प्रभु यीशु ने गौशाले में जन्म लेना स्वीकार किया. उसी का प्रतीक है क्रिसमस और चरनी . हमें यही स्मरण दिलाती है कि अभी भी ऐसे लोग हैं, जिन्हें भरपेट भोजन नहीं मिलता. तन में कपड़े पहनने को नहीं है. लोग बिना कपड़ो के ठंड में कांपते हुए रात ऐसी जगह गुजारते हैं,जहां पशु रहते हैं, एक गोशाला में. प्रभु ने अभाव में जन्म लेने से एक अच्छी बात सीख में दी है. भूखे, गरीब, अन्याय, लिंग, रंग, जाति और धर्म के नाम पर तिरस्कृत लोग भी ईश्वर की संतान हैं. उन्हें भी आनंद और अवसर प्राप्त करने का अधिकार है.. प्रभु के सिखाए हुए मार्ग पर चलने की जरूरत है. दूसरों की आवश्यकता का ध्यान रखने की आवश्यकता है.आज भी ग़रीब लोग भुखमरी, लाचारी, अन्याय, शोषण, अछूत जैसे चरनी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं. इस क्रिसमस में अपनी सहायता, मदद एवं सेवा का उपहार लेकर उनसे मिलने जायें.
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alt="" width="270" height="189" /> बीबी बास्के[/caption] संत पॉल्स चर्च में शाम पांच बजे पुरोहित जे भुईया ने कार्यक्रम का संचालन किया. प्रवेशन कैरोल हुआ पहला पाठ सुप्रिया तिर्की व दूसरा पाठ राहुल परधिया ने किया. मध्यरात्रि 11.30 बजे बीबी बास्के मुख्य अनुष्ठक रहे. इसके साथ में पुरोहित जे भेंगरा, पुरोहित वी कुजूर, पुरोहित एस पूर्ती पुरोहित यूजे सांगा, पुरोहित जे भुईया, पुरोहित जी डहंगा समेत अन्य मौजूद थे. ।
पुण्य रात की पहली आराधना शाम चार बजे शुरू हुई
जीईएल चर्च में शाम चार बजे रेव्ह एन गुडिया ने परमेश्वर की आराधना करायी. उपदेश रेव्ह जीएस केरकेट्टा ने दिये. दूसरी आराधना शाम 5.30 बजे रेव्ह एन गुड़िया ने करायी. उपदेशक मॉडरेटर मार्सल केरकेट्टा थे. मध्य रात्रि 11 बजे की आराधना रेव्ह एन गुडिया ने कराई उपदेशक आलोक मिंज थे.संत पॉल्स कथिड्रल चर्च के मुख्य उपदेशक बीबी बास्के शामिल हुए
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alt="" width="270" height="189" /> बीबी बास्के[/caption] संत पॉल्स चर्च में शाम पांच बजे पुरोहित जे भुईया ने कार्यक्रम का संचालन किया. प्रवेशन कैरोल हुआ पहला पाठ सुप्रिया तिर्की व दूसरा पाठ राहुल परधिया ने किया. मध्यरात्रि 11.30 बजे बीबी बास्के मुख्य अनुष्ठक रहे. इसके साथ में पुरोहित जे भेंगरा, पुरोहित वी कुजूर, पुरोहित एस पूर्ती पुरोहित यूजे सांगा, पुरोहित जे भुईया, पुरोहित जी डहंगा समेत अन्य मौजूद थे. ।
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