Ranchi : मनरेगा घोटाला से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. खूंटी की तत्कालीन डीसी निलंबित आईएएस पूजा सिंघल की भूमिका की जांच की मांग पर दायर याचिका पर अदालत ने मेंटेनेबिलिटी पर बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस संबंध में अरुण कुमार दुबे ने जनहित याचिका दाखिल की है. हाईकोर्ट में बुधवार को हाइब्रिड मोड में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सरकार की ओर से पैरवी की. सिब्बल ने प्रार्थी अरुण दुबे के अधिवक्ता राजीव कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया. इसपर खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी जिसे चाहे उसे अपना वकील बना सकता है. इसलिए प्रार्थी के अधिवक्ता की बातों को सुना जाएगा. हाईकोर्ट ने दोनों तरफ की दलीलों को सुनते हुए मेंटेनेबिलिटी के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दरअसल पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि खूंटी में मनरेगा घोटाला मामला में कुल कितने केस एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में दर्ज किए गए हैं और केस की अनुसंधान में वर्तमान स्थिति क्या है. इसे भी पढ़ें -सिर्फ">https://lagatar.in/crores-flights-were-touched-in-just-one-click-fake-game-was-being-done-in-name-d-mart-big-basket-big-bazaar/">सिर्फ
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मनरेगा घोटाला: HC में प्रार्थी के वकील की विश्वसनीयता पर उठा सवाल, बोला कोर्ट -जिसे चाहे वकील रखे प्रार्थी

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