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संथाल में बचे हुए 2000 से अधिक ग्राम प्रधानों को मिलेगी मान्यता, विभाग ने दिया निर्देश

Ranchi : झारखंड सरकार ग्राम प्रधानों में मानकी को प्रति माह 3000 रुपए देती है. वहीं मुंडा ग्राम प्रधान को दो हजार और डाकुवा, परगणैत, पुराणिक व अन्य ग्राम प्रधानों को एक-एक हजार रुपए सम्मान राशि देती है. इस स्थिति में पुराने ग्राम प्रधानों की मौत के बाद खाली पदों पर सक्षम प्राधिकार की ओर से नियुक्ति होती है. लेकिन सक्षम प्राधिकार कौन होगा, इस संबंध में संथालपरगना में लंबे समय से विवाद चल रहा था. लेकिन भू राजस्व विभाग के निर्देश के बाद अब यह विवाद समाप्त होता दिख रहा है. विभाग के निर्देश के बाद संथाल परगना में ग्राम प्रधानों की कुल संख्या 8117 है. जिसमें 2000 से अधिक ग्रामप्रधानों को मान्यता नहीं मिली है. जिससे सरकार की ओर से मिलने वाली सम्मान राशि से वह वंचित है. अब विभाग के निर्देश के बाद 2000 से अधिक परंपरागत ग्राम प्रधानों को मान्यता मिलेगी. इनमें लगभग 6500 से अधिक को सम्मान राशि मिल रही है. जबकि शेष रिक्त पदों पर नियुक्त नहीं होने से वे सम्मान राशि से वंचित हैं. इसे लेकर भू-राजस्व विभाग ने निर्देश जारी किया है. ये निर्देश नियुक्ति के सक्षम प्राधिकार को लेकर है. दुमका डीसी की ओर से मांगे गये स्पष्टीकरण पर भू-राजस्व विभाग ने अपना जवाब दिया है. उसमें कहा गया है कि अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उप समाहर्ता ग्राम प्रधानों के परंपरागत रिक्त स्थानों को भरने के लिए सक्षम प्राधिकार होंगे. इसे भी पढ़ें - ग्रीस">https://lagatar.in/greeces-pentapostagma-website-claims-turkey-engaged-in-sending-mercenaries-in-kashmir/26625/">ग्रीस

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संथाल परगना में परंपरागत ग्राम प्रधानों का 2000 से अधिक पद हैं रिक्त

जानकारी के मुताबिक, सक्षम प्राधिकार को लेकर उठे विवाद के कारण संथाल परगना में परंपरागत ग्राम प्रधानों के लगभग दो हजार के करीब पद रिक्त हैं. इनमें केवल दुमका में ही परंपरागत ग्राम प्रधान के 350 से अधिक पद रिक्त हैं. यह स्थिती गोड्डा, जामताड़ा, देवघर, साहेबगंज, पाकुड़ में भी कमोबेश ऐसा ही है. इस संबंध में भू-राजस्व विभाग से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था. भू-राजस्व विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि संथाल परगना टेनेसी एक्ट 1949 की धारा 62 में डीसी और एसडीओ के कर्तव्य का उल्लेख है. अब जहां तक परंपरागत ग्राम प्रधानों की नियुक्ति का अधिकार देने का प्रश्न है. उस संबंध में तत्कालीन बिहार सरकार के समय 1989 में आदेश निर्गत है. उसमें कहा गया है कि संथाल परगना प्रमंडल के अनुमंडल मुख्यालयों में पोस्टेड सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता अपने अधिकारिता क्षेत्र में शेष सभी धाराओं के अधीन डीसी की शक्तियों और कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सशक्त हैं. इसलिए अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उप समाहर्ता ग्राम प्रधान के परंपरागत रिक्त स्थानों को भरने के लिए सक्षम प्राधिकार हैं. इसे भी पढ़ें -लाइट">https://lagatar.in/several-organizations-united-against-the-light-house-project-said-playground-will-not-be-finished/26602/">लाइट

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