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सांसद महेश पोद्दार व संजय सेठ ने एक ही गांव को लिया गोद, काम के नाम पर सिर्फ सड़क बनी

Praveen Kumar Ranchi : 10 साल पहले जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए थे, तब उन्होंने सांसदों से कहा था कि वह एक गांव को गोद लें. उस गांव पर विशेष ध्यान दें. गांव को आदर्श गांव बनाएं. रांची के सांसद संजय सेठ ने प्रधानमंत्री की इस महत्वकांक्षी योजना के प्रति गंभीरता नहीं दिखायी. उन्होंने उसी गांव को गोद लिया, जिसे तत्कालीन राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने गोद लिया था. संजय सेठ द्वारा गांव को गोद लेने का बोर्ड गांव में लगा हुआ है. जबकि महेश पोद्दार के प्रतिनिधि राकेश चौधरी ने इस बात की पुष्टि की है कि सिमलिया गांव को उन्होंने गोद लिया था. गांव के लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि संजय सेठ ने उसी गांव को क्यों गोद लिया, जिस गांव को पहले से ही गोद लिया जा चुका है. गांव के लोग इसे जनता को बेवकूफ बनाने वाले कदम के तौर पर देखते हैं.

शहर से आठ किमी दूर है सिमलिया 

सिमलिया गांव रातू प्रखंड में पड़ता है. रांची जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी की दूरी पर स्थित है. सिमलिया राजस्व गांव में सात टोला है. जिनके नाम कटहल टोली, सिमलिया पुरना टोली, गुटू टोली, जमड़िया, चलाटोली, बगलता और नयाटोली है. गांव के अधिकांश लोगों का मुख्य पेशा खेती-बाड़ी और मजदूरी है.

काम के नाम पर सिर्फ सड़क बनी

जिस सिमलिया गांव को भाजपा के दो-दो सांसदों ने गोद लिया, वह गांव नाम का आदर्श गांव है. गांव में काम के नाम पर सिर्फ सड़क बनी है. सड़क को बनाने में 12 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है. इसके साथ ही गांव के मसना-सरना स्थल की घेराबंदी का काम किया गया है. गांव में जो समस्या पहले से थी, आज भी वैसी ही है. आदर्श गांव के नाम पर लोग खुद को ठगा महसूस करते हैं.

क्या-क्या काम नहीं हुए

  • - स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजित करने को लेकर सांसद ने कुछ नहीं किया.
  • - गांव में स्वास्थ्य उप केंद्र गुटूटोली में है. यह वर्षों से बंद है. सांसद इसे चालू नहीं करा पाए.
  • - गांव के अधिकांश हिस्सों में बिजली का पोल नहीं लगा है. 500 मीटर की दूरी से लोग बांस के सहारे बिजली के तार घरों तक ले गए हैं.
  • - आचार संहिता के लगने के ठीक पहले सांसद संजय सेठ ने जतरा मैदान में मंडप का शिलान्यास किया है.
  • - पंचायत में उच्च विद्यालय नहीं है. ना ही बनाने की कोशिश हुई.
  • - गांव के अधिकांश टोला में स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है.
  • - गांव के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. हर घर नल-जल योजना गांव तक नहीं पहुंची है.

क्या-क्या करना था सांसद को

  • - सांसद आदर्श ग्राम योजना का लक्ष्य गोद लिए गांव का विकास करना था.
  • - एसजीवीवाई के माध्यम से कमजोर और गरीब लोगों को अच्छा जीवन जीने में सक्षम बनाना था.
  • - लोगों को अच्छे जीवन के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय की गारंटी भी देनी थी.
  • - इस योजना के तहत लोगों की मदद, स्वावलंबन और आत्मनिर्भर बनाना था.
  • - ग्रामीण समुदाय में शांति और एकता को बढ़ावा देना था.
  • - गांव के लोगों को आजीविका के बेहतर अवसर मिले, इसके लिए योजनाएं गांव तक पहुंचानी थी.
सिमलिया की मुखिया फुलमनी देवी कहती हैं कि तत्कालीन राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने गांव को गोद लिया था. लेकिन गांव में प्रवेश करने वाली सभी सड़कों पर संजय सेठ का बोर्ड लगा हुआ है. कुछ बोर्ड टूट गये हैं. कौन सांसद गांव को गोद लिया है, इससे ज्याद महत्व गांव की समस्याओं को कौन दूर करता है यह है. गांव में स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है. पानी की समस्या, सड़क, रोजगार जैसी प्रमुख समस्या जो पहले थी वो आज भी है. [caption id="attachment_884318" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/05/9-7.jpg"

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