृति, शिक्षा, इतिहास, राजनीति हो या भाषा, वे हर स्तर पर अपने विचार व्यक्त करते थे. उनकी स्वाभाविक सरलता के कारण वे अपने ज्ञान-वैभव का प्रभाव कभी प्रतिष्ठित नहीं करते थे. `सादा जीवन, उच्च विचार` के अपने सिद्धांत को अपनाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपनी वाणी में हमेशा ही अमृत बनाये रखते थे. कहा कि आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के साथ ही राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने. वर्ष 1957 में वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गये. इस तरह वे भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति पद प्राप्त किया था. उन्हें सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान `भारत रत्न` से भी नवाजा गया.  डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बाद में राजनीति से संन्यास ले लिया और अपना शेष जीवन पटना के निकट एक आश्रम में बिताया. इसी आश्रम में 28 फरवरी 1963 को उनका निधन हो गया. [wpse_comments_template]

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