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राष्ट्रीय खेल घोटाला: HC ने दिया था CBI जांच का आदेश, सालभर बाद भी नतीजा शून्य

Vinit Upadhyay Ranchi: 28.34 करोड़ के 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाला और 424 करोड़ के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण में अनियमितता की CBI जांच अब तक पूरी नहीं हुई है. 11 अप्रैल 2022 यानि आज से ठीक एक वर्ष पूर्व हाईकोर्ट ने मामले की CBI जांच के आदेश दिए थे. जिसके बाद 22 अप्रैल 2022 को CBI ने दो FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी. पहली प्राथमिकी रांची, धनबाद और जमशेदपुर में बने मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण में अनियमितताओं से जुड़ी है. जबकि दूसरी प्राथमिकी राष्ट्रीय खेल के आयोजन में खेल सामग्री की खरीद, बगैर टेंडर खरीदारी-निर्माण के आदेश समेत अन्य धांधलियों से संबंधित है. अब तक राष्ट्रीय खेल घोटाला के केस में सीबीआई ने दो बार छापेमारी की है. पहली छापेमारी 26 मई को हुई थी.जिसमें देशभर के 18 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. जबकि दूसरी बार 19 अगस्त को प्रभात शर्मा और संजय शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है. सीबीआई ने अब तक लगभग दो दर्जन वेंडर व अन्य लोगों से पूछताछ की है. लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है. सीबीआई ने जो दो प्राथमिकी दर्ज की है, उसमें एक में 34वें राष्ट्रीय खेल के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद, महासचिव एसएम हाशमी, कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक व तत्कालीन खेल निदेशक पीसी मिश्रा को नामजद किया गया है. इसे भी पढ़ें - पहले">https://lagatar.in/first-threatened-to-leave-the-case-if-the-lawyer-did-not-agree-he-entered-the-house-and-assaulted/">पहले

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खेल सामग्रियां बिना किसी टेंडर के ऊंची कीमत पर खरीदे गये

सीबीआई से पहले एसीबी रांची ने भोलानाथ सिंह की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. जिसमें आरोप लगे थे कि रांची के बिरसा मुंडा एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम में 11 करोड़ की लागत से हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए बगैर टेंडर के बजाज इलेक्ट्रिकल्स को 11 करोड़ का काम सौंप दिया गया. बिरसा मुंडा एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम में 1 करोड़ से अधिक की रकम वीवीआईपी लाउंज और गेस्ट हाउस की फर्नीशिंग में खर्च किए गए, पर न टेंडर मंगाया गया और न यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट सुपुर्द किया गया. आयोजन समिति से जुड़े आरोपियों ने 1 करोड़ घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खर्च करने का दावा किया गया, परंतु इन उड़ानों के लिए अनुमति ही नहीं ली गई.धनबाद में 1.60 करोड़ की लागत से स्क्वैश कोर्ट का निर्माण कराया गया. इसके लिए किसी कंपनी को ठेका देने के बजाय बगैर निविदा आमंत्रित किए एक खेल संघ को काम सौंप दिया गया. जिस टेनिस बॉल की कीमत 550 रुपए दर्जन थी, आयोजकों ने उसे 880 रुपए प्रति दर्जन में खरीदा. इसी तरह अन्य खेल सामग्रियों को ऊंची कीमत पर बिना किसी टेंडर के खरीदा गया. इसे भी पढ़ें - 7th">https://lagatar.in/high-court-will-simultaneously-hear-6-petitions-filed-regarding-7th-to-10th-jpsc-exam/">7th

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