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दूसरों का हिसाब मांगने वाले विधायकों की अपनी योजनाओं के खर्च का पूरा हिसाब नहीं

Ranchi News: राज्य सरकार ने विकास योजनाओं से जुड़ी नागरिकों की छोटी-मोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रति विधायक पांच करोड़ रुपये की दर से बजटीय प्रावधान करती है. इस राशि से संबंधित विधायक की अनुशंसा के आलोक में उनके विधानसभा क्षेत्र में नागरिकों की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनायी जाती है.
 

Jharkhand News: दूसरों का हिसाब मांगने वाले विधायकों की अपनी योजनाओं के खर्च का हिसाब झारखंड सरकार को समय पर नहीं मिलता है. सरकार वित्तीय वर्ष 2024-25 के विधायक योजना के खर्च का पूरा हिसाब नहीं जुटा पायी है. अब तो विधायक योजना के खर्च का हिसाब जुटाने के लिए चाटर्ड अकाउंटेट (CA) की सेवाएं ली जा रही है.


राज्य सरकार ने विकास योजनाओं से जुड़ी नागरिकों की छोटी-मोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रति विधायक पांच करोड़ रुपये की दर से बजटीय प्रावधान करती है. इस राशि से संबंधित विधायक की अनुशंसा के आलोक में उनके विधानसभा क्षेत्र में नागरिकों की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनायी जाती है. विधायक मद से योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया सरकार के अन्य विभागों के लिए लागू प्रक्रिया से थोड़ी अगल है.


विधायकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपनी मर्जी से किसी एजेंसी के माध्यम से विभागीय तौर पर काम कराने की अनुशंसा कर सकते हैं. यानी अगर किसी विधायक ने सड़क निर्माण की योजनाओं को ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल से कराने की अनुशंसा की हो तो उस योजना का क्रियान्वयन उसी एजेंसी के माध्यम से विभागीय तौर पर किया जाता है. नियमानुसार विधायक की अनुशंसा के आलोक में योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना पड़ता है.

 

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ग्राफिक्स में समझें, विधायक फंड से खर्च और खर्च का हिसाब.


लेकिन राज्य गठन के बाद से ही विधायक योजना मद से ली गयी योजनाओं के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र मिलने में परेशानी होती रही है. पिछले वित्तीय वर्ष के खर्च का हिसाब नहीं मिलने के बावजूद वित्तीय नियमों में छूट देकर विधायक योजना की राशि विमुक्त कर दी जाती है. राज्य में अभी विधायकों की अनुशंसा पर वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है. लेकिन सरकार को अब तक वित्तीय वर्ष 2024-25 में विधायक योजना की खर्च का पूरा उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है.


वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सरकार ने विधायक योजना मद का 405.00 करोड़ रुपये विमुक्त किया था. इसमें से अब तक उसे सिर्फ 376.59 करोड़ रुपये के ही खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र मिल पाया है. राज्य के 25 जिलों में से सिर्फ छह जिलों में विधायक योजना की पूरी राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र मिल पाया है. इन जिलों में कोडरमा, हजारीबाग, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और लातेहार का नाम शामिल है.


लोहरदगा और लातेहार जिला में 2024-25 से पहले की विधायक योजना की राशि पड़ हुई थी. इसे 2024-25 में खर्च किया गया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लोहरदगा में सिर्फ एक विधायक हैं. 2025-25 में विधायक योजना के लिए पांच करोड़ रुपये विमुक्त किया गया था. लेकिन खर्च 6.09 करोड़ हुआ. जिले में विधायक योजना का 1.09 करोड़ रुपया पहले पड़ा हुआ था. इसी तरह लातेहार में विधायकों की संख्या दो है. जिले में 2024-25 के लिए 10.00 करोड़ रुपये विमुक्त किया गया था. हालांकि खर्च 21.95 करोड़ रुपये हुआ. विधायक योजना का 11.95 करोड़ रुपये जिले में पहले से पड़ा हुआ था.

 

2024-25 की विधायक योजना का उपयोगिता पत्र (करोड़ में)

जिला विधायक राशि उपयोगिता
दुमका 04 20 18.04
साहेबगंज  03 15.00 11.31
गोड्डा 03 15   8.90
पाकुड़ 03 15.00 13.41
देवघर 03 15.00 13.42
जामताड़ा 02 10.00 9.99
गिरिडीह 06 30.00 24.09
कोडरमा 01 5.00 5.00
चतरा 02 10.00 9.47
धनबाद 06 30.00 24.59
बोकारो 04 20.00 18.77
हजारीबाग  04 20.00 20.00
रामगढ़ 02 10.00 8.64
पलामू 05 25.00 24.90
गढ़वा 02 10.00 8.61
लातेहार 02 10.00 21.95
रांची 07 35.00 32.98
खूंटी 02 10.00 9.78
सिमडेगा 02 10.00 10.00
गुमला 03 15.00 15.00
लोहरदगा 01 5.00 6.09
पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) 06 30.00 24.96
पश्चिमी सिंहभूम (चाइबासा) 05 25.00 22.49
सरायकेला 03 15.00 14.11

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