Lagatar Desk
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) की मौत हो गई है. उनकी मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई है. ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार की सुबह इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी. ईरानी राज्य टेलीविजन ने खामेनेई को "शहीद" करार दिया और सरकार ने उनके निधन पर 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक तथा 7 दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है. हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद और पोते की भी मौत हो गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका व इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित खामेनेई के कंपाउंड पर हमला किया, उस वक्त खामनेई अपनी सुरक्षा परिषद के सलाहकार अली शमखानी और आईआरजीसी कमांडरों के साथ बैठक कर रहे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत की घोषणा की और कहा कि ईरान पर भारी बमबारी पूरे हफ्ते या जितना जरूरी हो, बिना रुके जारी रहेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका लक्ष्य मध्य पूर्व और पूरी दुनिया में शांति है. ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के नए नेतृत्व के लिए "कुछ अच्छे उम्मीदवार" हैं.
ईरान पर यह हमला "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत किया गया, जिसमें अमेरिका-इजरायल ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य सुविधाओं पर भारी हमले किए. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय देशों पर मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर है.
खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और आयतुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के बाद इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहे. उन्होंने ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. उनकी मौत के साथ 1979 की इस्लामिक क्रांति का एक युग समाप्त हो गया है. विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कई देशों में ईरानी समुदायों में जश्न और शोक दोनों के माहौल हैं.
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