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श्री कृष्ण से मुस्लिम कवियों का प्रेम

 ARIF SHAJAR हमारे शांतिप्रिय देश में इन दिनों साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. लेकिन हमारे देश में गंगा-जमुनी सभ्यता की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसे कोई उखाड़ नहीं सकता और मुझे उम्मीद है कि भारतीय सभ्यता को कोई मिटा नहीं पाएगा. क्योंकि गंगा-जमुनी सभ्यता आज भी देश में बह रही है. पूरा देश हमारे गंगा-जमुनी सभ्यता की मिसाल देता है, हमें गर्व है कि हम भारत जैसे महान देश में पैदा हुए. जब हम 14वीं शताब्दी के आसपास देखते हैं, तो हमें इस बात का गर्व होता है कि उस समय के मुस्लिम और हिंदू कवियों ने एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का कितना सम्मान किया और उनमें कितना हिंदू-मुस्लिम प्रेम भरा था. आज कृष्ण जन्माष्टमी है और इस मौके पर कैसे उर्दू के शायरों ने अपनी शायरी से कृष्ण के प्रति समर्पण का इजहार किया. आइए प्रस्तुत करते हैं उस काल के प्रसिद्ध कवियों की कुछ कविताएं, जिनसे पता चलेगा कि उस काल में श्री कृष्ण पर मुस्लिम कवियों ने किस तरह की उत्कृष्ट कविताओं का पाठ किया. अमीर खुसरो का कृष्ण प्रेम `छाप तिलक सब छीन ली रे मोसे नैना मिलाइ के`...`री सखी मैं जो गई थी पनिया भरन को, छीन झपट मोरी मटकी पटकी मोसे नैना मिलाइ के.’इस रचना में आपको सीधे कृष्ण का नाम नहीं मिलेगा लेकिन छवियां मिलेंगी जिससे आप यकीन करेंगे कि खुसरो ने यह रचना कृष्ण को समर्पित की थी रीतिकाल के आलम शेख आलम के कृष्ण काव्य की कुछ पंक्तियां देखें: पालने खेलत नंद-ललन छलन बलि, गोद लै लै ललना करति मोद गान है... ‘आलम’ सुकवि पल पल मैया पावै सुख, पोषति पीयूष सुकरत पय पान है. रहीम ने भी रची कृष्ण कविता रहीम की कृष्ण प्रेम संबंधी रचनाओं के अंश देखें: जिहि रहीम मन आपुनों, कीन्हों चतुर चकोर निसि बासर लाग्यो रहे, कृष्ण चन्द्र की ओर. ललित कलित माला का जवाहर जड़ा था चपल चखन वाला चांदनी में खड़ा था कटितर निच मेला पीत सेला नवेला अलिबिन अलबेला ‘श्याम’ मेरा अकेला. नज़ीर अकबराबादी दूसरे रसखान थे नज़ीर अकबराबादी की एक प्रसिद्ध कृष्ण प्रेम रचना देखें: तू सबका ख़ुदा, सब तुझ पे फ़िदा, अल्ला हो ग़नी, अल्ला हो ग़नी है कृष्ण कन्हैया, नंद लला, अल्ला हो ग़नी, अल्ला हो ग़नी तालिब है तेरी रहमत का, बन्दए नाचीज़ नज़ीर तेरा तू बहरे करम है नंदलला, ऐ सल्ले अला, अल्ला हो ग़नी, अल्ला हो ग़नी आलम आलम एक सच्चे कवि और सच्चे प्रेमी भी थे. यूं तो आलम जाति से ब्राह्मण थे लेकिन उन्हें शेख नाम की एक रंगरेजिन से प्यार हो गया था. इतना सच्चा प्यार कि अपना मज़हब छोड़ा और मुसलमान हो गए. आलम बहादुरशाह प्रथम के दरबार में कवि थे. श्रीकृष्ण पर लिखी आलम की यह पंक्तियां मन मोह लेती हैं; पालने खेलत नंद-ललन छलन ब झीनी सी झंगूली बीच झीनो आंगु झलकतु जसुदा के अजिर बिराजें मनमोहन जू दैहों दधि मधुर धरनि धरयौ छोरि खैहै ढौरी कौन लागी ढुरि जैबे की सिगरो दिन ऐसौ बारौ बार याहि बाहरौ न जान दीजै अब्दुल रहीम खानखाना रहीम खानखाना श्रीकृष्ण के प्रति उनकी ये पंक्तियां कितनी आत्मविभोर करने वाली हैं; जिहि रहीम मन आपुनों, कीन्हों चतुर चकोर निसि बासर लाग्यो रहे, कृष्ण चन्द्र की ओर या फिर इन पंक्तियों पर गौर कीजिये; ललित कलित माला का जवाहर जड़ा था चपल चखन वाला चांदनी में खड़ा था कटितर निच मेला पीत सेला नवेला अलिबिन अलबेला ‘श्याम’ मेरा अकेला मौलाना ज़फ़र अली मौलाना ज़फ़र अली ने भगवद्गीता के प्रति अपनी श्रध्दा कुछ यूँ प्रकट की; दिलों पर डालती आई है, डोरे सहर के गीता नहीं मिटने में आई है, यह जादू की लकीर अब तक नज़ीर अकबराबादी 18वीं सदी के भारतीय शायर आगरा के नवाब सुल्तान खान के नवासे थे. नज़ीर अकबराबादी द्वारा लिखी इन पंक्तियों से अंदाज़ा लग जाता है की नज़ीर का कृष्ण प्रेम किस हद तक पहुंच गया था; है सबका ख़ुदा सब तुझ पे फ़िदा अल्लाहो ग़नी, अल्लाहो ग़नी हे कृष्ण कन्हैया, नन्द लला अल्लाहो ग़नी, अल्लाहो ग़नी इसरारे हक़ीक़त यों खोले तौहीद के वह मोती रोले सब कहने लगे ऐ सल्ले अला अल्लाहो ग़नी, अल्लाहो ग़नी अली सरदार जाफ़री सुप्रसिध्द शायर अली सरदार जाफ़री भी कृष्णप्रेम  में देशवासियों से  यूं कहा; अगर कृष्ण की तालीम आम हो जाए तो फितनगरों का काम तमाम हो जाए मुस्लिम कवियों की कविता में श्री कृष्ण के प्रति जो भक्ति और सम्मान दिखाया गया है, उससे पता चलता है कि देश में धर्म और जाति और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालों के विचारों पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है. हमें उन राजनेताओं की योजना को विफल करने की जरूरत है जो देश में भाईचारे के बीच जहर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. देश में नफरत फैलाने वालों को उचित जवाब देने के लिए पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और आज के कवियों को आगे आना होगा. कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर अगर हम यह प्रण कर पाए तो समझिये हमने अपने पूर्वजों का मान रख लिया. इसे भी पढ़ें- कोयलांचल">https://lagatar.in/tenure-vice-chancellor-koylanchal-university-ends-on-august-31-hazaribagh-dc-made-interim-vc/">कोयलांचल

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