Musabani (Sanat Kumar Pani) : मुसाबनी प्रखंड के
लाटिया चौक पर
बागजाता माइंस
सड़क विस्थापित कमेटी द्वारा असहयोग आंदोलन चौथे दिन भी जारी
है. यूसिल प्रबंधन द्वारा विस्थापित कमेटी के सदस्यों पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए मुसाबनी थाना में शिकायत किया गया
है. इससे आंदोलनकारी आक्रोशित
हैं. पूर्व जिला पार्षद सह
रैयतदार बुद्धेश्वर मुर्मू ने बताया कि यूसिल प्रबंधन को तानाशाही रवैया
छोड़ मुद्दे पर बात कर समाधान निकलना
चाहिए. उन्होंने यूसिल प्रबंधन द्वारा मुसाबनी थाना में आंदोलनकारियों पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और कंपनी को क्षति पहुंचने के आरोप को गलत
बताया. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-the-work-of-installing-girders-for-the-construction-of-overbridge-over-the-railway-track-has-started/">चांडिल
: रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज निर्माण के लिए गार्डर लगाने का काम शुरू कर्मचारियों का स्थानांतरण कर कंपनी तानाशाही रवैया कर रही है उजागर
8 मई से
बागजाता माइंस में "नो वर्क नो पे" का नोटिस लगा दिया गया है. जबकि 9 मई से असहयोग आंदोलन शुरू किया गया है. आंदोलनकारियों ने कहा कि जब 8 मई से माइंस बंद है तो 9 मई को काम कहां से चला और आंदोलनकारी कैसे काम में बाधा पहुंचाए. आंदोलनकारियों ने ये भी कहा कि जहां तक प्रत्येक दिन लाखों का कंपनी को हानि बताया जा रहा है, उनके द्वारा कभी भी रास्ता बंद नहीं किया गया है. माइंस को भी बंद नहीं किया गया है. कंपनी अपने रणनीति के तहत बागजाता माइंस के कर्मचारियों को जादूगोड़ा माइंस में स्थानांतरण कर अपना तानाशाही रवैया उजागर कर रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-devotional-raghe-radhe-program-on-the-birthday-of-cinematographer-madhuri-dixit-on-may-14/">जमशेदपुर
: सिनेतारिका माधुरी दीक्षित के जन्मदिन पर भक्तिमय राघे-राधे कार्यक्रम 14 मई को रैयतदारों को मुकदमा में फंसाने पर तुले हुए हैं प्रबंधक
उन्होंने प्रबंधकों को चेताते हुए कहा कि मुआवजा की राशि देने के बदले प्रबंधक रैयतदारों को मुकद्दमा में फंसाने पर तुले हुए हैं. उन्होंने फिर दोहराया की कंपनी को जमीन लेना है तो सरकार की प्रक्रिया के तहत रैयतदार जमीन देने के लिए तैयार हैं. इस अवसर पर आंदोलन के चौथे दिन पूर्व जिला पार्षद बुद्धेश्वर मुर्मू, मंगल माहली, राकेश मुर्मू, दीपक मंडल, रमेश माहली, सुरज प्रसाद साहू, मदन टुडू, बारियाड़ टुडू, कुनाराम टुडू आदि उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
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