- पिछले साल मॉनसून 29 मई को केरल पहुंचा था
6 पैरामीटरों पर यह पूर्वानुमान लगाया जाता है
2018 में 29 मई को, 2019 में 8 जून, 2020 में 1 जून को समय पर, 2021 में 3 जून और 2022 यानी पिछले साल मॉनसून 29 मई को केरल पहुंचा था. IMD पिछले 18 साल से मॉनसून के भारत आगमन पर पूर्वानुमान लगाता आ रहा है. कुल 6 पैरामीटरों पर यह पूर्वानुमान लगाया जाता है. इसमें उत्तर पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान भी शामिल है. पिछले दिनों जब मई के महीने में दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश हुई और लोगों को ठंड का एहसास होने लगा, कुछ लोगों में आशंका पैदा हो गई थी कि इस बार मॉनसून में देरी हो सकती है. हालांकि अभी ज्यादा देरी की संभावना नहीं है.
सामान्य बारिश होने की उम्मीद है
भारत में दक्षिण पश्चिम मानसून का आगे बढ़ना केरल के ऊपर मानसून के आरंभ से चिन्हित होता है और यह एक गर्म और शुष्क मौसम से वर्षा के मौसम में रूपांतरण को निरुपित करने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत है. जैसे जैसे मानसून उत्तर दिशा में आगे की ओर बढ़ता है, इन क्षेत्रों को चिलचिलाती गर्मी के तापमान से राहत मिलने लगती है. आईएमडी ने पिछले महीने कहा था कि भारत में अल नीनो की स्थिति के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान सामान्य बारिश होने की उम्मीद है. वर्षा सिंचित कृषि भारत के कृषि परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें शुद्ध खेती क्षेत्र का 52 प्रतिशत इस पद्धति पर निर्भर है. यह देश के कुल खाद्य उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत है,जो इसे भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाता है.
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