मां तुमि आबार घुरे एशो ... Ranchi: दुर्गोत्सव के 10 दिनों तक उत्साह और उल्लास में रमे रहने के बाद आखिरकार विदाई की बेला आ ही गयी. शनिवार को बांग्ला मंडपों में विविध अनुष्ठान हुए. महिलाओं ने सिंदूर खेला. साथ ही भक्तों ने मां तुमि आबार घुरे एशो ... की कामना से मां दुर्गा को विदाई दी. श्रीश्री हरिसभा दुर्गा पूजा समिति, दुर्गा बाड़ी में दिन के नौ बजे पूजा शुरू हुई. मां को पुष्पांजलि अर्पित करने को भक्ति डोर से बंध बड़ी संख्या में श्रद्धालु खींचे चले आए. दिन के दस बजे तो भारी भीड़ एकत्रित हो गयी. सवा दस बजे पुष्पांजलि अर्पित की गयी. भक्तों के श्रीचरणों में पुष्प अर्पित कर मंगल कामनाएं की. दिन के 11:35 बजे मंत्रागिक विसर्जन आदि अनुष्ठान हुए. पुरोहितों संग श्रद्धालु लाइन टैंक तालाब में कलश विसर्जन किया. फिर सिंदूर दान के साथ सिंदूर खेला का खूबसूरत नजारा देखने को मिला. महिलाओ ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया. भक्ति में जमककर नाची-झूमी. राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी इसमें बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभायी. मान्यता है कि नौ दिनों तक आराधना के बाद जब विजयादशमी के मौके पर मां विदा होती हैं तो अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद सिंदूर रूप में प्रदान करती है. इसी भाव से महिलाएं सिंदूर खेला कर पति की दीर्घायु की कामना मां से करती हैं. अगले बरस फिर आने का निवेदन करती हैं. बंग समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को शुभो विजयादशमी कह कर एक-दूसरे को बधाई दी. दिन के ढाई बजे मां की प्रतिमा को वेदी से उतारा गया. आम श्रद्धालुओं ने मां का खोइंछा भर कर सिंदूर खेला. शाम चार बजे मां की प्रतिमा को श्रद्धालु कांधे उठा कर शोभायात्रा के रूप में ढोल-ढांकी आदि के साथ निकले. मेन रोड का भ्रमण कर लाइन टैंक तालाब पहुंचे. यहां पुन: नेम-निष्ठा से पूजन-आरती की गयी. शाम सवा पांच बजे प्रतिमा का विसर्जन हुआ. अन्य बांग्ला मंडपों में विराजमान मां की प्रतिमा का भी विसर्जन विभिन्न जलाशयों में किया गया.
दुर्गोत्सव में इन्होंने दिया योगदान
अध्यक्ष ज्योर्तिमय चौधरी, सचिव गोपाल भटाचार्य, सह सचिव सेतांक सेन, श्यामल राय, संदीप चौधरी, प्रदीप राय बाबू भाई, जयंत कर, देवनाथ गांगुली, दिपेंद्र नारायण घोष, अमित राय, मृणाल घोष, संजय राय सहित समिति के तमाम पदाधिकारी और सदस्यो ने इसके सफल आयोजन में बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभायी.
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