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IIT (ISM) में मिशन Y सम्मेलन, छोटी नदियों के संरक्षण पर जोर, जल समानता और भूमि उपयोग पर चर्चा

Dhanbad: धनबाद स्थित IIT(ISM) में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मिशन Y का आयोजन किया गया. सम्मेलन के पहले दिन देश भर के पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने नदियों के संरक्षण, जल समानता और बदलते भूमि उपयोग पर चर्चा की. सम्मेलन में पद्मश्री से सम्मानित डॉ आरके सिन्हा, मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह और वरिष्ठ पर्यावरणविद व विधायक सरयू राय सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए. वक्ताओं ने जल संकट, नदियों के घटते अस्तित्व और पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे.
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IIT (ISM) में मिशन Y सम्मेलन, छोटी नदियों के संरक्षण पर जोर, जल समानता और भूमि उपयोग पर चर्चा

Dhanbad: धनबाद स्थित IIT(ISM) में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मिशन Y का आयोजन किया गया. सम्मेलन के पहले दिन देश भर के पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने नदियों के संरक्षण, जल समानता और बदलते भूमि उपयोग पर चर्चा की. सम्मेलन में पद्मश्री से सम्मानित डॉ आरके सिन्हा, मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह और वरिष्ठ पर्यावरणविद व विधायक सरयू राय सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए. वक्ताओं ने जल संकट, नदियों के घटते अस्तित्व और पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे.

 

कार्यक्रम के संयोजक और प्रसिद्ध जल विज्ञानी प्रो अंशुमाली ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य जलधाराओं के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और भूमि उपयोग में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच संतुलन बनाने के उपाय तलाशना है. उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नीति निर्माण और समाज की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है.

 

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अतिथियों का स्वागत करते आयोजन समिति के सदस्य.

 

इस अवसर पर सरयू राय ने छोटी नदियों और जलधाराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बड़ी नदियां इन्हीं छोटी जलधाराओं से बनती हैं. यदि इनका अस्तित्व खतरे में है तो बड़ी नदियों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के मूल स्थानों को बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है.

 

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कार्यक्रम में बोलते पर्यावरणविद व विधायक सरयू राय.

 

सम्मेलन में प्रो अंशुमाली द्वारा पिछले छह वर्षों से किए जा रहे शोध का भी उल्लेख किया गया जिसमें यह स्पष्ट हुआ है कि छोटी नदियों और जलधाराओं का संरक्षण ही नदियों के दीर्घकालिक अस्तित्व की कुंजी है. विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि अनियंत्रित शहरीकरण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन के कारण देशभर में छोटी नदियां तेजी से विलुप्त हो रही हैं.

 

डॉ आरके सिन्हा ने कहा कि सहायक नदियां मुख्य नदियों की जीवनरेखा होती हैं. यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो जल संकट और गंभीर हो सकता है. उन्होंने सरकार और समाज से मिलकर ठोस कदम उठाने की अपील की.

 

दो दिवसीय इस सम्मेलन में जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी सत्र, शोध प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श आयोजित किए जा रहे हैं. कार्यक्रम का उद्देश्य नदियों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति तैयार करना और जागरूकता बढ़ाना है.

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