alt="" width="150" height="150" /> पंकज जैन[/caption] हेमंत सरकार को प्रस्ताव वापस लेना चाहिए : वरिष्ठ पत्रकार पंकज जैन ने कहा कि श्री सम्मेद शिखर का विवाद पूरी तरह से आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए और सरकार को अविलंब इसे पर्यटन स्थल घोषित करने के प्रस्ताव को वापस लेना चाहिए. [caption id="attachment_516317" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> अजय[/caption] राज्य सरकार को तत्परता से निर्णय लेना चाहिए : जैन समाज के अजय जैन का मानना है कि इस पर सरकार को तत्परता से निर्णय लेना चाहिए और जैन समाज की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए. जैन समुदाय इस मामले का शांतिपूर्वक समाधान चाहता है. सरकार विचार करे. [caption id="attachment_516318" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> प्रदीप सिन्हा[/caption] सरकार को इस पर जल्द फैसला लेना चाहिए : बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा है कि मामले को बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने ही संसद में उठाया था, तो ये स्वाभाविक है कि बीजेपी इस निर्णय को वापस लेने के पक्ष में है. झारखंड सरकार को इस पर जल्द फैसला लेना चाहिए. [caption id="attachment_516319" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> संजय सेठ[/caption] मामले में जैन समाज के साथ हैं : रांची के सांसद संजय सेठ ने जैन समाज के जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पारसनाथ को पर्यटन स्थल नहीं तीर्थ स्थल ही रहने देने की मांग की है. सांसद सेठ ने कहा पारसनाथ जैन समुदाय के करोड़ों लोगों के आस्था का केंद्र रहा है. यहां दर्जनों जैन मुनियों तीर्थंकरों ने तपस्या की और मोक्ष की प्राप्ति की है. सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को बनाए रखने के लिए झारखंड सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए. राज्य सरकार द्वारा पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद से ही जैन समाज में रोष है. पूरे देशभर के जैन समाज सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. संजय सेठ ने कहा, पारसनाथ मंदिर सहित जैन समाज की पूजा विधि बहुत ही स्वच्छ और पवित्रता पूर्ण तरीके से होती है. इनकी पूजा पद्धति को ध्यान में रखते हुए पर्यटन स्थल की घोषणा कहीं से भी उचित प्रतीत नहीं होता है. पर्यटन स्थल घोषित होने से यहां के पवित्रता एवं मंदिर की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. राज्य सरकार जैन समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सम्मेद शिखरजी को धार्मिक स्थल ही रहने दे. [caption id="attachment_516320" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> सुभाष[/caption] धर्म का मजाक न बनाया जाए : रांची के सुभाष जैन ने बताया कि सम्मेद शिखर झारखंड की सबसे ऊंची चोटी पर बना हुआ है. तीर्थराज सम्मेद शिखर जैन समुदाय के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है. जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था. जैन धर्म से जुड़े दोनों पंथ दिगंबर और श्वेतांबर तीर्थ सम्मेद शिखर में आस्था रखते हैं. सम्मेद शिखर में कोई भी नशीली पदार्थ न करे, उनके धर्म का मजाक न बनाया जाए, यही मांग है कि सरकार हमारे पावन तीर्थ स्थल को पवित्र रहने दे. सरकार को अगर पार्श्वनाथ पर्वत को सेट करना है तो इसे तीर्थ क्षेत्र के तहत और व्यवस्थित कर विकसित करने का कार्य करना चाहिए, जिससे पूरे विश्व से आने वाले जैन समुदाय के लोगों को एक बेहतर सुविधा मिले और झारखंड सरकार का नाम पूरे विश्व में एक बेहतर व्यवस्था के नाम पर रोशन हो. [caption id="attachment_516321" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> संदीप[/caption] पर्यटन स्थल से पवित्रता नष्ट होगी : रांची के संदीप जैन ने बताया कि जैन धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल पारसनाथ पहाड़ को राज्य सरकार की ओर से पर्यटन स्थल घोषित किया गया है. इसे लेकर पूरे भारत के जैन समाज के लोगों में रोष है. पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के दिगंबर और श्वेतांबर समाज के करोड़ों लोगों की आस्था यहां से जुड़ी हुई है, जहां पर प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में जैन धर्म के अनुयायी तीर्थ क्षेत्र की वंदना करने आते हैं. भगवान महावीर का अमर संदेश जियो और जीने दो जियो, हत्या मत करो... का अमर संदेश का अनुसरण करते हुए जैन धर्मा लंबी अहिंसा परमो धर्म का अनुसरण करते हैं. ऐसे में झारखंड सरकार की ओर से पारसनाथ पर्वत को पर्यटन स्थल बनाने से वहां पर मांस, मदिरा, जीव हत्या का दौर शुरू हो जाएगा. इससे करोड़ों जैन समाज की आस्था पर चोट लगेगी. [caption id="attachment_516322" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> पंकज[/caption] सम्मेद शिखर में बसते हैं प्रभु : रांची के पंकज पंड्या ने बताया कि सम्मेद शिखर के कण-कण में उनके भगवान बस्ते हैं. पूरे विश्व से लोग वहां दर्शन करने आते हैं. ऐसे में किसी धर्म के तीर्थ स्थल को तीर्थ ही रहने देना चहिए. अगर उसे मनोरंजन का स्पॉट बनाया जाएगा तो फिर वहां नशा, घूमना आम बात हो जाएगी. आज भी लोग वहां भगवान के दर्शन करने आते हैं. टूरिस्ट प्लेस होने के बाद लोग वहां पार्टी करेंगे, मदिरा का सेवन करेंगे , जो कि हमारे धर्म के लिए बुरी बात है. जबकि जैन समाज हमेशा से इन सभी बुराइयों से दूर रहा है और हमेशा इनसे बचने की प्रेरणा भी देता है. ऐसे में उनके पावन स्थल पर ऐसा होगा, तो उनकी धार्मिक भावना आहत होगी. जैन धर्म किसी भी हाल में सम्मेद शिखर को टूरिस्ट प्लेस घोषित नहीं होने देगा. इसका जमकर विरोध किया जाएगा. सरकार इस पर विचार [caption id="attachment_516323" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> प्रदीप[/caption] तीर्थ स्थल को टूरिस्ट स्पॉट न बनाएं : रांची के प्रदीप बाकलीवाल ने कहा कि झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर बना तीर्थस्थल जैन धर्म का पवित्र स्थल है. यहां लोग नंगे पांव पूरे नौ किलोमीटर तक चढ़ाई करते हैं और दर्शन करने आते हैं. ऐसे में अगर जैन समाज के सबसे बड़े तीर्थ स्थल को मनोरंजन का स्पॉट बना दिया जाएगा, तो उसकी पवित्रता खत्म हो जाएगी. जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने वहां निर्वाण प्राप्त किया था. ऐसे में किसी भी तीर्थ स्थल पर मांस, मच्छी या शराब बिकेगी और लोग उसका लुत्फ उठाए तो फिर हमारे धर्म की पवित्राता पर बात आएगी. हमारी सरकार से बस यही मांग है कि सम्मेद शिखर को तीर्थ स्थल ही रहने दें. टूरिस्ट स्पॉट न बनाएं. क्योंकि टूरिस्ट स्पॉट पर सैलानियों को सभी तरह की छूट मिल जाएगी, तो यहां की पवित्रता को भंग कर देगी. सरकार इस पर विचार करे.गंभीरता से विचार करे. [caption id="attachment_516326" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> महेश पोद्दार[/caption] अल्पसंख्यक जैन समाज की आशंकाओं का जल्द समाधान हो : राज्यसभा के पूर्व सदस्य महेश पोद्दार का कहना है कि पहली जनवरी को पूरी दुनिया के साथ भारत के लोग भी पिकनिक की मस्ती में डूबे थे. कड़ाके की ठंड के बावजूद खुशी का माहौल था, लेकिन भारत का एक बेहद छोटा अल्पसंख्यक जैन समुदाय अपनी धार्मिक पहचान के लिए सड़कों पर उतरा था. अपनी आवाज झारखंड सरकार तक पहुंचाने की कोशिश थी. पता नहीं, कितने लोगों ने उनकी पीड़ा महसूस की. जैन धर्म भारत की एक अद्भुत धार्मिक सांस्कृतिक विरासत है. इसके मूल में अहिंसा और त्याग है. हजारों वर्षों बाद भी जैन धर्म प्रासंगिक है. यह हमारा सामूहिक दायित्व है की जैन समुदाय को समुचित संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाए. हम झारखंड वासियों को इस पर खास गर्व होना चाहिए क्योंकि इनका सबसे बड़ा और आराध्य स्थल गिरिडीह के पारसनाथ में समवेत शिखर है. झारखंड सरकार ने पारसनाथ को ‘प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल’ घोषित किया है. अंग्रेजी में इसे जैन समाज का ’रिलिजियस पिलग्रीमेज’ यानी धार्मिक तीर्थयात्रा स्थल कहा गया है. सरकार इस क्षेत्र का पर्यटन विकास करना चाहती है. राज्य सरकार का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र घोषित किए बिना विकास नहीं होगा. दूसरी ओर, जैन समुदाय को लगता है कि पर्यटन क्षेत्र होने पर इसकी धार्मिक पवित्रता पर आंच आएगी. यहां मांसाहार और मदिरापान को बढ़ावा मिल सकता है. अधार्मिक गतिविधि बढ़ सकती है. इसलिए जैन समुदाय की मांग इसे पर्यटन स्थल नहीं बल्कि सिर्फ धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग कर रहा है. जैन समाज की आशंका ‘पर्यटन’ शब्द को लेकर है. बेहतर होगा कि राज्य सरकार इस ‘धार्मिक पर्यटन’ की विस्तृत व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट कर दे कि उक्त क्षेत्र में मांस-मदिरा व अपवित्र गतिविधियों पर रोक रहेगी. ऐसा करके वर्तमान गतिरोध को खत्म किया जा सकता है.
धनबाद :
[caption id="attachment_516327" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> भूपेंद्र कुमार[/caption] सम्मेद शिखर को तीर्थ स्थल ही रहने देना चाहिए : धनबाद के हीरापुर के दुकानदार भूपेंद्र कुमार ने कहा कि जैन समाज के तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर को सरकार को तीर्थ स्थल ही रहने देना चाहिए. इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने से इसकी पवित्रता समाप्त हो जाएगी. सरकार के निर्णय का तीव्र विरोध होना ही चाहिए. जैन समाज के गुरु दूर-दूर से यहां दीक्षा लेने के लिए आते हैं. यह हमारा सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है. [caption id="attachment_516329" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> साहिल जैन[/caption] पर्यटन स्थल बनने से बढ़ेगा मांस-मदिरा का सेवन : झरिया के दुकानदार साहिल जैन ने कहा कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से वहां मांस-मदिरा का सेवन बढ़ जाएगा और हमारे धार्मिक स्थल की पवित्रता नष्ट होगी. हम पर्यटन स्थल बनाने के सरकार के निर्णय का विरोध करते हैं. सरकार को इसे धर्म स्थल ही रहने देना चाहिए. सरकार को इस पर फौरन फैसला लेना चाहिए, ताकि विवाद खत्म हो. [caption id="attachment_516331" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> चिराग जैन[/caption] पर्यटन स्थल से जुड़ा अपना निर्णय सरकार वापस ले : झरिया के दुकानदार चिराग जैन ने कहा कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने का विरोध देशभर में हो रहा है. जनमानस की भावना का ख्याल रख सरकार अपना निर्णय वापस ले और इसे पर्यटन स्थल की जगह तीर्थ स्थल के रूप में और विकसित करे. देश में पर्यटन स्थलों की संख्या काफी अधिक है. उसकी तुलना में धार्मिक स्थल कम हैं. इसे धार्मिक स्थल बने रहने देना चाहिए. [caption id="attachment_516333" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> पीयूष जैन[/caption] मांस-मदिरा के सेवन से पावन जगह अपवित्र हो जाएगी : झरिया के दुकानदार पीयूष जैन ने कहा कि जहां पर तपस्या करने से सिद्धी सिद्धि मिलती हैं, यदि उसे पर्यटन स्थल बना दिया जाए, तो वहां पहुंचने वाले पर्यटक मांस-मदिरा का सेवन करेंगे. इससे जगह अपवित्र हो जाएगा. इसलिए सरकार इसे पर्यटन स्थल बनाने की जगह तीर्थ स्थल की मान्यता दे. सरकार को इस अस्पष्टता को साफ करना चाहिए, ताकि विवाद खत्म हो. [caption id="attachment_516337" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> दीपक कोठारी जैन[/caption] जैनियों की आस्था पर चोट पहुंच सकती है : झरिया स्थत श्वेतांबर महावीर जैन मंदिर के पुजारी दीपक कोठारी जैन ने कहा कि सम्मेद शिखर जैसा जैनियों का धार्मिक स्थल विश्व में दूसरा नहीं है. इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने से यहां पर्यटक पिकनिक मनाने आएंगे. डीजे पर अभद्र डांस करेंगे. इससे हमारी आस्था पर चोट पहुंचेगी. यही वजह है कि इसका पूरे भारत में विरोध किया जा रहा है. संत, महात्माओं को भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है.
बोकारो :
[caption id="attachment_516338" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> संजय वैद[/caption] तीर्थंकरों की तपोभूमि की पवित्रता बरकरार रखें : बोकारो चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव संजय वैद ने कहा कि दुनियाभर में लाखों जैनियों की आस्था व श्रद्धा से जुड़े जैनियों के प्रमुख तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर को तीर्थ क्षेत्र घोषित करना चाहिए. जिससे इस तपोभूमि की पवित्रता बरकरार रह सके. पर्यटन क्षेत्र घोषित करने से अहिंसा का संदेश देने वाली इस पवित्र भूमि की सार्थकता खत्म हो जाएगी. [caption id="attachment_516339" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> डॉ आकाश जैन[/caption] सम्मेद शिखर को तीर्थ क्षेत्र ही रहने दिया जाए : बोकारो के सेक्टर चार निवासी डॉ. आकाश जैन ने कहा कि हम जैनियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए सम्मेद शिखर को तीर्थ क्षेत्र ही रहने दिया जाए. इसे पर्यटन क्षेत्र न बनाया जाए. हमारे 24 में से 20 तीर्थकर की मोक्ष स्थली शिखरजी अनंत काल से हम जैनियों की आस्था का केंद्र हैं. यह आराधना का स्थल है मौज का नहीं है. सरकार को इसका ख्याल रखना चाहिए. [caption id="attachment_516340" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> डॉ आकाश जैन[/caption] पर्यटन स्थल बनने से जैन समाज की आस्था आहत होगी : डॉक्टर रिचा जैन ने कहा कि जिस तरह से सरकार द्वारा जैनियों की आस्था के केंद्र को पर्यटन में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, इससे हमारी आस्था आहत होगी. सम्मेद शिखर जैनियों के आराधना का केंद्र माना जाता है. सरकार को चाहिए कि हम जैनियों के लिए इसे आस्था का केंद्र ही रहने दिया जाए. इसे पर्यटन स्थल में नहीं बदला जाए. [caption id="attachment_516341" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> डॉ एमके जैन[/caption] पर्यटन स्थल घोषित करने से पावन स्थल दूषित हो जाएगा : चास निवासी डॉ.एमके जैन ने बताया कि पिछले कई वर्षों से जैनियों की आस्था का प्रतीक सम्मेद शिखर माना गया है. पर्यटन स्थल घोषित करने से यह दूषित हो जाएगा. सरकार को प्रमुख तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर को पवित्र क्षेत्र घोषित करना चाहिए ताकि पवित्रता हमेशा बनी रहे. साथ ही सालों की हमारा पवित्र धार्मिक स्थल पर हिंसा और मनोरंजन का रंग दिखने लगेगा.
जमशेदपुर :
[caption id="attachment_516342" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> किशोर गोलछा[/caption] पर्यटन स्थल घोषित बहुत ही गलत निर्णय : जैन समाज जमशेदपुर के संयोजक किशोर गोलछा का कहना है कि यह बहुत सामान्य सी बात है कि पर्यटन स्थल और धार्मिक स्थल की परिभाषा अलग-अलग है, दोनों अलग-अलग चीजें हैं. कोई भी धार्मिक स्थल घूमने-फिरने की जगह नहीं होती. धार्मिक स्थल धार्मिक आस्था का स्थान होता है. इसलिए जैनियों के प्रमुख तीर्थस्थल सम्मेद शिखर को धार्मिक स्थल ही रहने दिया जाए. [caption id="attachment_516343" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> अशोक जैन[/caption] किसी भी श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए : श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष अशोक जैन ने कहा कि अशोक जैन ने कहा कि साधना-आराधना के आराध्य स्थल श्री सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाए जाने से तीर्थ स्थान की पवित्रता, मर्यादा और श्रद्धा पर कुठाराघात होगा. देशभर के अनुयायी नंगे पांव, उपवास आदि व्रत धारण कर ध्यान के लिए पहुंचते हैं. पर्यटन स्थल बनने से यहां की पवित्रता नष्ट हो सकती है. [caption id="attachment_516344" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> प्रदीप जैन[/caption] सम्मेद शिखर को पावन धार्मिक आस्था के अनुरूप रखा जाए : श्री दिगंबर जैन समाज के सचिव प्रदीप जैन का कहना है कि भारतवर्ष के शासन ने सदैव हर धर्म और समुदाय की भावनाओं का आदर किया है और सामाजिक समरसता को बनाए रखते हुए शासन किया है. इसलिए जैनियों के प्रमुख तीर्थस्थल सम्मेद शिखर को पूर्व की तरह ही धार्मिक आस्था के अनुरूप रखा जाए, जिससे धर्म प्रधान संस्कृति की रक्षा भी संभव होगी. [caption id="attachment_516345" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> राजकुमार जैन[/caption] सरकार को अपने निर्णय को फौरन वापस लेना चाहिए : श्री टाटानगर ओसवाल जैन संघ के अध्यक्ष राजकुमार जैन का कहना है कि केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को एक नोटिफिकेशन जारी कर गिरिडीह और धनबाद जिले के पारसनाथ और तोपचांची के अभयारण्य को इको सेंसेटिव जोन में परिवर्तित कर दिया. झारखंड सरकार ने इस क्षेत्र को पर्यटन के लिए विकसित करने की योजना बनाई. जैन धर्मावलंबियों ने विरोध में रैली व बंद किया. [caption id="attachment_516346" align="aligncenter" width="146"]
alt="" width="146" height="150" /> सुरेश मेहता[/caption] निर्णय जल्द वापस नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन होगा : श्री साकची स्थानकवासी जैन संघ के अध्यक्ष सुरेश मेहता का कहना है कि पूर्व की तरह इस पावन तीर्थ को तीर्थ भूमि ही रखा जाना चाहिए. पूरे भारत समेत विश्व के अनेक स्थलों पर रहने वाले जैन धर्मावलंबी इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं एवं सरकार द्वारा अगर समुचित कदम नहीं उठाया जाएगा तो समस्त देश में इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.
गिरिडीह :
पारसनाथ सम्मेद शिखर इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. चर्चा की वजह झारखंड सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के विकास को लेकर जो अधिसूचना जारी की है, उसमें पर्यटन शब्द शामिल किया जाना है. जैन समाज को पर्यटन शब्द शामिल किए जाने पर नाराजगी है. झारखंड सरकार ने पारसनाथ के विकास को लेकर पारसनाथ पर्यटन विकास प्राधिकार का गठन किया है. केंद्र सरकार ने पारसनाथ में इको टूरिज्म को लेकर अधिसूचना जारी की है. जैन समाज दोनों ही अधिसूचनाओं से पर्यटन शब्द हटाने की मांग कर रहा है. उल्लेखनीय है कि पारसनाथ जैनियों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है. जैनियों के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पर्वत पर तपस्या की थी. अधिसूचना से पर्यटन शब्द हटाने के लिए दिल्ली, अहमदाबाद समेत देश के अन्य राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं. जैन समाज की मांग है कि पासनाथ को धार्मिक स्थल ही रहने दिया जाए. पर्यटन स्थल घोषित किए जाने पर बाहर से सैलानी आएंगे व अपने स्वाद के अनुसार आहार ग्रहण करेंगे, जिससे यहां की पवित्रता नष्ट होगी. [caption id="attachment_516347" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> विकास जैन[/caption] पर्यटन स्थल और धार्मिक स्थल में काफी अंतर होता है : व्यवसायी विकास जैन का कहना है कि पर्यटन स्थल और धार्मिक स्थल में अंतर है. यह जैनियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है. पर्यटन स्थल बनने से यहां की पवित्रता नष्ट होगी. सैलानी मांस-मदिरा का सेवन करेंगे. केंद्र और राज्य सरकार से मांग है कि पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित नहीं कर धार्मिक स्थल ही रहने दें. [caption id="attachment_516348" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> राजन जैन[/caption] सरकारी फैसले से जैनियों की आस्था को चोट पहुंच सकती है : व्यवसायी राजन जैन का कहना है कि जिस प्रकार ईसाइयों के लिए यरूशलम, मुसलमानों के लिए मक्का मदीना, सिखों के लिए स्वर्ण मंदिर और हिंदुओं के लिए चारों धाम खास है, उसी तरह जैनियों के लिए सम्मेद शिखर है. इसे पर्यटन स्थल घोषित नहीं कर धार्मिक स्थल ही रहने दिया जाए. इससे आस्था को चोट पहुंच सकती है. [caption id="attachment_516350" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> रोहित जैन[/caption] इस मसले पर सरकार जैन समाज से राय मशविरा करे : व्यवसायी रोहित जैन का कहना है कि पारसनाथ दुनिया के जैनियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है. तीर्थंकरों की तपस्या से यह जगह शुद्ध है. जैन श्रद्धालु यहां जूते-चप्पल पहनकर नहीं जाते. फिर सैलानी जूते-चप्पल पहनकर आएंगे, जिससे यहां की पवित्रता नष्ट होगी. झारखंड सरकार जैन समाज से राय मशविरा करे. [caption id="attachment_516349" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> राजीव जैन छाबड़ा[/caption] सरकार की अधिसूचना का प्रबल विरोध करते हैं : कोडरमा से जैन युवक समिति अध्यक्ष राजीव जैन छाबड़ा ने बताया कि सम्मेद शिखर पारसनाथ क्षेत्र पवित्र जैन तीर्थ स्थल है. सरकार द्वारा पर्यटन स्थल घोषित करने की अधिसूचना का हम सब विरोध करते हैं. यह तीर्थ क्षेत्र पवित्र अहिंसक तीर्थ स्थल के रूप में घोषित हो. आस्था आहत हो रही है. [caption id="attachment_516352" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> कमल जैन[/caption] सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र कतई स्वीकार्य नहीं कर सकते : कोडरमा से जैन समाज उपाध्यक्ष कमल जैन सेठी ने बताया कि सम्मेद शिखर पारसनाथ पर्वत पूरे विश्वभर के जैन समाज की आस्था का केंद्र है. सरकार द्वारा इसे पर्यटन क्षेत्र घोषित करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है. सरकार ने इसे पर्यटक क्षेत्र घोषित कर दिया है, जो जैन समुदाय को स्वीकार नहीं है. [caption id="attachment_516353" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> पिंकी जैन[/caption] सम्मेद शिखर को पूजन स्थल नहीं बने रहने देना चाहिए : कोडरमा के झुमरीतिलैया निवासी निवर्तमान वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने बताया कि धर्म का सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखर पारसनाथ में विश्वभर के सभी संप्रदाय के लोग दर्शन के लिए आते हैं, जिस पर किसी तरह की रोक नहीं है. सरकार से निवेदन है कि सम्मेद शिखर को जैन धर्म का पवित्र जैन तीर्थ स्थल बने रहने देना चाहिए. [caption id="attachment_516354" align="aligncenter" width="150"]
alt="" width="150" height="150" /> सुरेंद्र जैन काला[/caption] प्राचीन पारसनाथ पर्वत की पवित्रता बने रहने दें : कोडरमा के झुमरीतिलैया निवासी सुरेंद्र जैन काला ने बताया कि सम्मेद शिखर पारसनाथ जैन धर्म की आन बान और शान है और धार्मिक आस्था का केंद्र बिंदु है. सरकार इसे पवित्र जैन तीर्थ क्षेत्र घोषित करें. हम सभी यही अपील करते हैं कि पारसनाथ पर्वत को जैन समुदाय का पवित्र स्थल ही बने रहने दें. [wpse_comments_template]

Leave a Comment