Basant Munda
Ranchi : पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन द्वारा जनता दरबार लगाये जाने के ऐलान के बाद आदिवासी संगठनों ने चुप्पी साध रखी है. इस संबंध में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने अबतक निर्णय नही लिया है अक्टूबर में नगड़ी में रिम्स 2 को लेकर जनता दरबार बुलाया जाएगा.
रिम्स-2 के मुद्दे पर लगने वाले जनता दरबार को लेकर आदिवासी संगठनों का रुख़ अभी साफ नहीं है. इस संबंध में पूर्व मंत्री देवकुमार धान ने कहा कि चंपई सोरेन बीजेपी के सदस्य हैं. उन्होंने रिम्स-2 की जमीन पर 4 अगस्त को हल चलाने की घोषणा की थी, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया था.
धान ने कहा कि जनता दरबार को आदिवासी संगठन समर्थन देंगे या नहीं, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. आदिवासी जनपरिषद के अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि रिम्स 2 की जमीन को लेकर बुलाये गये जनता दरबार में शामिल होने का फैसला विभिन्न आदिवासी संगठन कोर कमेटी की बैठक में लेंगे.
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की प्रदेश अध्यक्ष गीताश्री उरांव ने कहा कि रिम्स-2 विवाद सबके लिए है, इस पर राजनीतिक रंग नहीं चढ़ाना चाहिए. जो भी आदिवासी संगठन जनता दरबार में जाना चाहेंगे, वह जायेंगे. चंपाई सोरेन गुरुजी के साथ रहे हैं उनका हम सम्मान करते हैं. उनकी भावना का आदर करते है.
रिम्स-2 सामाजिक आंदोलन है. हमें पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जमीन बचाने का काम करना चाहिए. गीताश्री ने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप वहीं होना चाहिए, जहां स्थिति बिगड़े और उसे संभालने की जरूरत हो. उन्होंने सत्ता पक्ष से अपील की कि वह संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से संभाले.
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