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मुकुल कानिटकर का व्याख्यान, स्वदेशी शिक्षा के मॉडल पर दिया जोर

Rajnish Prasad Ranchi : डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर प्रख्यात शिक्षाविद, विचारक और प्रेरक मुकुल कानिटकर के व्याख्यान का आयोजन किया. मुकुल कानिटकर, जिनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है, ने व्याख्यान देते हुए स्वदेशी शिक्षा के मॉडल पर जोर दिया. उन्होंने उसी के अनुरूप नई शिक्षा नीति का वर्णन किया. इसे गांधीवादी सोच और अनुसंधान संचालित नीति कहा. कहा कि भारतीय शिक्षा का मूल इतिहास लोक परंपराओं और भाषाओं में निहित है. जो नई शिक्षा नीति प्रस्तुत करती है. अंत में सभागार में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा में तीन महत्वपूर्ण चीजें हैं, अर्थात अध्ययन केंद्रित, शिक्षण केंद्रित और आनंददायक शिक्षा. इन तीनों के मेल से ही विद्यार्थी शिक्षा के लिए प्रेरित हो सकते हैं. कार्यक्रम का संचालन जिंदर सिंह मुंडा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डीएसडब्ल्यू डॉ अनिल कुमार ने किया. इस अवसर पर कुलसचिव डॉ नमिता सिंह सहित समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे.

 कुलपति ने दिया स्वागत भाषण

कुलपति प्रो डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने अपने स्वागत भाषण में मुकुल कानिटकर की बात की और कहा कि उन्होंने न केवल स्वदेशी शिक्षा के मॉडल पर काम किया, बल्कि उन्होंने आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में व्यक्तित्व विकास और अनुसंधान से संबंधित कार्यशालाओं का भी संचालन किया है. इतना ही नहीं, वर्तमान में केंद्र सरकार के फिट इंडिया अभियान के तहत उनके द्वारा ग्वालियर में लगभग 30,000 स्कूली बच्चों को सूर्य नमस्कार का प्रशिक्षण दिया गया. उनके इस कार्य का जिक्र गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी है. इसे भी पढ़ें – वोट">https://lagatar.in/500-fine-for-not-voting-two-days-in-jail-or-ration-card-confiscated/">वोट

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