पूजन-अनुष्ठान के कार्यक्रम
महाषष्ठी 08 अक्तूबर को शाम 07:00 बजे बेलवरन पूजा, महासप्तमी पूजा 09 अक्तूबर दिन के 10:00 बजे. मां भगवती चिंतामणि को ऐतिहासिक ठाकुर निवास बरकागढ़ से प्राचीन देवी घर जगन्नाथपुर चौक के लिए प्रस्थान. महाअष्टमी 10 अक्तूबर को दिन के 10:00 बजे हवन-पूजन, महानवमी पूजा दिन के 11:00 बजे. 11 अक्तूबर को संधि पूजा सुबह 06:52 बजे और महानवमी पूजा दिन के 11:00 बजे. रात्रि में निशा पूजा 08:00 बजे से. महादशमी पूजन दिन के 09:00 बजे से. इसके बाद हवन विसर्जन, मां भगवती चिंतामणि को वापस प्राचीन देवी घर से ठाकुर निवास लाया जाएगा.बलि के कारण दूसरी ओर बनाया गया देवी घर
ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के उत्तराधिकारी ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव( पिता स्व. ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ठाकुर बडकागढ एस्टेट) बताते हैं कि ऐतिहासिक ठाकुर निवास जगन्नाथपुर (जगन्नाथ महाप्रभु का क्षेत्र) में पुरुषोत्तम क्षेत्र होने के कारण बलि नहीं हो सकती हैं. इस कारण आनी मौजा में ऐतिहासिक प्राचीन देवी घर में मां भगवती की पूजा प्रारंभ की गयी, जहां मां की पूजा में बलि दी जाती हैं, इस कारण देवी घर का निर्माण 1880 में अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की धर्मपत्नी ठकुरानी बानेश्वरी कुंवर ने प्राचीन देवी घर की स्थापना की.अंग्रेजों ने तोप से उड़ा दिया था घर
ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने बताया कि जब अंग्रेजों ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के घर (चिरनागढ़ हटिया) को तोप से उड़ा दिया था, तब ठाकुर विश्वनाथ जी की धर्मपत्नी ठाकुरानी बानेश्वरी कुंवर ने अपने एक मात्र पुत्र ठाकुर कपिल नाथ शाहदेव (1 वर्ष आयु) को लेकर खोरा जंगल में छिप गयी थीं. उस समय अपने साथ मां की प्रतिमा और पांच नगाड़े भी लेकर गए थे. 1874 ई में ठाकुरानी अंग्रेजों के समक्ष आई और अपना रियासत वापस करने की मांग की. ठाकुर कपिल नाथ शाहदेव 12 साल के हो गए थे, अंग्रेजों ने रियासत वापस नहीं की, लेकिन ठाकुरानी और उनके पुत्र के रहने के लिए जगन्नाथपुर में एक खपरैल का मकान, मंदिर के पास बना दिया. तब से यह भगवती मां चिंतामणि की पूजा पूरे साल ऐतिहासिक ठाकुर निवास पर ही होती हैं और शरद, चैत्र नवरात्र में मां भगवती चिंतामणि की पूजा प्राचीन देवी घर में किया जाता हैं. इसे भी पढ़ें - हिंदू">https://lagatar.in/hindu-society-will-remain-safe-only-when-it-unites-by-removing-caste-language-and-regional-disputes-mohan-bhagwat/">हिंदूसमाज जाति, भाषा, क्षेत्रीय विवाद दूर कर एकजुट होगा, तभी सुरक्षित रहेगा : मोहन भागवत [wpse_comments_template]
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