Lagatar Desk: पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने आखिरी संस्मरण में लिखा है कि पीएम नरेंद्र मोदी का पहला कार्यकाल निरंकुश था. उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद उन्हें इसकी जानकारी दी गयी थी. पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी किताब में मोदी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बहुत कुछ लिखा है. उन्होंने सरकार के कई फैसलों को काफी बारीकी से देखा और उसकी आलोचना भी की. प्रणब दा ने अपनी किताब में यह भी लिखा कि पहले कार्यकाल में मोदी सरकार अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभा पाई और संसद के सत्र ठीक से नहीं चले. उन्होंने कहा कि मोदी की कार्यशैली अपने पहले कार्यकाल के दौरान ‘तानाशाही’ जैसी थी. उन्होंने मोदी की अचानक पाक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना बुलाये अनावश्यक रूप से नवाज शरीफ से मिलने जाना दोनों देशों के संबंधों के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता. इसे भी पढ़ें-कोरोना">https://lagatar.in/new-strain-of-corona-virus-havoc-prime-minister-boris-johnson-again-locksdown-in-britain/15432/">कोरोना
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योजना आयोग को भंग करना बड़ी गलती
रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित अपने अंतिम संस्करण ‘द प्रेजिडेंशल ईयर’ में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सरकार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बहुत कुछ लिखा है. उन्होंने यह भी लिखा है कि कि नोटबंदी लागू करने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गयी थी और कदम उठाने के बाद उनसे समर्थन मांगा गया. मुखर्जी ने यह भी कहा कि नोटबंदी के कई उद्देश्य पूरे नहीं हो सके. नोटबंदी की योजना के बारे में उन्हें भी जानकारी नहीं थी. योजना आयोग को खत्म करने के बारे में भी उन्होंने कहा कि इस कदम का विरोध करके वह कोई विवाद नहीं खड़ा करना चाहते थे. उन्होंने कहा कि यह सरकार की एक बहुत बड़ी गलती थी. इसे भी पढ़ें-प्रणब">https://lagatar.in/in-pranab-mukherjees-book-advised-to-pm-modi-should-listen-to-voice-of-opposition-the-presidential-years-hit-the-market/15601/">प्रणबमुखर्जी की किताब में पीएम को सलाह, मोदी को विपक्ष की आवाज सुननी चाहिए, द प्रेसिडेंसियल ईयर्स बाजार में आ गयी
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