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मोहन भागवत ने कहा, अंग्रेजों ने झूठ फैलाया...आर्यों ने द्रविड़ों को खदेड़ा...भारतीय राज नहीं कर सकते...

Nagpur :   अंग्रेजों ने झूठ फैलाया था कि बाहर से आये लोगों को द्रविड़ों ने जंगल में खदेड़ा. फिर आर्य लोग आये, जिन्होंने द्रविड़ों से लड़ाई की और द्रविड़ों को पीछे की ओर खदेड़ दिया. यह अंग्रेजों का फैलाया हुआ झूठ है. आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही.  वह सोमलवार एजुकेशन सोसाइटी के 70वें स्थापना दिवस के मौके पर 21वीं सदी में शिक्षकों की भूमिका पर भाषण दे रहे थे.  श्री भागवत ने कहा कि अंग्रेजों ने सच को छिपाते हुए हमारे दिमाग में कई तरह के झूठ भरे.

राज करना इस देश के लोगों के खून में नहीं है

अंग्रेजों का फैलाया हुआ झूठ यह है कि भारत में जो लोग दिखते हैं, वे बाहर से आये हैं. भागवत  ने कहा. अंग्रेज कहते हैं कि बाहर से लोग यहां(भारत) आये , यहां के लोगों को मारा-पीटा और खुद राजा बन गये. अंग्रेजों के अनुसार  राज करना इस देश के लोगों के खून में नहीं है.

आपस में लड़ाने के बावजूद भारत के लोग एकजुट रहेंगे

भागवत का कहना था कि अंग्रेज ऐसे आये, जैसे धर्मशाला में रहने आये हो. कहा कि इस थ्योरी को पूरी दुनिया में नकार दिया गया है. अब इस पर कोई यकीन नहीं करता है,पर हमारे देश के लोगों के मन से यह बात निकल नहीं रही है.  आरएसएस चीफ ने कहा कि ब्रिटिश शासकों को 1857 में एहसास हुआ कि जातियों, संप्रदायों, भाषाओं, भौगोलिक असमानताओं को लेकर आपस में लड़ाने के बावजूद भारत के लोग तब तक एकजुट रहेंगे, जब तक वे विदेशी आक्रमणकारियों को देश से बाहर नहीं निकाल देते.

 भारतीयों के मन से भारत की गौरवपूर्ण विरासत को भुला देना था उद्देश्य 

इस क्रम में कहा कि ब्रिटिश शासकों ने कुछ ऐसा करने का फैसला लिया, जिससे भारतीयों की एकजुटता टूट जाये. विशेषता खत्म हो जाये और यह सुनिश्चित हो जाये, जिससे ब्रिटिश शासन हमेशा भारत में हमेशा के लिए बना रहे. ब्रिटिश शासकों का यह उद्देश्य भारतीयों के मन से भारत के इतिहास, पूर्वजों और गौरवपूर्ण विरासत को भुला देना था. इसी उद्देश्य को अपनाते हुए अंग्रेजों ने हमारे देश की सच्चाई को बदलकर हमारे दिमाग में कई तरह के झूठ डाल दिये.

अंग्रेजों ने अपनी ताकत और हमारी अज्ञानता के कारण झूठ बोया

अंग्रेजों ने अपनी ताकत और हमारी अज्ञानता के कारण झूठ बोया. इसके बारे में बहुत सारे सबूत हैं.  लेकिन इसे लोगों के दिमाग से निकालने में अभी भी समय लग रहा है.  आरएसएस प्रमुख ने इससे पहले सोमवार को महानुभाव आश्रम शतकपूर्ति समारोह में   विभिन्न संप्रदायों से आग्रह किया  था कि वे अपने अनुयायियों को अपने धर्म के बारे में समझायें, क्योंकि धर्म की गलतफहमी से दुनिया में अत्याचार होते हैं. श्री भागवत ने कहा,  धर्म की गलत व्याख्या के कारण ही दुनिया में अत्याचार हुए हैं. धर्म की सही व्याख्या करने वाला समाज होना जरूरी है.  कहा कि धर्म को समझना होगा, अगर यह  ठीक से  समझा नहीं  गया तो धर्म का आधा ज्ञान हमें  अधर्म की ओर ले जायेगा.

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