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बेटी की डोली से पहले उठ गई मां की अर्थी, मातम में बदली विवाह की खुशियां

Barhi : कुदरत का खेल बड़ा ही निराला है. कैसे और कब खुशियां गम में बदल जाए, यह कहना मुश्किल है. ऐसा ही वाक्या बरही प्रखंड की बसरिया उर्फ पंचमाधव पंचायत के धुरगड़गी निवासी कैलाश रविदास के घर हुई. कैलाश रविदास अपनी पुत्री का विवाह करने के लिए परिजनों के साथ गाजे-बाजे लेकर सूर्य मंदिर बरही पहुंचे थे. विवाह का रस्म शुरू ही हुआ था कि दुल्हन की मां की पेट में अचानक दर्द होने लगा. तबीयत बिगड़ता देख महिला को अनुमंडल अस्पताल लाया गया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद हजारीबाग रेफर कर दिया गया. परंतु नियती को कुछ और मंजूर था. अस्पताल जाने के क्रम में रास्ते में ही दुल्हन की मां की मौत हो गई. यह जानकारी मिलते ही विवाह मंडप में खलबली मच गई और खुशियां मातम में बदल गई. विवाह गीत के स्थान पर चीत्कार और क्रंदन से पूरा क्षेत्र दहल उठा. सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से किसी प्रकार सिंदूर दान का रस्म अदा किया गया. परिजनों को ढांढ़स देते हुए किसी प्रकार घर भेजा गया. कार्य में भीम आर्मी के प्रखंड अध्यक्ष लक्ष्मण राव अंबेदकर, अनिल रविदास आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-mentally-ill-youth-slits-his-throat-admitted-to-mgm/">जमशेदपुर

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