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किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच मनाया जा रहा "राष्ट्रीय किसान दिवस"

LagatarDesk: भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा खेतों में अनाज उपजाने में लगा रहता है. किसानों को समाज में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जा सके, इसलिए हर वर्ष आज के दिन किसान दिवस मनाया जाता है. आये दिन किसानों से जुड़े मुद्दों पर बातें होती रहती हैं, लेकिन इस वर्ष का किसान दिवस इतिहास के पन्नों पर दर्ज होगा. जहां एक ओर देश भर में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसान दिल्ली में सरकार के नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में जुटे हैं. केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में देशभर के किसानों का प्रदर्शन जारी है. इसे भी पढ़ें: ज्यादा">https://lagatar.in/drinking-too-much-coffee-is-harmful-for-health/11784/">ज्यादा

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संसद में किसानों की आवाज बने थे चौधरी चरण सिंह

भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर किसान दिवस मनाया जाता है. उन्हें किसानों के मसीहा के रुप में जाना जाता है. किसानों के जीवन और स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए चौधरी चरण सिंह ने कई नयी नीतियों की शुरुआत की थी. इन्होंने भारत में किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए काफी काम किये थे. चरण सिंह ने देश की संसद में किसानों के समर्थन में आवाज उठायी थी. इसी कारण वर्ष 2001 में सरकार ने उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय किसान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया. [caption id="attachment_11812" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2020/12/charan-singh.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर किसान दिवस मनाया जाता है[/caption]

किसानों के हित में बनायी कई नीतियां

चौधरी चरण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में 23 दिसंबर 1902 को हुआ था. वह भारत के पांचवें प्रधानमंत्री बने थे. अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के किसानों की दशा सुधारने के लिए कई नीतियां बनायी थी. उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया. 1957 में वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना भी की थी. 1 जुलाई 1952 में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ था. वह 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक भारत के प्रधानमंत्री   रहे थे. चरण सिंह खुद एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे और यही वजह थी कि वह उनकी समस्याओं को अच्छी तरह से समझते थे. इसे भी पढ़ें: ">https://lagatar.in/public-interest-litigation-filed-in-supreme-court-for-fair-elections-in-west-bengal/11805/">

 पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका , भाजपा-टीएमसी में खुन्नस बढ़ी राजनेता होने के साथ-साथ चरण सिंह एक अच्छे लेखक भी थे. लेखक के तौर पर उन्होंने कई किताबें लिखी हैं. उन्होंने एबॉलिशन ऑफ जमींदारी, इकोनॉमिक नाइटमेयर ऑफ इंडिया, इंडिया पोवर्टी एंड इट्स सोल्यूशंस और लीजेंड प्रोपराइटरशिप जैसी किताबें लिखी हैं.

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