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मुनीडीह कोलवाशरी हादसा, 4 मजदूरों की मौत के बाद मुआवजा और नौकरी पर बनी सहमति, सुरक्षा पर उठे सवाल

कोयलांचल में हुए दर्दनाक मुनीडीह कोलवाशरी हादसे के बाद आखिरकार मुआवजा और नौकरी को लेकर सहमति बन गई है.बीसीसीएल की मुनीडीह कोलवाशरी में शनिवार शाम स्लरी लोडिंग के दौरान हुए हादसे में 4 मजदूरों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और प्रबंधन के बीच देर रात तक चली वार्ता के बाद समाधान निकला.
 

 Dhanbad :  कोयलांचल में हुए दर्दनाक मुनीडीह कोलवाशरी हादसे के बाद आखिरकार मुआवजा और नौकरी को लेकर सहमति बन गई है.

 

बीसीसीएल की मुनीडीह कोलवाशरी में शनिवार शाम स्लरी लोडिंग के दौरान हुए हादसे में 4 मजदूरों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और प्रबंधन के बीच देर रात तक चली वार्ता के बाद समाधान निकला.

 

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यह हादसा मुनीडीह ओपी क्षेत्र स्थित कोलवाशरी के स्लरी डंपिंग स्थल पर हुआ जहां करीब 40 फीट ऊंचे स्लरी डंप के नीचे मजदूरों को ट्रक लोडिंग के लिए भेजा गया था.

 

इसी दौरान अचानक भारी मात्रा में स्लरी भरभराकर गिर गई जिससे 6 मजदूर उसकी चपेट में आ गए.इस हादसे में माणिक बाउरी, दिनेश बाउरी, दीपक बाउरी और हेमलाल गोप की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

 

घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने कोलवाशरी गेट के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात बीसीसीएल प्रबंधन, पुलिस, यूनियन प्रतिनिधियों और परिजनों के बीच लंबी वार्ता हुई.

 

वार्ता में मृतकों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा, आउटसोर्सिंग कंपनी में नौकरी, बच्चों को डीएवी स्कूल में नामांकन और अंतिम संस्कार के लिए 75-75 हजार रुपये देने पर सहमति बनी.

 

यही नहीं हादसे को लेकर कई गंभीर आरोप भी सामने आए हैं. सूत्रों के अनुसार मजदूरों पर बेहतर गुणवत्ता की स्लरी लोडिंग का दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी.

 

आरोप है कि इसी दबाव में मजदूर असुरक्षित स्थान पर काम करने को विवश हुए जिससे यह हादसा हुआ. सुरक्षा में लापरवाही के आरोपों के बीच कोलवाशरी के जीएम अरिंदम मुस्ताफी, एजेंट, प्रोजेक्ट ऑफिसर राजेंद्र पासवान और सेफ्टी अधिकारी विद्यासागर बर्णवाल जांच के घेरे में आ गए हैं.

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि हादसे की सूचना बीसीसीएल मुख्यालय को करीब दो घंटे बाद दी गई जिससे राहत और बचाव कार्य में देरी हुई. इस पर भी सवाल उठ रहे हैं.बताया जा रहा है कि कोल इंडिया लिमिटेड चेयरमैन ने इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं.

 

वार्ता में शामिल गोपनाडीह पंचायत के पूर्व मुखिया छोटू कुमार दास ने कहा कि यह घटना स्पष्ट रूप से सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन ने मुआवजा और नौकरी पर सहमति दी है लेकिन साथ ही निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी की गई है.

 

फिलहाल इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर कोयला खदानों और वाशरी क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है.


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