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खनन पद्धति नए अनुसंधान पर हो आधारित, क्षेत्र में इनोवेशन को मिले बढ़ावा : राज्यपाल

 
Ranchi : राज्यपाल रमेश बैस ने कहा है कि हमारे राज्य में समृद्ध भंडार हैं. हम इन खनिज संपदा का कुशलतापूर्वक उपयोग तभी कर पायेंगे जब हमारी खनन पद्धतियां बेहतर व नवीन अनुसंधान पर आधारित हो. उन्होंने कहा कि खनन के क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है. उन्होंने कहा, किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था में वहां स्थापित उद्योगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. उद्योग केवल रोजगार के साधन ही नहीं होते, बल्कि ये पलायन की समस्या का भी समाधान करते हैं. इसे पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/ranchi-corporations-team-working-on-alert-mode-for-drainage-of-water-and-removal-of-fallen-trees/">रांची

: पानी की निकासी व गिरे पेड़ को हटाने के लिए अलर्ट मोड पर काम कर रही निगम की टीम 
राज्यपाल शनिवार को पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित झारखंड माइनिंग समिट को संबोधित कर रहे थे. समिट में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ.संजय श्रीवास्तव, सीसीएल के सीएमडी पीएम प्रसाद, मेकॉन लिमिटेड के सीएमडी सलिल कुमार, माइंस हिंडालको लिमिटेड के अध्यक्ष बी.के. झा, पी.एच.डी. चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वरीय स्थानीय निदेशक मंतोष सिंह समेत विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि मौजूद थे. राज्यपाल ने कहा कि खनिज संपदा प्रकृति द्वारा दी गई बहुमूल्य उपहार है, लेकिन यह एक बार उपयोग में आने के  बाद लगभग समाप्त हो जाते हैं. इसका संबंध हमारे वर्तमान एवं भविष्य के कल्याण से है, ऐसे में हमें इन संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने के साथ-साथ इनके संरक्षण की दिशा में भी ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, राज्य में खनिज के विभिन्न भंडार ऐसे भी होंगे, जिनका पता नहीं है. इस प्रकार के भंडारों का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण होना चाहिए. इसे भी पढ़ें-UPA">https://lagatar.in/after-the-meeting-of-upa-the-mlas-said-there-is-no-crisis-on-the-government/">UPA

की बैठक के बाद एक सुर में विधायकों ने कहा- सरकार पर नहीं है संकट
समिट में राज्यपाल ने पर्यावरण के प्रति भी बहुत ही संवेदनशील होने की जरूरत पर बल दिया. कहा कि हमारे औद्योगिक प्रतिष्ठानों व सार्वजनिक लोक उपक्रमों को सीएसआर के तहत खर्च किये जाने वाली राशि को जनहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए. उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में भी और तेजी से काम कर राष्ट्र और राज्य हित में अपना सक्रिय योगदान देना चाहिए. [wpse_comments_template]  
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