Search

मॉडल स्कूल : अब ठेके पर होगी पढ़ाई

Ranchi : मॉडल स्कूल को लेकर राज्य सरकार ने जो परिकल्पना की थी, उस मापदंड पर राज्य के कई स्कूल खरा नहीं उतर रहे. सरकार चाहती थी कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों की शिक्षा का स्तर ऊंचा हो, वे भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें. यानी उनकी पढ़ाई- लिखाई निजी स्कूलों की तरह ही हो. लेकिन मॉडल स्कूलों की राज्य के विभिन्न जिलों से जो रिपोर्ट मिल रही है, वो निराशाजनक है. कई मॉडल स्कूल बदहाल तो दिखता ही है, साथ ही शिक्षा विभाग की इस योजना के प्रति उदासीनता भी झलकती है. राज्य के अधिकांश जिलों में अभी भी मॉडल स्कूल के अपने भवन नहीं हैं. कहीं किराए के भवन में स्कूल चल रहे हैं, तो कहीं पुराने छोटे भवन में. स्कूलों में शिक्षकों की बारी कमी है. कहीं पीने का पानी, तो कहीं शौचालय की कमी है. बच्चों की संख्या की तुलना में शिक्षक कम पड़ रहे हैं. नतीजतन बच्चों में हाईक्लास एजुकेशन देने की सरकार की महात्वाकांक्षी योजना पर शिक्षा विभाग के अफसर पानी पेर रहे हैं. शुभम संदेश टीम की विभिन्न जिलों की रिपोर्ट..

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/MODEL-2_76.jpg"

alt="" width="479" height="265" />रांची : जिस निर्माणाधीन मॉडल स्कूल का सीएम हेमंत सोरेन ने किया था औचक निरीक्षण, उसका 90 प्रतिशत काम पूरा

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/11rc_m_195_11012023_1-1024x576.jpg"

alt="" width="1024" height="576" />

Ranchi : झारखंड के सभी 24 जिलों में हेमंत सोरेन सरकार 80 मॉडल स्कूलों का निर्माण करा रही है. मॉडल स्कूलों में सरकार अप्रैल से शुरू होने वाली शैक्षणिक सत्र में सीबीएसई की तर्ज पर पढ़ाई कराएगी. रांची के जगन्नाथपुर स्थित ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव उच्च विद्यालय को भी मॉडल स्कूल की तर्ज पर बनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वंय मॉडल स्कूलों को लेकर गंभीर हैं. इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि बीते 23 मई 2022 को उन्होंने स्वंय इस स्कूल के निर्माण प्रक्रिया का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया था. आज इस स्कूल का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. स्कूल के निर्माण कार्य का जायजा लेनी पहुंची शुभम संदेश रिपोर्टर को काम कर रहे संवेदक ने बताया कि फरवरी मध्य तक स्कूल को शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा.

साइकिल स्टैंड और खेल ग्राउंड की है व्यवस्था

रांची के जगन्नाथपुर स्थित ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव उच्च विद्यालय में बच्चों को मिलेगी सीबीएसई की तर्ज पर शिक्षा फरवरी मध्य तक शिक्षा विभाग को किया जाएगा स्कूल हैंडओवर, डिजिटल तरीके से होगी बच्चों की पढ़ाई स्कूल कैंपस में बच्चों के साइकिल रखने के लिए दो स्टैंड बनाए गए हैं. बच्चों के खेलकूद के लिए एक फुटबॉल ग्राउंड, दो बॉलीबॉल कोट, एसम्बेली ग्राउंड बनाए गए हैं.

जानें निर्माणाधीन मॉडल स्कूल की आखिर क्या हैं खासियतें

निर्माणाधीन ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव उच्च विद्यालय में दो ब्लॉक बनाए गए हैं. पहला एकेडमी ब्लॉक और दूसरा एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक. एकेडमिक ब्लॉक : कुल 20 कमरे हैं. प्रत्येक कमरे में करीब 50 से 60 बच्चों के बैठने की व्यवस्था होगी. जिसमें चार बाथरूम (दो लड़कों और दो लड़कियों के लिए) हैं. एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक: इसमें एक लाइब्रेरी, एक इंग्लिश रूम, आईटीसी लैब, साइंस के तीनों पार्ट यानी कैमेस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के लिए अलग-अलग लैब की व्यवस्था है. स्कूल में बच्चों की पढ़ाई डिजिटल तरीके से होगी. यानी ब्लैक बोर्ड की कोई व्यवस्था नहीं है.

गिरिडीह: शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है तीसरी का मॉडल स्कूल, संसाधनों की भी कमी

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/MODEL-SCHOOL-TISHRI_821.jpg"

alt="" width="576" height="273" /> इंटर में केवल हिंदी विषय के एक शिक्षक हैं. विद्यालय में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. मॉडल स्कूल तीसरी में 153 विद्यार्थी नामांकित हैं. यहां विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र, संस्कृत, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और हिंदी की पढ़ाई होती है. विद्यालय में मात्र 5 शिक्षक हैं. इंटर में केवल हिंदी विषय के एक शिक्षक हैं. विद्यालय में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. इस विद्यालय में वर्ग 6 से 12 कक्षा तक तक की पढ़ाई होती है. लेकिन विद्यालय की जो स्थिति है उससे यह कहा जा सकता है कि यह मॉडल विद्यालय की योजना के अनुरूप यहां सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. मात्र पांच शिक्षकों के भरोसे चल रहा यह स्कूल अपनी योजना पर खरा नहीं उतर रहा है. बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावक भी संतुष्ट नहीं दिखाई देते हैं.

जिलों और प्रखंडों में बनने वाले 405 उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए नियुक्त होंगे 2000 शिक्षक

झारखंड में शिक्षा की स्थिति को बेहतर करने के लिए हेमंत सोरेन सरकार जिले में मॉडल स्कूल (स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) और प्रखंडों में आदर्श विद्यालय बनाएगी. इन विद्यालयों के लिए स्नातकोत्तर प्रशिक्षित (पीजीटी) और स्नातक प्रशिक्षित (टीजीटी) शिक्षकों की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी. इसे लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने तैयारी शुरू कर दी है. पीजीटी -टीजीटी स्तर के करीब 2000 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी.

जिलों में 80 और प्रखंडों में 325 स्कूलों का किया जाना है निर्माण

बता दें कि मॉडल स्कूलों का निर्माण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक हैं. पहले चरण में इस योजना के माध्यम से झारखंड के 80 सरकारी स्कूलों का चयनित किया गया है. इन चयनित स्कूलों को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा. वहीं, दूसरे चरण में 325 प्रखंडों में सरकार आदर्श स्कूल बनाएगी. इन स्कूलों में बच्चों को सीबीएसई की तर्ज पर सरकार शिक्षा देगी. शिक्षा देने में सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की होगी. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी और शिक्षा अधीक्षक को शिक्षकों की नियुक्ति की जानकारी दी है. इन विद्यालयों में स्वीकृत पद के विरुद्ध रिक्त पदों पर संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी.

2000 शिक्षकों की नियुक्ति की है तैयारी

दोनों ही तरह के स्कूलों में औसतन पांच शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. जिलों में बनने वाले 80 आदर्श स्कूलों में करीब 400 शिक्षकों की नियुक्ति होगी. वहीं, प्रखंडों में बनने वाले 325 आदर्श विद्यालयों में करीब 1600 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. यानी कुल मिलाकर दोनों ही विद्यालयों के लिए 2000 के करीब शिक्षक संविदा पर नियुक्त होंगे.

पीजीटी में 10 और टीजीटी में 17 विषयों के लिए होगी नियुक्ति

पीजीटी में 10 विषयों पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. इन विषयों में हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, गणित, भौतिकी (फिजिक्स), जीव विज्ञान (बॉयोलॉजी) और रसायन शास्त्र (कैमेस्ट्री) शामिल हैं. वहीं टीजीटी में 17 विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति होगी. इसमें उपरोक्त 10 विषयों के अलावा उर्दू, फारसी, समाजोपयोगी, कॉमर्स, भौतिक शिक्षा, गृह विज्ञान (होम सांइस), सिविक्स शामिल हैं.

नियुक्त होने वाले शिक्षकों को मिलेगा यह मानदेय

संविदा पर नियुक्त होने वाले शिक्षकों को मासिक आधार पर मानदेय का भुगतान किया जाएगा. पीजीटी शिक्षकों को 27,500 रुपये प्रतिमाह और टीजीटी शिक्षकों को 26,250 रुपए प्रतिमाह मानदेय भुगतान होगा.

जमशेदपुर: घाटशिला मॉडल स्कूल में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/GHATSHILA-MODEL-SCHOOL-1_100.jpg"

alt="" width="576" height="266" /> राज्य सरकार द्वारा बच्चों को इंटर तक अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने के लिए प्रखंड में मॉडल स्कूल 2012 में स्थापित किया गया. घाटशिला मॉडल स्कूल का न तो अपना भवन है और न ही स्थायी शिक्षक. इस विद्यालय में कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक 171 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. प्रखंड मुख्यालय उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में घाटशिला मॉडल स्कूल संचालित होता है. इस विद्यालय में संस्कृत विषय को छोड़कर बाकी सभी विषयों की पढ़ाई शिक्षक कराते हैं. इस मॉडल स्कूल को अस्थायी शिक्षकों द्वारा मॉडल से एक्सीलेंट बनाने में इस वर्ष कामयाबी मिली है. अनुशासन सहित पठन-पाठन भी अच्छा है.

स्कूल को जल्द मिलेंगे 11 स्थायी शिक्षक

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार पाल ने बताया कि बहुत जल्द विद्यालय में 11 शिक्षक, भवन और लिपिक की भी नियुक्ति अगले 2 माह के अंदर हो जाएगी. जेईपीसी की बीते मंगलवार को हुई बैठक में निदेशक किरण पारसी ने उक्त बात की घोषणा की है. विद्यालय को एक्सीलेंट का दर्जा मिलने से राज्य भर के 20 मॉडल विद्यालयों में घाटशिला मॉडल स्कूल भी शामिल हो गया है, जहां छात्रावास की व्यवस्था भी हो जाएगी.

कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक विद्यार्थियों की संख्या

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/297-2974774_female-student-vector-hd-png-download.png"

alt="" width="840" height="641" /> कक्षा 6 में 33 छात्र-छात्राएं कक्षा 7 में 21 छात्र-छात्राएं कक्षा 8 में 11 छात्र-छात्राएं कक्षा 9 में 33 छात्र-छात्राएं कक्षा 10वीं में 15 छात्र छात्राएं कक्षा 11वीं में 30 छात्र-छात्राएं कक्षा 12वीं में 26 छात्र-छात्राएं

कोडरमा : इतिहास, अंग्रेजी, रसायन और वाणिज्य के शिक्षक ही नहीं, ऐसा है सीएम प्लस टू मॉडल स्कूल

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/11rc_m_85_11012023_1.jpg"

alt="" width="400" height="225" />
छात्रों को बेहतर शिक्षा देने को लेकर सरकार ने जिलों में मॉडल स्कूल बनाए हैं. लेकिन इन मॉडल स्कूलों में न ही पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही जरुरी संसाधन. डोमचांच में एक मॉडल स्कूल है. इसमें शिक्षकों की कमी है, सीएम प्लस टू हाई स्कूल डोमचांच में कुल 1200 बच्चे पढ़ते हैं. जबकि कक्षा 11 में शून्य और कक्षा 12 में 780 बच्चे हैं. इंटरमीडिएट में कुल 11 शिक्षकों की पोस्टिंग की बात की गई थी. मगर वर्तमान में मात्र तीन शिक्षक ही मौजूद हैं. इस विद्यालय में 9वीं और 10वीं में इतिहास, अंग्रेजी, रसायन शास्त्र व वािणज्य के शिक्षक नहीं हैं. जबकि इंटरमीडिएट में इंगलिश ,रसायन ,वाणिज्य, भौतिकी,भूगोल के शिक्षक नहीं हैं. जबकि सिर्फ हिंदी , इतिहास और अर्थशास्त्र के शिक्षक मौजूद हैं. विद्यालय में प्रयोगशाला शिक्षक नहीं है. विद्यालय मे आवश्यक उपस्कर एवं शिक्षण सामाग्रियों का अभाव है. विद्यालय के प्रचार सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय का भवन तो अपना है. लेकिन विद्यालय में कई सुविधाओं का घोर अभाव है. विद्यालय में पानी की समस्या है. वहीं छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय कम है. जहां तक शिक्षकों की बात करें तो शिक्षकों की कमी है. विद्यालय में छात्रों का अनुपात में उनकी संख्या काफी कम है.

सिमडेगा: जिले में हैं कई मॉडल स्कूल

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/MODEL-1_769.jpg"

alt="" width="576" height="340" /> जिला में कई मॉडल स्कूल हैं. इसी में एक है कोलेबिरा प्रखंड स्थित मॉडल स्कूल. बच्चे नवोदय, नेतरहाट की तर्ज पर परीक्षा पास कर इस मॉडल स्कूल में दाखिला पाते हैं. लेकिन पिछले 10 वर्षों से स्कूल कई समस्याओं से दो-चार हो रहा है. शिक्षा विभाग की उदासीनता साफ देखी जा सकती है.

मॉडल स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव

यहां पर क्लास रूम की व्यवस्था सही नहीं है. क्लास रूम है तो बेंच नहीं हैं. ये ऐसा मॉडल स्कूल है, जहां छात्र जमीन पर दरी बिछाकर पढ़ाई करते हैं. यहां नल भी है, बोरिंग भी है, लेकिन पीने का पानी की व्यवस्था नहीं है. बिजली का तार तो गुजरा है, पर बिजली नहीं है. खिड़कियां टूटी -फूटी हैं.

एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है स्कूल

यह स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है. इसमें दो शिक्षक दूसरे स्कूल से डेप्युटेशन पर आए हुए हैं. यहां सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक पढ़ाई होती है. कक्षा 10 तक की पढ़ाई की यहां व्यवस्था है. शिक्षकों से पढ़ाई का ही नहीं अन्य सरकारी काम भी लिए जाते हैं. ऐसी स्थिति में आप आसानी से समझ सकते हैं कि शिक्षक बच्चे को कितनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाते होंगे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/MODEL-3_331.jpg"

alt="" width="486" height="273" />

अभी तक स्कूल का नया भवन नहीं बन पाया है

स्कूल के शिक्षक ने बताया गया कि स्कूल भवन का निर्माण यहां से 10 किलोमीटर दूरी पर हो रहा है, लेकिन अभी तक ये पूरा नहीं हो पाया है. उम्मीद बंधी है कि नया भवन मिलने से छात्रों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो पाएंगी. छात्रों ने कहा कि सुविधाओं की कमी की वजह से यहां कोई आना पसंद नहीं करता. कोई अपना एडमिशन भी नहीं करवाना चाहता. यहां गरीब तबके के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. वो सवाल उठाते हैं कि हम लोग अपनी परीक्षा की तैयारी ऐसी स्थिति में कैसे करें. जब कोई पढ़ाने वाला ही नहीं है. पदाधिकारियों को इस स्कूल पर भी ध्यान देना चाहिए जिससे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp