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मस्क ने लिखा- अंबानी भारत के असली बॉस, राहुल का समर्थन और ट्रंप की IT कंपनियों पर सख्ती

मस्क ने यह टिप्पणी भारत में स्टारलिंक के सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर लिखा. 8 अक्टूबर को मस्क ने और तीखा हमला किया. मस्क ने लिखा- स्टारलिंक 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त है और पांच साल से भारत सरकार के हर कानून व शर्त का पालन कर रहा है, फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं मिला? इसके साथ ही मस्क ने सीधा सवाल किया- “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
 
  • - दो दिन में भारत के 3 मोर्चे.

Lagatar Desk

दो ही दिन (7 व 8 अक्टूबर) भारत की आईटी क्षेत्र से जुड़े तीन अलग-अलग घटनाक्रमों ने सरकार की दिक्कतें बढ़ा दीं हैं. एक तरफ एलन मस्क ने स्टारलिंक की भारत में लांचिंग में देरी की वजह का आरोप घरेलू कारोबारी हितों पर लगाया और मुकेश अंबानी का नाम लेकर सवाल उठाया, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मस्क का समर्थन करते हुए और तीसरे कारोबारी अडानी की ओर इशारा किया. इसी आठ अक्टूबर की देर शाम ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आईटी कंपनियों समेत कई फर्मों को ग्रीन कार्ड कार्यक्रम को सस्पेंड कर दिया. हालांकि भारत सरकार ने मस्क के आरोपों को निराधार बताया है.

 

जानकारी के मुताबिक़ 7 अक्टूबर को मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया कि “दुर्भाग्य से हमें कुछ ओलिगार्क्स द्वारा रोका जा रहा है, ताकि वे भारतीय लोगों पर अपना एकाधिकार बनाए रख सकें. आप अनुमान लगा सकते हैं कि वे कौन हैं… यह भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है.” 

 

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मस्क के द्विट पर राहुल गांधी ने किया ट्विट.

मस्क ने यह टिप्पणी भारत में स्टारलिंक के सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर लिखा. 8 अक्टूबर को मस्क ने और तीखा हमला किया. मस्क ने लिखा- स्टारलिंक 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त है और पांच साल से भारत सरकार के हर कानून व शर्त का पालन कर रहा है, फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं मिला? इसके साथ ही मस्क ने सीधा सवाल किया- “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”

 

इसके बाद भारत सरकार की संचार मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को बयान जारी कर इन आरोपों को “निराधार और गलत धारणा” बताया. मंत्रालय ने बिना मस्क का नाम लिए कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण ढांचा लागू है. तीन जीएमपीसीएस लाइसेंसधारक- स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और वनवेब इंडिया कम्युनिकेशंस, सभी एक ही नियामकीय चरण पर हैं. तीनों के लिए सुरक्षा आकलन चल रहा है. आकलन पूरा होने के बाद ही स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी. सरकार का कहना है कि सुरक्षा शर्तों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

 

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मस्क के ट्विट के दूसरे ही दिन अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय आईटी कंपनियों के खिलाफ सख्ती की.

8 अक्टूबर को ही दिन में राहुल गांधी ने मस्क के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- “वेलकम टू इंडिया, एलन. वेट टिल यू डिस्कवर द अदर गाय.”  यह टिप्पणी गौतम अदाणी की ओर संकेत मानी जा रही है, हालांकि राहुल गांधी ने कोई नाम नहीं लिया. मस्क ने करीब एक घंटे के भीतर जवाब देते हुए लिखा- “थैंक यू, राहुल, दिस इज इन्डीड ट्रबलिंग.” संदेशों के इस आदान-प्रदान ने भारत में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. राहुल गांधी व एलन मस्क पर मीम व चुटकुले सोशल मीडिया पर वायरल हैं.

 

इन सबके बीच वाशिंगटन में 8 अक्टूबर को ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने घोषणा किया कि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से कई कंपनियों को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किया जा रहा है. इनमें भारत की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस, टाटा (टीसीएस), विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं. 

 

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मस्क के आरोपों पर भारत सरकार ने पक्ष जारी कर कहा कि वो गलत कह रहे हैं.

 

माइक्रोसॉफ्ट और एडोब पर भी यही कार्रवाई हुई है. अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन फर्मों ने वीजा प्रणाली का दुरुपयोग किया है और अमेरिकी श्रमिकों के अवसर छीने हैं. सोंडरलिंक ने कहा कि 2009 से इन कंपनियों ने लाखों विदेशी श्रमिकों के लिए स्थायी निवास की मांग की है. यह कदम ट्रंप प्रशासन की रोजगार-आधारित आप्रवासन पर सख्ती का हिस्सा है और भारतीय आईटी पेशेवरों को सीधे प्रभावित करेगा, क्योंकि एच-1बी मंजूरियों में उनका हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक है.

 

उल्लेखनीय है कि स्टारलिंक को जून 2025 में दूरसंचार विभाग से जीएमपीसीएस लाइसेंस और जुलाई में इन-स्पेस से अनुमति मिल चुकी है, लेकिन व्यावसायिक संचालन के लिए सुरक्षा मंजूरी बाकी है. जियो और एयरटेल समर्थित वनवेब भी इसी चरण में हैं. 

 

मस्क का आरोप है कि देरी जानबूझकर की जा रही है, जबकि सरकार इसे समान्य प्रक्रिया बता रही है. राहुल गांधी का बयान विपक्ष के “क्रोनी कैपिटलिज्म” वाले पुराने आरोप से जुड़ता दिखता है, जबकि ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई अलग मुद्दा है, लेकिन समय का संयोग भारत-अमेरिका कारोबारी संबंधों पर सवाल खड़े करता है. 

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