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बिहार में विधायकों को अब मिलेंगे सालाना 4 करोड़

Patna : बिहार सरकार ने मंगलवार को राज्य के समग्र विकास के लिए मुख्यमंत्री स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (सीएमएलएडीएस) के तहत विधायक और विधान पार्षद के लिए विकास कोष की राशि तीन करोड़ रुपये से बढ़ाकर चार करोड़ रुपये सालाना करने की घोषणा की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से बिहार विधानसभा सदस्य और बिहार विधान परिषद सदस्य अब अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए सीएमएलएडीएस के तहत अधिक धन का उपयोग कर सकेंगे. उन्होंने कहा, यह प्रस्ताव राज्य सरकार के योजना और विकास विभाग द्वारा कैबिनेट के समक्ष रखा गया था. प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और यह चालू वित्त वर्ष से प्रभावी होगा. अब इस योजना के तहत हर साल 954 करोड़ की जगह 1274 करोड़ खर्च होंगे.

डीएमसीएच के नए भवन के लिए 3115 करोड़ रुपये

सिद्धार्थ ने कहा कि बिहार कैबिनेट ने दरभंगा में 2500 बिस्तरों वाले नये दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के निर्माण के लिए 2546.41 करोड़ रुपये के आवंटन को भी मंजूरी दे दी है. इससे पहले राज्य सरकार ने डीएमसीएच के नए भवन के निर्माण के लिए 579 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी. अब सरकार ने नए भवन के निर्माण के लिए अतिरिक्त 2546.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किये जाने की मंजूरी दे दी है. कैबिनेट के इस फैसले से कुल 3115 करोड़ रुपये डीएमसीएच के नए भवन के लिए अबतक स्वीकृत किया गया है.

विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग का नाम बदला

कैबिनेट ने विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग का नाम बदलने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी. अब इस विभाग का नाम विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विभाग के एक कार्यक्रम में इस संबंध में घोषणा की थी. उनका कहना था कि मौजूदा परिवेश में विभाग का काम देखते हुए इसका यह नाम अधिक व्यावहारिक होगा.

सहकारी समिति को संयंत्र बैंक के लिए सहायता

प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति में सब्जी की खेती में प्रयुक्त होने वाले अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का कृषि संयंत्र बैंक स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी. मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना के तहत 439 करोड़ रुपए से पैक्सों में कृषि संयंत्र बैंक स्थापित किए जाने के बाद अवशेष राशि का उपयोग किया जाएगा. इसके तहत प्रति प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति को 15-15 लाख रुपए उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें 50 फीसदी अनुदान जबकि 50 फीसदी ऋण के रुप में दिया जाएगा. कृषि यंत्रों का क्रय जेम पोर्टल के माध्यम से समिति द्वारा किया जाएगा.
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