NewDelhi/Patna : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को वक्फ संशोधन बिल को लेकर धमकाया है. मौलाना उमरैन महफूज ने कहा कि मुस्लिम वोटों की ताकत से दोनों नेता सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं. अगर हमारा साथ नहीं दिया तो हम वो हैं जो जायेंगे तो आपको भी साथ लेकर जायेंगे. हमें हल्के में लेने की भूल बिलकुल ना करें.
आपका किरदार वक्फ बोर्ड सुधार बिल पर क्या होना चाहिए, बताना होगा
मौलाना उमरैन महफूज ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की ओर इशारा करते हुए कहा, आप बतायें कि आपका किरदार वक्फ बोर्ड सुधार बिल पर क्या होना चाहिए. आपको मिल्लते इस्लामिया को बताना होगा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव ने दोनों मुख्यमंत्रियों को चेताया कि अगर मुस्लिम वोटों के सहारे सत्ता में आने के बाद भी आपने वक्फ संशोधन बिल का विरोध नहीं किया तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. कहा कि अगर सरकार मुस्लिमों के मुद्दों पर गंभीर नहीं है तो इसका अंजाम भुगतने को तैयार रहें. तो पाकिस्तान लाहौर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लखनऊ तक फैला होता
बता दें कि सोमवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ आयोजित कॉन्फ्रेंस में मौलाना उमरैन महफूज बोल रहे थे. इसी कॉन्फ्रेंस में पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि अगर उस वक्त सभी मुसलमान जिन्ना के साथ चले जाते तो पाकिस्तान लाहौर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लखनऊ तक फैला होता. मोहम्मद अदीब ने वक्फ संशोधन बिल को मुसलमानों पर सबसे बड़ा हमला करार दिया. तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस(तहफ्फुजे औकाफ कांफ्रेंस) का आयोजन युवा सेवा समिति नाम के संगठन ने किया था. देश भर में मुस्लिम संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं
झारखंड और महाराष्ट्र में चुनाव के बीच मुस्लिम संगठन के इस तरह के बयान राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा रहे हैं. जान लें कि मुस्लिम संगठन वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ मुखर हो गये हैं. वे सत्ताधारी दलों को अपनी आंखें दिखा रहे हैं. वक्फ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम संगठनों का गुस्सा सड़कों पर भी नजर आ रहा है. वक्फ संशोधन बिल को लेकर देश भर में मुस्लिम संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है. हमने गांधी-नेहरू को माना था, लियाकत अली को नहीं
मोहम्मद अदीब ने कहा कि जो लोग पाकिस्तान चले गये. उसका इल्ज़ाम हमें दिया गया. हम मानते हैं जो पाकिस्तान गए उन्होंने अपनी जिंदगियां बना लीं. लेकिन हमने तो अपना खून बांटा था. हमने जिन्ना को मना किया था. उन्हें ठुकराया था. लियाकत अली खान को नहीं माना था. हमने गांधी और नेहरू को माना था.
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