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राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा, बिनोद बिहारी महतो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग

 
Ranchi :  रांची में किसी चौक (चौराहे) को झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो के नाम करने और उनकी प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में राज्यपाल संतोष गंगवार को एक ज्ञापन दिया गया है. ज्ञापन देने वाले वेदांत कौस्ताव   ने कहा कि रांची में किसी चौराहे पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के साथ उनका नामकरण किया जाना झारखंडी जनभावना को उत्साहित करेगा. साथ ही नयी पीढ़ी अपने महान धरती पुत्र को नजदीक से जान सकेगी. कहा कि रांची में ही विभिन्न जगहों, खासकर चौक- चौराहों पर महापुरुषों, वीर शहीदों की प्रतिमाएं लगी हैं. इसी सिलसिले में रांची में किसी चौक को बिनोद बिहारी महतो के नाम करने और उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं. वेदांत कौस्ताव ने आग्रह किया कि इस दिशा में  जिला प्रशासन को उचित कार्रवाई करने का निर्देश देने की कृपा करें.

बिनोद बिहारी महतो तीन बार बिहार विस और एक बार लोकसभा के सदस्य रहे

बिनोद बिहारी महतो का जन्म 23 सितंबर 1923 को धनबाद के बालीपुर प्रखंड के बङादाहा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी काबिलयत और लगन से उच्च शिक्षा हासिल की. वे एक वकील और राजनीतिज्ञ थे.  इसके साथ ही सामाजिक चेतना के अग्रदूत के तौर पर उन्होंने ख्याति हासिल की. वे संगठिक, शिक्षित और स्वाभिमानी समाज के पैरोकार थे।.उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लंबा आंदोलन चलाया. बिनोद बाबू का नारा पढ़ो और लड़ो  हमेशा से समाज को गर्व और गुमान का बोध कराता है. तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य और एक बार लोकसभा के सदस्य रहे बिनोद बाबू का निधन 18 दिसंबर 1991 को हुआ था.  
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