New Delhi : NEET Paper Leak विवाद बढ़ता ही जा रही है. छात्रों में आक्रोश है. विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.
खबर है कि सप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार सहित, राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और सीबीआई को नोटिस जारी किया है.कोर्ट ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए जवाब मांगा है.
VIDEO | NEET Paper Leak 2026: Advocate of the petitioner, Faima, on SC order, said,
— Press Trust of India (@PTI_News) May 25, 2026
"Today, the matter was heard primarily on behalf of the FIMA Association, and I appeared in the case. The main argument put forth was that around 23 lakh students had appeared for this… pic.twitter.com/uueNmRhyzs
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा है कि संबंधित संस्थाओं ने अब तक कोई सबक नहीं सीखा है.
याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने मांग की है कि एनटीए को भंग कर NEET आदि महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त परीक्षा निकाय बनाया जाये.
परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित करने की मांग की गयी है.याचिकाकर्ताओं के अनुसार NEET परीक्षा में बार-बार पेपर लीक ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है. अब NEETकी परीक्षा प्रणाली में सुधार लाते हुए और जवाबदेही तय करना अतिआवश्यक हो गया है.
सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे दुखद करार दिया. कहा किउन्होंने कोई सबक नहीं सीखा. कोर्ट ने कहा कि हमने पूर्व में आदेश पारित किया था. एक कमेटी बनाई गयी थी.
कमेटी की सिफारिशें स्वीकार की गयी थी. इस संदर्भ में एक मॉनिटरिंग कमेटी भी गठित की गयी थी. इन सब बातों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने एनटीए से पूछा कि मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर कितना अमल किया गया.
कोर्ट ने एनटीए को आदेश दिया कि वह इस संबंध में विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल कर जानकारी दे कि 2024 के NEET पेपर लीक विवाद के बाद गठित मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों को किस तरह लागू किया गया.
इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें. कोर्ट ने कहा, हमारा फोकस सिर्फ परीक्षा पर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर है.
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