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हिंदुओं को राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा? मोदी सरकार ने SC में कहा, राज्यों से बात करनी होगी

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NewDelhi : हिंदुओं की संख्या जिन राज्यों में कम है, उन्हें वहां अल्पसंख्यक का दर्जा दिये जाने के मामले में उन राज्य सरकारों और अन्य पक्षकारों से व्यापक विचार विमर्श करने की जरूरत है. यह हलफनामा केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर किया. बता दें कि SC ने यह सवाल केंद्र सरकार से पूछा था. मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इसका देश भर में दूरगामी असर होगा. बिना विस्तृत चर्चा के लिया गया फैसला देश के लिए अनपेक्षित जटिलता का कारण बन सकता है. इसे भी पढ़ें : जम्मू-कश्मीर">https://lagatar.in/jk-lg-manoj-sinha-offers-prayers-at-8th-century-martand-sun-temple-asi-objected/">जम्मू-कश्मीर

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अल्पसंख्यक मंत्रालय ने  हलफनामा दाखिल किया

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की याचिका के जवाब में केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने यह हलफनामा दाखिल किया है. बता दें कि केंद्र का नया रुख कुछ मायनों में उसके 25 मार्च को दाखिल एफिडेविट से अलग है, जिसमें उसने हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने की जिम्मेदारी राज्यों पर डालने की कोशिश की थी. उस समय केंद्र ने कहा था कि राज्यों के पास भी किसी समूह को अल्पसंख्यक घोषित करने का अधिकार है. इसे भी पढ़ें : मोहाली">https://lagatar.in/rocket-propelled-grenade-attack-at-intelligence-wing-headquarters-of-punjab-police-in-mohali-no-casualties/">मोहाली

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केंद्र ने नया हलफनामा पेश किया 

केंद्र ने यह कहकर याचिका खारिज करने की गुहार लगाई थी कि याचिकाकर्ता द्वारा की गयी मांग किसी बड़े सार्वजनिक या राष्ट्रीय हित में नहीं है. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट के लगातार जोर डालने और 7500 रुपये का जुर्माना लगाये जाने के बाद केंद्र ने हलफनामा दाखिल किया था. हालांकि 28 मार्च को सुनवाई के क्रम में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से और समय मांगा था. अब केंद्र ने नया हलफनामा पेश किया है.

याचिका 2020 में दायर की गयी थी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अश्विनी उपाध्याय की जिस याचिका पर केंद्र का हलफनामा आया है, वो 2020 में दायर की गयी थी. उससे पहले 2017 में भी उन्होंने हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग करते हुए पहली बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को भेज दिया गया था, जिसने कहा गया था कि केवल केंद्र सरकार ही ये राहत दे सकती है. इसे भी पढ़ें : ओडिशा">https://lagatar.in/cyclone-asani-moving-towards-odisha-rain-with-strong-winds-in-andhra-odisha-government-on-alert/">ओडिशा

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जम्मू-कश्मीर,अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर ,पंजाब में हिंदू अल्पसंख्यक

एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने 2011 की जनगणना के आधार पर याचिका में कहा है कि लक्षद्वीप, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के टीएमए पई मामले में दिये गये  फैसले के अनुसार  इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना चाहिए. केंद्र ने नये हलफनामे में 1992 के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) एक्ट और 2004 के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग (NCMEI) कानून का बचाव किया है. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट के तहत केंद्र ने 6 समुदाय- ईसाई, सिख, मुस्लिम, बौद्ध, पारसी और जैन को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक घोषित कर रखा है. NCMEI एक्ट राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट के तहत अधिसूचित छह समुदायों को उनकी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार देता है. [wpse_comments_template]

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