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यूपीए सरकार के कार्यकाल की आर्थिक नीतियों पर हमलावर मोदी सरकार श्वेत पत्र लायेगी! बजट सत्र एक दिन आगे बढ़ा

 New Delhi : मोदी सरकार यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल को आर्थिक कुप्रबंधन का कार्यकाल करार देते हुए श्वेत पत्र लाने जा रही है. श्वेत पत्र इसी बजट सत्र में लाया जायेगा. इसके लिए सत्र को एक दिन आगे बढ़ाया गया है. नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">नेशनल

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बजट सत्र अब 10फरवरी तक चलेगा

बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को हुई थी और 9 फरवरी तक समाप्त होना था, लेकिन अब यह 10 फरवरी तक चलेगा. यह जानकारी संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दी. जानकारी के अनुसार मोदी सरकार श्वेत पत्र के जरिए अपने और यूपीए सरकार के दौरान देश की आर्थिक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन पेश करेगी.

श्वेत पत्र  यूपीए दशक और एनडीए दशक की तुलना करेगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अंतरिम बजट भाषण के दौरान कहा था कि सरकार एक श्वेत पत्र पेश करेगी, यह यूपीए दशक और एनडीए दशक की तुलना करेगा.  निर्मला सीतारमण कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के सत्ता से हटने के बाद देश की खराब आर्थिक स्थिति को सामने लाने के लिए दोनों सदनों में श्वेत पत्र प्रस्तुत करेंगी. इस क्रम में वे देश के सामने लायेगी कि मौजूदा सरकार (मोदी) किस तरह से भारत की बदहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले आयी है.

हम अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर वापस लाये हैं

वित्त मंत्री द्वारा एक फरवरी को दिये गये बजट भाषण पर नजर डालें तो उसमें कहा गया था कि उन वर्षों(यूपीए कार्यकाल) का संकट दूर हो गया है, और हम अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर वापस लाये हैं. उन वर्षों के कुप्रबंधन से सबक लेने के उद्देश्य से, अब यह देखना उचित होगा कि हम 2014 तक कहां थे और अब कहां हैं. इसके लिए सरकार सदन के पटल पर श्वेत पत्र रखेगी. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार श्वेत पत्र भारत की आर्थिक पीड़ा और अर्थव्यवस्था पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी देगा.

पीएम ने सबसे पहले अर्थव्यवस्था को बहाल किया

वित्त मंत्री के अनुसार सरकार पहले श्वेत पत्र इसलिए लेकर नहीं आयी क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि लोगों का उस पर और संस्थानों पर से विश्वास कम हो जाये. पीएम ने सबसे पहले अर्थव्यवस्था को बहाल किया.1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने के बाद निर्मला सीतारमण ने कहा था कि श्वेत पत्र इस बात को उजागर करेगा कि देश 2014 में कहां था और अब कहां है.

श्वेत पत्र को कोई वैधानिक महत्व नहीं है

श्वेत पत्र सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक तरह का आधिकारिक बयान (सूचनात्मक दस्तावेज़) है. श्वेत पत्र में किसी बड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाती है. श्वेत पत्र संसद के पटल पर रखा जाता है. हालांकि अक्सर विपक्ष द्वारा सरकार के किसी कार्यक्रम को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की जाती है. विपक्ष यह मांग तब करता है, जब उसे लगे कि सरकार सही जानकारी नहीं दे रही है. माना जाता है कि श्वेत पत्र में सिर्फ सच्चाई बताई जायेगी. वेसे  श्वेत पत्र को कोई वैधानिक महत्व नहीं है. [wpse_comments_template]

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