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सदन में विधायक प्रदीप प्रसाद ने बजट और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार बजट खर्च करने, योजनाएं पूरी करने और भ्रष्टाचार रोकने में विफल रही है.

 

प्रदीप प्रसाद ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग को 9500 करोड़ रुपये मिले, लेकिन जनवरी 2026 तक केवल 367 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए. ग्रामीण कार्य विभाग में 4500 करोड़ के बजट में से सिर्फ 10 करोड़ खर्च हुए. पंचायती राज विभाग को 1702 करोड़ मिले, जिसमें से 454 करोड़ ही खर्च हो पाए. उन्होंने कहा कि जब पुराना बजट ही खर्च नहीं हो रहा है, तो नए बजट का क्या मतलब है.

 

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विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य में विकास कम और भ्रष्टाचार ज्यादा हो रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों के यहां छापेमारी में करोड़ों रुपये नकद और महंगी वस्तुएं मिली हैं. उन्होंने कहा कि कई अधिकारी घूसखोरी में लिप्त हैं और सदन में सही जवाब नहीं देते. उन्होंने सरकार से ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

 

अधूरी पड़ी ग्रामीण योजनाएं


प्रदीप प्रसाद ने कहा कि उनके क्षेत्र में कई सड़क और पुल निर्माण की योजनाएं लंबित हैं. उन्होंने बताया कि 40 सड़कों और पुल-पुलिया की सूची देने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ. कई जगह ग्रामीण खुद अपने पैसे से सड़क की मरम्मत करवा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे जनता में नाराजगी है.

 

विधायक ने पंचायत प्रतिनिधियों के कम मानदेय को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष, मुखिया और उप मुखिया को बहुत कम वेतन मिलता है. उन्होंने सरकार से इनका मानदेय बढ़ाने की मांग की ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके.

 

उन्होंने कहा कि अबुआ आवास योजना के तहत 7 लाख से अधिक आवास स्वीकृत हुए, लेकिन अब तक बहुत कम घर बनकर तैयार हुए हैं. उन्होंने इसे सरकार की धीमी कार्यशैली का उदाहरण बताया.

 

प्रदीप प्रसाद ने कहा कि प्रखंड स्तर पर अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुन रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने सरकार से व्यवस्था सुधारने और जवाबदेही तय करने की मांग की.

 

अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को टालमटोल छोड़कर विकास कार्यों को तेजी से पूरा करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनप्रतिनिधि जनता के लिए काम नहीं कर पाएंगे तो उन्हें दोबारा चुनकर आने का अधिकार नहीं होगा.

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