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पीएम मोदी की मॉर्फ्ड आपत्तिजनक रील्स प्रसारित किये जाने के मामले में फंसे Meta India के अधिकारी, एफआईआर

पीएम मोदी की मॉर्फ्ड (AI-generated) और आपत्तिजनक रील्स और तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में  हैदराबाद साइबर पुलिस ने मेटा इंडिया (Meta India) के प्रमुख अरुण श्रीनिवास सहित अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
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NewDelhi/Hyderabad : पीएम मोदी की मॉर्फ्ड (AI-generated) और आपत्तिजनक रील्स और तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में  हैदराबाद साइबर पुलिस ने मेटा इंडिया (Meta India) के प्रमुख अरुण श्रीनिवास सहित अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

 

खबरों के अनुसार हैदराबाद साइबर पुलिस ने भ्रामक और मॉर्फ्ड कंटेंट को सोशल मीडिया पर फैलने से रोकने व कार्रवाई के तहत मेटा इंडिया हेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है.  पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को आधिकारिक नोटिस भेज कर जवाब तलब किया है.

 

इसके अलावा उन व्यक्तिगत फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट चलाने वालों को भी  नामजद किया गया है. जो इस तरह के आपत्तिजनक वीडियो साझा कर रहे थे.  हैदराबाद साइबर पुलिस ने भाजपा समर्थकों की दो अलग-अलग शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज किया है.

 

इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे NEET पेपर लीक आंदोलन के दौरान फेसबुकऔर इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी की अश्लील, अपमानजनक और भ्रामक तस्वीरें-वीडियो प्रसारित-प्रचारित किये गये. भाजपा समर्थक कारोबारी एसअरविंद रेड्डी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि जब वे  इंस्टाग्राम चला रहे थे तो उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के कई AI से बनाए गए और एडिट किये गये वीडियो और फोटो नजर आये.

 

दूसरी शिकायत तेलंगाना के भाजपा कार्यकर्ता और सोशल मीडिया कोर कमेटी के सदस्य टी. साईकिरण गौड़ द्वारा दर्ज कराई गयी है. उनका आरोप कि बुधवार को फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते समय उन्हें पीएम की आपत्तिजनक रील्स और मॉर्फ  तस्वीरें मिलीं.

 

पुलिस नेआरोपियों के खिलाफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66-C (पहचान की चोरी) और 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री पब्लिश या ट्रांसमिट करना) के तहत मामला दर्ज किया है. इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता(बीएनएस) की धारा 353(2) (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) और 336(4) (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला जाली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड) के तहत भी केस दर्ज किया गया है. 

 

 

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