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Lagatar Exclusive: IED के सहारे सारंडा में टिके हैं बचे नक्सली, एक साल में 5 से अधिक मौतें, 12 से ज्यादा घायल

बरामद विस्फोटक की फाइल फोटो.
  • एक साल में कई जानें गईं, दर्जनों घायल.
  • विस्फोट की घटना में जानवर भी बने शिकार.
  • 55-60 नक्सलियों की मौजूदगी का दावा.
  • सुरक्षा बलों का अभियान तेज, घेराबंदी जारी.

Ranchi : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित सारंडा जंगल में नक्सलियों की गतिविधियां अब सीमित दायरे में सिमटती नजर आ रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि नक्सली अब सीधे मुठभेड़ से बच रहे हैं और अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी बारूदी सुरंगों का सहारा ले रहे हैं.

 

अधिकारियों के अनुसार नक्सलियों ने अपने संभावित ठिकानों और सुरक्षित जोन के आसपास बड़ी संख्या में आईईडी प्लांट कर रखे हैं. पहले जहां वे आमने-सामने की मुठभेड़ में शामिल होते थे, वहीं अब उनकी रणनीति बदल चुकी है. सुरक्षा बलों का मानना है कि संगठन की सीधी लड़ाई लड़ने की क्षमता कमजोर हुई है, इसलिए वे सुरक्षा बलों और ग्रामीणों को निशाना बनाने के लिए बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं. लगातार सर्च ऑपरेशन के दौरान सैकड़ों आईईडी बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया जा रहा है.

 

पिछले करीब एक वर्ष के दौरान आईईडी विस्फोटों में पांच से अधिक की मौत हो चुकी है, जबकि 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इनमें सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ग्रामीण भी शामिल हैं. इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है.

 

विस्फोट की घटनाएं

  • - 12 अप्रैल 2025 को सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान सारंडा के अंदरूनी इलाके में चल रहा था, इसी दौरान पहले से प्लांट की गई आईईडी में विस्फोट हो गया, जिसमें एक जवान की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए.
  • - 28 नवंबर 2025 को कोलबंगा-बिंदीकीरी क्षेत्र में जंगल मार्ग से गुजर रही महिलाओं का समूह आईईडी की चपेट में आ गया. घटना में एक ग्रामीण महिला की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए.
  • - 15 दिसंबर 2025 को अलग-अलग स्थानों पर सर्च ऑपरेशन के दौरान दो आईईडी विस्फोट हुए, जिनमें कोबरा बटालियन के दो जवान घायल हो गए.
  • - जनवरी 2026 में एक वरिष्ठ अधिकारी आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए. इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई.
  • - 11 फरवरी 2026 को आईईडी विस्फोट में दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए, जिनकी बाद में इलाज के अभाव में मौत हो गई.
  • - 21 फरवरी 2026 को चल रहे ऑपरेशन के दौरान फिर आईईडी ब्लास्ट हुआ, जिसमें दो पुलिस जवान गंभीर रूप से घायल हो गए.

 

विस्फोट की घटना में जानवर भी बने शिकार

दिसंबर 2025 में सारंडा के जंगलों में आईईडी की चपेट में आने से एक हाथी सहित कई पालतू जानवरों की भी मौत हो चुकी है. इससे स्पष्ट है कि बारूदी सुरंगों का खतरा केवल सुरक्षा बलों या ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वर्तमान में सारंडा के जंगलों में लगभग 55 से 60 नक्सली सक्रिय हैं. इनमें एक करोड़ रुपये के दो इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल शामिल बताए जाते हैं.

इसके अलावा 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली मोचू ,अजय महतो और सागेन अंगारिया के भी सक्रिय होने की सूचना है. इन पर झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों में कई नक्सली घटनाओं में संलिप्तता के आरोप हैं.

 

अभियान तेज, घेराबंदी जारी

पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा सारंडा के दुर्गम इलाकों में लगातार कांबिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है. हाल के महीनों में कई मुठभेड़ों में नक्सलियों को मार गिराने और भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद करने का दावा किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि संगठन की ताकत पहले की तुलना में काफी कमजोर हुई है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. व्यापक घेराबंदी और लगातार सर्च अभियान के कारण नक्सलियों की गतिविधियां सिमटती जा रही हैं.

सुरक्षा बलों का स्पष्ट कहना है कि अब नक्सली सीधे मुकाबले की स्थिति में नहीं हैं और आईईडी के सहारे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. अभियान का उद्देश्य इलाके को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है, ताकि आम लोगों का जीवन सामान्य हो सके.

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