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7 करोड़ की हेराफेरी, चतरा में डीएमएफटी फंड के उपयोग में गड़बड़झाला

  • डीसी ऑफिस व चापानल मरम्मत के नाम पर की गई राशि की बंदरबांट
  • पीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में तत्कालीन उपायुक्तों को दिया गया था दोषी करार
  • जून 2022 में खान विभाग को भेजी गई थी रिपोर्ट
  • राशि वसूलने की अनुशंसा भी की गई थी
  • खान विभाग ने अब नहीं की कार्रवाई
Pravin Kumar Chatra : झारखंड के प्रिंसिपल ऑडिटर जनरल (पीएजी) ने चतरा के माइनिंग क्षेत्र के विकास के लिए बनाए गए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड की ऑडिट रिपोर्ट में 7 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा किया था. ऑडिट रिपोर्ट 22 अप्रैल 2022 को मुख्य सचिव को सौंपी गयी थी. रिपोर्ट में जितनी राशि की हेराफेरी कर गड़बड़ी की गयी है, उसे जिले के तत्कालीन उपायुक्तों से वसूल करने की अनुशंसा की गयी है. खान विभाग ने पीएजी ऑडिट में की गयी आपत्तियों को लेकर जिले से रिपोर्ट तलब की. जिला स्तर पर जून 2022 में खान विभाग को रिपोर्ट भेज दी गयी थी, लेकिन खान विभाग ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है. पीएजी ने विभाग की चुप्पी को देखते हुए इस मामले में मुख्य सचिव से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया था. इसके बाद पूरे मामले की जांच खान विभाग अपने स्तर से करा रहा है. मामला सीधे तौर पर जिले में पदस्थापित रहे आईएएस अधिकारियों से जुड़ा है. ऐसे में कार्रवाई हुई तो जिले में पदस्थापित रहे कई उपायुक्तों पर गाज गिर सकती है. ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, अंजली यादव के बतौर चतरा डीसी कार्यकाल के दौरान डीएमएफटी फंड में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की शिकायत मिली है.

460.80 करोड़ की योजना नहीं हुई पूरी

पीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, चतरा जिले में डीएमएफटी फंड से वर्ष 2016 से 2023 तक के लिए 56778.84 लाख रुपये की 263 योजनाएं स्वीकृत की गयी थीं. इनमें से मात्र 40 योजनाएं ही पूरी हुईं. 460.18 करोड़ रुपये की योजनाएं अब भी पूरी नहीं हुई हैं. डीएमएफटी फंड से टंडवा में शुरू की गई जलापूर्ति योजना का काम विगत 8 माह से बंद है. डीएमएफटी शासी परिषद ने ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना ही इस योजना की मंजूरी दे दी थी.

अंजली यादव के डीसी रहते हुई सबसे ज्यादा गड़बड़ी

पीएजी इंदु अग्रवाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीएमएफटी फंड से संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में चतरा के तत्कालीन उपायुक्तों ने मनमानी की. उन्होंने डीएमएफटी फंड की राशि केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों और नियमों को ताक पर रखकर खर्च की. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंजली यादव के डीसी रहते चतरा जिले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी सामने आई है. मालूम हो कि खनन से प्रभावित क्षेत्र में उच्च प्राथमिकता की योजनाओं के साथ ही पर्यावरण सहित आधारभूत संरचना जैसे- सिंचाई, वाटरशेड व ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं पर खर्च को लेकर केंद्र सरकार की ओर से डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की स्थापना की गयी थी.

डीएमएफटी फंड से बनाया कांफ्रेंस हॉल

पीएजी रिपोर्ट में कहा गया है चतरा में डीएमएफटी फंड की राशि से डीसी कार्यालय में अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल का निर्माण कराया गया. खराब चापाकलों की मरम्मत और नए चापाकल लगवाने के नाम पर बड़े पैमाने पर राशि की बंदरबांट की गयी. इस फंड से करीब 75 लाख रुपये से उपायुक्त कार्यालय की मरम्मत करा कर इसे प्रशासनिक खर्च के रूप में दिखाया गया है, जबकि प्रधानमंत्री खनन क्षेत्र कल्याण योजना के तहत अफसरों के कार्यालयों की मरम्मत आदि का खर्च प्रशासनिक खर्च के दायरे में नहीं आता है.

खान सचिव अबुबकर सिद्दीकी ने कहा- पीएजी की रिपोर्ट नहीं मिली

खान सचिव अबुबकर सिद्दीकी का कहना है कि पीएजी की आधिकारिक रिपोर्ट खान विभाग के पास नहीं आयी है. रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी के मामले में जिले से रिपोर्ट मंगायी है, जिसकी विभाग जांच करा रहा है. जांच के बाद ही बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी. इसे भी पढ़ें – JPSC:">https://lagatar.in/jpsc-7th-to-10th-civil-services-exam-cutoff-marks-released/">JPSC:

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