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भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों के कल्याण बोर्ड की लापरवाही उजागर, महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियां

Ranchi: प्रधान महालेखाकार इन्दु अग्रवाल ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि के लिए श्रम विभाग और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों के कल्याण बोर्ड की ऑडिट रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं और लापरवाहियों का खुलासा हुआ है, जिससे राज्य की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. रिपोर्ट में श्रम विभाग और बोर्ड की लापरवाही साफ दिखाई देती है. मजदूरों के कल्याण के लिए बने फंड और योजनाओं का सही उपयोग नहीं किया गया. इससे सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसे भी पढ़ें -सरकारी">https://lagatar.in/a-new-chapter-written-in-the-direction-of-connecting-government-primary-schools-with-digital-services-cm/">सरकारी

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बोर्ड की लापरवाही: मजदूरों को नहीं मिला लाभ

ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण बोर्ड ने राज्य के निर्माण मजदूरों के लिए बनी योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं किया. रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने पांच वर्षों तक वार्षिक लेखा तैयार नहीं किया. विभाग ने ऑडिट करवाने की जरूरत नहीं समझी. पंजीकृत मजदूरों को लाभ देने के लिए बना वेलफेयर फंड सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ. ग्रुप इंश्योरेंस जैसी योजनाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

बजट का सही उपयोग नहीं, 85% राशि खर्च करने में विफल

श्रम विभाग को मिले बजट का 85% हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया. वहीं खर्च हुई राशि का भी सही पेपरवर्क नहीं किया गया. बोर्ड ने जो राशि खर्च की है, उसमें 42% राशि साइकिल, सिलाई मशीन, साड़ी वितरण जैसी योजनाओं पर खर्च की गई, जबकि मजदूरों के लिए आवास, कौशल विकास और पेंशन योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया. सही लेखा-जोखा न रखने के कारण बैंक ने टीडीएस के रूप में 91.15 लाख रुपये की कटौती कर ली.बड़ी संख्या में मजदूरों का पंजीकरण करने में भी श्रम विभाग की रुची नहीं रही.

मृत मजदूरों के आश्रितों को आर्थिक सहायता में गड़बड़ी

ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृत मजदूरों के आश्रितों को मिलने वाली सहायता राशि में भी गड़बड़ी की गई. 2 से 4 लाख रुपये की जगह केवल 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई. आश्रितों की सही पहचान करने में भी लापरवाही बरती गई. 97% मामलों में सहायता राशि का भुगतान तीन वर्षों से अधिक समय में किया गया, जबकि नियम के अनुसार 60 दिनों के भीतर भुगतान होना चाहिए. मजदूरों ने श्रम विभाग की योजनाओं की जनकारी नहीं होने की बात कही.

पेंशन योजना में भी गड़बड़ी

पेंशन योजना में भी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं. 10,710 पंजीकृत मजदूरों में से केवल 159 (1%) को ही पेंशन स्वीकृत की गई, बोर्ड की ओर से निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों से बात की गयी तो इसका खुलासा हुआ.

बोर्ड के पैसे नहीं लौटाये झारखंड सरकार ने

भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों के कल्याण बोर्ड के औडिट में यह तथ्य भी समाने आया कि झाऱखंड सरकार ने बोर्ड के खाते से 504.67 करोड़ राशि ली थी, उसे बोर्ड के वापस नहीं किया गया है. वहीं स्थानीय निकायों ने भी बोर्ड के खाते में 17-18 से 2021-22 के बीच 37.47 करोड़ रुपया जमा नहीं किए गये हैं. जबकि यह राशि 30 दिनों के भीतर बोर्ड के खाते में जमा कर देने हैं. इस पूरे रिपोर्ट में सरकारी तंत्र की विफलता उजागर करने का काम किया है. इसे भी पढ़ें -हेमंत">https://lagatar.in/hemant-governments-previous-tenure-was-full-of-economic-mismanagement-and-loot-cag-report-giving-testimony-babulal/">हेमंत

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