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मोदी-मेलोनी और मेलोडी!

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श्रीनिवास

 

मेलोनी को मेलोडी (चाकलेट) गिफ्ट करते मोदी. दोनों का प्रसन्नचित खिलखिलाता चेहरा- उनके बीच अंतरंगता दिखाता यह दृश्य कितना मनोहारी और काव्यात्मक लग रहा है! कितनी सुंदर तस्वीर- इसे फोटो ऑफ द ईयर कहा जा सकता है. जंग में फंसी तनावपूर्ण दुनिया के लिए जैसे राहत के दो पल.. मगर भारत सरकार कुछ भी करे, हमेशा असंतुष्ट और क्षुब्ध रहने वाले विपक्षी दलों के कुछ नेता, कुछ ‘अर्बन नक्सल’ टाइप पत्रकारों और (मोदी के) अंधविरोधियों को यह अच्छा नहीं लगा! लगे अनाप शनाप लिखने बोलने. वे जो भी लिख-बोल रहे हैं, बेहद घटिया है. 

 

क्या हुआ कि मोदी जी ने मेलोनी को मेलोडी गिफ्ट कर दी? क्या हुआ यदि मेलोनी उम्र में मोदी जी से बहुत छोटी हैं! मर्द की उम्र कहीं मायने रखती है? अपने देश और परिवार का ही इतिहास जान लीजिए! ऐसी प्रतिक्रिया इनके स्त्री-विरोधी होने का एक और प्रमाण है या कहें कि भारत के जलनखोर मर्दों की यही फितरत है! अरे जलन तो देश की महिलाओं को (मेलोनी से) हो सकती है, जशोदा बेन गुस्सा प्रकट करतीं तो भी बात समझ में भी आती! आपको क्या कष्ट है जनाब! अपने देश में, शायद पूरी दुनिया में, तो  इसे ‘मर्दानगी’ की शान के रूप में देखा जाता है! 

 

जवाहर लाल नेहरू की छवि भी दिलदार की थी, उनके प्रति देश-विदेश की अनेक महिलाओं के आकर्षण और रिश्तों की बात कही-सुनी जाती रही है. कुछ बनावटी और बदनीयती से भी फैलायी जाती रही है! पर पुराने लोग कहते थे कि तब नेहरू को नायक मानने वाले भारतीयों को ऐसी चर्चा से कोई फर्क नहीं पड़ता था, बल्कि वे यह सोच कर खुश होते थे कि हमारे नेता का ऐसा जलवा है. तय है कि मोदी मुरीदों को भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा! वे कहेंगे- आप कुछ भी करें, हम आपके साथ हैं. हमें तो फख्र होना चाहिए कि हमारा नेता इतना जिंदादिल है. इतना स्थितप्रज्ञ है कि युद्ध के कारण आये संकट के समय भी तनाव रहित होकर अपना काम कर रहा है, विदेश यात्रा कर रहा है, लोगों से हंस-बोल रहा है! वैसे इस प्रकरण को इस दृष्टि से भी देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री ने एक पूर्व (दिवंगत) प्रधानमंत्री की ससुराल और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष की ननिहाल की एक लोकप्रिय नेता (प्रधानमंत्री) के प्रति और लगाव/प्रेम का प्रदर्शन किया- यह तो उनकी उदारता का ही परिचायक है. 

 

तंज से इतर, दो वयस्क स्त्री-पुरुष के बीच रिश्ते को इस नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. डॉ लोहिया भी मानते थे कि फरेब, झूठ और बल प्रयोग न हो, तो सारे रिश्ते जायज हैं. हालांकि इससे पूरी तरह सहमत होने में कठिनाई है. फिर भी मोदी-मेलोनी को लेकर जिस तरह की हल्की बातें हो रही हैं, वह ओछी लगती हैं. कुछ चटखारे लेने का भाव दिखता है. हम यह मान क्यों लें कि उनके बीच ‘ऐसा’ कोई रिश्ता है? और है भी तो हमें उससे फर्क क्यों पड़ना चाहिए! किसी भी अन्य स्त्री और पुरुष की तरह उनको भी अधिकार है ऐसे अंतरंग रिश्ते बनाने का. वे इसकी बाकायदा घोषणा कर दें तो अच्छी बात है या न भी करें, उनकी मर्जी. 

 

हां, चूंकि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए सार्वजनिक स्थलों पर, मीडिया के सामने उनके व्यवहार से यदि भारत की छवि खराब होती है, इस रिश्ते से यदि भारत के हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका है, इस बात से जरूर फर्क पड़ता है! क्या मेलोनी को मेलोडी देना-खिलाना, उस पल का फोटो और रील बना कर खुद सोशल मीडिया पर प्रचारित करना विदेश नीति और कूटनीति का हिस्सा था? या कि बस मौज में आ गये! मोदी जी अब भी विवाहित हैं, इसलिए भी उनको कुछ संयम तो बरतना ही चाहिए. मोदी जी में स्त्री के प्रति सम्मान की भावना है, इसका कोई प्रमाण उनके आचरण और बयानों में तो नहीं दिखा है. विपक्ष की महिला नेत्रियों के प्रति उनके ‘सुभाषितों’ की याद दिलाना जरूरी नहीं है. 

 

इसके अलावा इस दृश्य और प्रकरण से भारत जैसे बड़े और समस्याओं से ग्रस्त देश के प्रधानमंत्री की अगंभीरता प्रकट होती है. आपको मणिपुर जाने का समय नहीं मिलता, इसी बीच राज्यों के चुनावों में रैली और रोड शो करते हैं, जिन राज्यों में भाजपा को जीत मिली, वहाँ भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होते हैं! और अचानक युद्ध के कारण आसन्न संकट का हवाला देकर जनता को अनेक तरह की सलाह- यात्रा कम करने, खाद्य तेल का उपयोग कम करने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सोना न खरीदने- देकर खुद लंबी विदेश यात्रा पर निकाल जाते हैं! पर उपदेश कुशल बहुतेरे!   

 

अंत में, एक बात और- इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी भले ही कई बार हल्के अंदाज में दिखती हैं, खास कर मोदी जी के साथ, मगर कई मामलों में वह गंभीर और रीढ़ वाली महिला/नेता भी हैं. उन्होंने इस्राइल की क्रूरता के प्रति सख्त स्टैंड लेकर, नेतन्याहू के कुख्यात अधिकारी (गुर्गा) बेन गरीब- जिसने इजराइल के रवैये के प्रति शांतिपूर्ण विरोध करने जा रहे नावों पर सवार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया था- की कड़े शब्दों में आलोचना कर, उसे अपराधी कह कर दिखा दिया है, कि उन पर ट्रंप का कोई खौफ नहीं है! काश कि हम मोदी जी के बारे में भी ऐसा कह सकते, काश मोदी जी मेलोनी से ही कुछ प्रेरणा ले पाते.

 

मोदी जी विरोध क्या करते, खबर यह है कि उनकी इटली यात्रा के दौरान ही भारत से हथियार बनाने में काम आने वाली स्टील का एक जखीरा जिसे इजराइल भेजा जा रहा था इटली की समुद्री सीमा में जब्त किया गया. संदेह यह भी किया जा रहा है कि इटली की यात्रा का एक उद्देश्य शायद जब्त जहाजों को मुक्त करना भी था! तो क्या मेलोनी से नजदीकी बढ़ाने का यही कारण था?

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