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रांची: बड़कागढ़ में पत्तों से बनी मां की प्रतिमा का होगा दर्शन

-डोली पर मंदिर जाएंगी मां दुर्गा भवानी, वर्ष 1880 से निभायी जा रही है परंपरा Ranchi: बड़कागढ़, जगन्नाथपुर में दर्शनार्थी इस बार भी पत्तों से बनी मां की प्रतिमा का दर्शन करेंगे. यहां पत्तों से निर्मित प्रतिमा की पूजा की जाती है. प्रतिमा गढ़ने में मानपत्र, बेलपत्र, अशोक, अनार, बरगद और पाकड़ के पत्तों का प्रयोग होता है. अशोक के पत्ते से मां की जीभ बनती है. शहीद विश्वनाथ शाहदेव राजघराने की ओर से वर्ष 1880 से इस परंपरा का निर्वह्न निर्बाध रूप से किया जा रहा है. इस बार भी चकाचौंध से हटकर सादगी पूर्व दुर्गाेत्सव मनाया जा रहा है. सभी जाति और धर्म के लोग बढ़-चढ़ कर पूजा में हिस्सा लेते हैं. इससे गंगा-यमुनी संस्कृति जीवंत हो उठती है. परंपरानुसार अन्य देवी-देवताओं के साथ चिंतामणि की भी पूजा होती है. मां चिंतामणि शाहदेव परिवार की इष्ट देवी भी है. नवरात्र षष्ठी तिथि मंगलवार को बेलवरण के साथ ही देवी घर में पूजन-अनुष्ठान शुरू हो जायेगा, लेकिन सप्तमी को मां चिंतामणि और पत्रिका से बनी मां भवानी की प्रतिमा को डोली में विराजमान कर शोभायात्रा के रूप में श्रद्धालु मंदिर में स्थापित करेंगे. इसके बाद विजयदशमी तक यहां विधि-विधान से पूजा पूजन-अनुष्ठान चलेगा. इसमें ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव मुख्य यजमान के रूप में हिस्सा लेंगे. राज पुरोहित सदन गोपाल शर्मा पूजन-अनुष्ठान संपन्न कराएंगे. विजयदशमी को पत्तों से बनी प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा.

पूजन-अनुष्ठान के कार्यक्रम

महाषष्ठी 08 अक्तूबर को शाम 07:00 बजे बेलवरन पूजा, महासप्तमी पूजा 09 अक्तूबर दिन के 10:00 बजे. मां भगवती चिंतामणि को ऐतिहासिक ठाकुर निवास बरकागढ़ से प्राचीन देवी घर जगन्नाथपुर चौक के लिए प्रस्थान. महाअष्टमी 10 अक्तूबर को दिन के 10:00 बजे हवन-पूजन, महानवमी पूजा दिन के 11:00 बजे. 11 अक्तूबर को संधि पूजा सुबह 06:52 बजे और महानवमी पूजा दिन के 11:00 बजे. रात्रि में निशा पूजा 08:00 बजे से. महादशमी पूजन दिन के 09:00 बजे से. इसके बाद हवन विसर्जन, मां भगवती चिंतामणि को वापस प्राचीन देवी घर से ठाकुर निवास लाया जाएगा.

बलि के कारण दूसरी ओर बनाया गया देवी घर

ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के उत्तराधिकारी ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव( पिता स्व. ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ठाकुर बडकागढ एस्टेट) बताते हैं कि ऐतिहासिक ठाकुर निवास जगन्नाथपुर (जगन्नाथ महाप्रभु का क्षेत्र) में पुरुषोत्तम क्षेत्र होने के कारण बलि नहीं हो सकती हैं. इस कारण आनी मौजा में ऐतिहासिक प्राचीन देवी घर में मां भगवती की पूजा प्रारंभ की गयी, जहां मां की पूजा में बलि दी जाती हैं, इस कारण देवी घर का निर्माण 1880 में अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की धर्मपत्नी ठकुरानी बानेश्वरी कुंवर ने प्राचीन देवी घर की स्थापना की.

अंग्रेजों ने तोप से उड़ा दिया था घर

ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने बताया कि जब अंग्रेजों ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के घर (चिरनागढ़ हटिया) को तोप से उड़ा दिया था, तब ठाकुर विश्वनाथ जी की धर्मपत्नी ठाकुरानी बानेश्वरी कुंवर ने अपने एक मात्र पुत्र ठाकुर कपिल नाथ शाहदेव (1 वर्ष आयु) को लेकर खोरा जंगल में छिप गयी थीं. उस समय अपने साथ मां की प्रतिमा और पांच नगाड़े भी लेकर गए थे. 1874 ई में ठाकुरानी अंग्रेजों के समक्ष आई और अपना रियासत वापस करने की मांग की. ठाकुर कपिल नाथ शाहदेव 12 साल के हो गए थे, अंग्रेजों ने रियासत वापस नहीं की, लेकिन ठाकुरानी और उनके पुत्र के रहने के लिए जगन्नाथपुर में एक खपरैल का मकान, मंदिर के पास बना दिया. तब से यह भगवती मां चिंतामणि की पूजा पूरे साल ऐतिहासिक ठाकुर निवास पर ही होती हैं और शरद, चैत्र नवरात्र में मां भगवती चिंतामणि की पूजा प्राचीन देवी घर में किया जाता हैं. इसे भी पढ़ें - हिंदू">https://lagatar.in/hindu-society-will-remain-safe-only-when-it-unites-by-removing-caste-language-and-regional-disputes-mohan-bhagwat/">हिंदू

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