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मिशन संथाल: कमजोर विधानसभा सीटों पर इस बार कई फेरबदल कर सकती है भाजपा

Satya Sharan Mishra Ranchi: संथाल में पार्टी का झंडा लहराने के लिए भाजपा ने योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू कर दिया है. कमजोर विधानसभा सीटों पर इस बार कई फेरबदल हो सकते हैं. 20 हजार से ज्यादा वोट से हारने वाले नेताओं का इस बार टिकट कट सकता है. ऐसे 6 विधानसभा सीट हैं, जहां भाजपा 2019 के विधानसभा चुनाव में 20 हजार से ज्यादा वोटों से हारी है. महेशपुर, पाकुड़, बोरियो, बरहेट, जामताड़ा और शिकारीपाड़ा यह 6 सीट हैं, जहां भाजपा 2019 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारी थी. वहीं जिन सीटों पर 2 से 5 हजार वोट से भाजपा हारी है उन विधानसभा क्षेत्रों में भी सांगठनिक फेरबदल करने की तैयारी है. इनमें नाला, जामा, जरमुंडी, देवघर और गोड्डा शामिल हैं. वहीं दुमका, बोरियो, लिट्टीपाड़ा में भाजपा 10 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव हारी थी.

इन सीटों पर 20 हजार से ज्यादा वोटों से हारी थी भाजपा

विधानसभा भाजपा को मिले वोट गठबंधन को मिले वोट वोट का अंतर बरहेट 47985 73725 25740 पाकुड़ 63110 128218 65108 महेशपुर 55091 89197 34106 शिकारीपाड़ा 49929 79400 29471 जामताड़ा 74088 112829 38741 मधुपुर 65046 88115 23069

इन सीटों पर 10000 से ज्यादा वोटों से हारी थी भाजपा

विधानसभा भाजपा को मिले वोट गठबंधन को मिले वोट का अंतर बोरियो 59441 77365 17924 लिट्टीपाड़ा 52772 66672 13900 दुमका 67819 81007 13118 महगामा 89224 76725 12499 

इन सीटों पर 5000 से कम वोटों से हारी थी भाजपा

विधानसभा भाजपा को मिले वोट गठबंधन को मिले वोट का अंतर नाला 57836 61356 3520 जामा 58499 60925 2426 जरमुंडी 49908 52502 2594

बोरियो से फिर ताला हो सकते हैं उम्मीदवार

10 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव हारने वाले नेताओं की वर्तमान में अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच पकड़ और उनकी लोकप्रियता का आंकलन किया जा रहा है. बोरियो सीट इस बार ताला मरांडी को मिल सकता है. 2014 में ताला मरांडी ने जेएमएम को हराकर बोरियो से चुनाव जीता था, लेकिन 2019 में टिकट कटने के कारण आजसू में चले गये थे. वे फिर से भाजपा में आ चुके हैं. उनका इस सीट पर मजबूत दावा है.

भाजपा के यह 6 ट्राइबल नेता हैं एक्टिव, मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

संथाल परगना आदिवासी बहुल क्षेत्र है इसलिए वहां पार्टी आदिवासी चेहरे की तलाश कर रही है. संथाल के कुछ नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. भाजपा के एक नेता ने बताया कि पूर्व विधायक लुईस मरांडी, हेमलाल मुर्मू और मिस्त्री सोरेन के अलावा मिस्फिका हसन, परितोष सोरेन और सुखमनी हेंब्रम संथाल में भाजपा के एक्टिव नेता हैं. इन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, वहीं कुछ नेताओं के कामकाज से प्रदेश नेतृत्व खुश नहीं है. इनमें दुमका के सांसद सुनील सोरेन भी शामिल हैं.

आलमगीर को चुनौती देने मिस्फिका को उतार सकती है भाजपा

पाकुड़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस की मजबूत पकड़ है. आलमगीर आलम 2019 के विधानसभा चुनाव में संथाल में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाले नेता थे. 2019 में भाजपा के बेनी प्रसाद गुप्ता को हराकर उन्होंने लगातार चौथी बार वहां से जीत दर्ज की थी. इस बार भाजपा वहां से मिस्फिका हसन पर दांव खेल सकती है. पाकुड़ की मिस्फिका को भाजपा ने पहले प्रदेश प्रवक्ता बनाया, उसके बाद उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है. मिस्फिका पाकुड़ में खूब एक्टिव भी हैं.

संथाल की 18 में से सिर्फ 4 सीटों पर है भाजपा का कब्जा

संथाल परगना के 18 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा है. जिन सीटों पर अभी भाजपा काबिज है, उनमें से दो सीटों पर ही वह 10000 से ज्यादा वोटों से चुनाव जीती है. इनमें राजमहल और सारठ शामिल है, जबकि देवघर और गोड्डा में पार्टी 5 हजार से कम वोटों से जीत पाई है. इन दोनों सीटों को बूथ लेबल तक मजबूत करने के लिए संगठन के साथ-साथ विधायक भी जोर-शोर से लगे हुए हैं. वहीं पोडैयाहाट, मधुपुर और जरमुंडी में भी कमल खिलाने के लिए भाजपा ने अभी से पसीना बहाना शुरू कर दिया है. [wpse_comments_template]  

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