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शिया मसलक की मस्जिद में लग रहे यूपी से मंगाए मीनार व गुंबद

 
Rehan Ahmed Ranchi : झारखंड गठन से पूर्व 1983 में राजधानी रांची में शिया समुदाय की आबादी बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन ठीक ठाक हो गई थी. मस्जिद ए जाफरिया के इमाम मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिजवी ने बताया कि समुदाय के लोगों में रांची शहर के मानिंद लोगों में अधिवक्ता मरहूम यावर हुसैन, उर्दू अखबार कौमी तंजीम के संपादक मरहूम अमीर हसन रिजवी, मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी, अंजुमन ए जाफरिया आदि शिया मसलक के बुद्धीजियों ने आबादी के हिसाब से एक शिया मसलक की मस्जिद होने पर रायशुमारी की. इस तरह 1984 में मसलक के लोगों ने अंजुमन जाफरिया की पहल पर चर्च रोड स्थित अंसार नगर में मस्जिद तामीर के लिये छह कट्ठा जमीन खरीदी. जमीन पर 1989 में चहारदिवारी का कार्य पूरा किया गया. इसे भी पढ़ें -पलामूः">https://lagatar.in/palamu-devam-institute-is-not-an-institute-for-passing-the-examination-but-for-taking-one-to-the-destination-avinash-dev/">पलामूः

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7 वर्ष टीन के शेड में अदा हुई नमाज

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alt="" width="600" height="400" /> 26 जनवरी 1999 में मस्जिद की तामीर का काम आरंभ हो गया. जमीन को चौतरा नुमा बनाकर पहली नमाज 6 जनवरी 2000 को टेंट के सहारे शुरू हुई. उसके बाद टीन का शेड डाला गया, उसमें पहली ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई. इस तरह 7 वर्ष टीन के शेड में ही नमाज अदा होती रही.

2007 में मस्जिद के निर्माण के लिये रखी गई संग ए बुनियाद

उसके बाद 25 फरवरी 2007 को मस्जिद ए जाफरिया के नये निर्माण के लिये संग ए बुनियाद में हर मसलक के उलेमा शरीक हुए. उलेमाओं में मौलाना असगर मिसबाही, मौलाना तौफीक अहमद कादरी, मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी, कोलकाता के मौलाना मोहसिन रजा, मरहूम अधिवक्ता यावर हुसैन, बोहरा जमात के मजहबी रहनुमा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उलेमा समेत बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए. उसके बाद मस्जिद ए जाफरिया का उद्घाटन 8 जुलाई 2007 में हुआ.

मस्जिद कैंपस में इमाम बाड़ा, हॉस्टल, लाइब्रेरी बनी

9 अक्टूबर 2007 में मस्जिद कैंपस के एक ओर इमाम बाड़ा व हॉस्टल की बुनियाद रखी गई. इसकी बुनियाद बनारस के मौलाना समीमुल हसन ने रखी. मस्जिद ए जाफरिया शिया मुसलमानों का वाहिद एक रांची में प्रसिद्ध इबादत खाना मस्जिद है. रांची के मोमिनों की अहम भूमिका है, इस तरह मस्जिद का जी 2 बन कर तैयार है.

महिलाओं के लिये अलग हॉल है

मस्जिद परिसर में महिलाओं की मजलिस के लिये अलग हॉल है. हॉ्सटल व लाइब्रेरी में गरीब बच्चों को नि:शुल्क सुविधा दी जाती है. मस्जिद में हुई मजलिसों में राज्यपाल मरहूम डॉ सैयद अहमद, राज्यपाल मरहूम सैयद सिब्ते रजी आदि विशिष्ट लोग शामिल हुए हैं. यहां मजलिस में बनारस, लखनऊ समेत देश-विदेश के अंतर्राष्ट्रीय उलेमा शरीक हुए और मजलिसों को संबोधित किया. मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी ने कहा कि मस्जिद में नया गेट लगाया गया है. मस्जिद में नक्काशी मीनार व गुंबद का काम चल रहा है. मीनार यूपी से मंगवाये गये हैं. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-police-headquarters-directs-all-sps-to-keep-soldiers-ready-for-election-training/">झारखंड

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