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धनबाद रेलवे स्टेशन पर एनडीआरएफ की टीम ने किया मॉक ड्रिल

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) धनबाद में रेलवे ने दुर्घटना के बाद एनडीआरएफ ने यात्रियों की सुरक्षा, राहत और बचाव कार्य के लिए 28 अप्रैल शुक्रवार को मॉक ड्रिल किया. रेलवे स्टेशन के दक्षिण तरफ आरआरआई के पास राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की बिहटा, पटना स्थित 9 वीं बटालियन, स्कॉउट और गाइड के सदस्य, धनबाद मंडल अस्पताल की मेडिकल टीम व रेलवे दुर्घटना सहायता के दर्जनों सदस्यों की टीम ने मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया. दुर्घटना के बाद राहत और बचाव की टीम के काम करने के तरीके का प्रदर्शन किया गया.

  मॉक ड्रिल में दर्शाया गया राहत व बचाव कार्य

रेलवे का लंबा सायरन बजते ही धनबाद मंडल के सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मियों के साथ एनडीआरएफ की टीम,अग्निशमन विभाग तथा राज्य पुलिस के कर्मी आदि सावधान हो गए. मंडल रेल प्रबंधक कमल किशोर सिन्हा ने राहत एवं बचाव कार्य संबंधी तैयारी का जायजा लिया. स्टेशन के दक्षिण की तरफ आरआरआई के पास हावड़ा छोर के समीप रेल लाइन पर पहले एक बड़े क्रेन के जरिये रेल की एक बोगी को दूसरी बोगी पर चढ़ा दिया गया.

  हुटर बजते ही बचाव दल की हर टीम हुई सक्रिय

[caption id="attachment_622084" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/mock-drill-300x225.jpeg"

alt="" width="300" height="225" /> मॉक ड्रिल में राहत व बचाव कार्य का दृश्य[/caption] इसके बाद हुटर बजा कर घटना की जानकारी दी गयी. हुटर बजते ही रेलवे दुर्घटना सहायता के कर्मियों ने ट्रेन के बाहर गिरे घायलों को उठा कर अस्पताल के लिये रवाना कर दिया. इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी और स्काउट एंड गाइड की टीम ने एक सुरक्षा घेरा तैयार किया. बड़ी दुर्घटना का रूप देकर एनडीआरएफ की टीम को घटना स्थल पर बुलाया गया. एनडीआरएफ की टीम पहुंची व राहत-बचाव के विभिन्न साज सामान के साथ ट्रेन के अंदर तथा कथित रूप से फंसे रेल यात्रियों को ट्रेन की खिड़की तथा बोगी के विभिन्न स्थानों को काट कर बाहर निकाला. गया. इसके बाद कथित रूप से घायल रेल यात्रियों को प्राथिमक उपचार देकर बेहतर इलाज के लिये अस्पताल रवाना किया गया.

  दुर्घटना होने पर धैर्य से लें काम: सीनियर डीसीएम

सीनियर डीसीएम अमरेश कुमार ने कहा कि धनबाद रेल मंडल की ओर से मॉक ड्रिल में दर्शाने का प्रयास किया गया है कि दुर्घटना होने के बाद धैर्य से काम लेना चाहिए. बिना घबराये राहत-बचाव कार्य में लगे कर्मियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए. मॉक ड्रिल से यह सुनिश्चित किया जाता है कि जो निर्धारित प्रक्रिया है उसका पालन हो रहा है या नहीं अथवा इसमें क्या सुधार या बदलाव करने की आवश्यकता है. सभी विभागों का रिस्पांस टाइम कितना है. यह भी पता चलता है. मॉक ड्रिल से पूर्व मंडल रेल प्रबंधक की अध्यक्षता में एनडीआरएफ की टीम व संबंधित लेगों के साथ समन्वय बैठक की गई, जहां सभी विभागों द्वारा अपने आपदा प्रबंधन की जानकारी साझा की गई. [wpse_comments_template]

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