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नीदरलैंड ने भारत को सौंपे 11वीं सदी के ऐतिहासिक चोल ताम्र पत्र, पीएम मोदी ने आभार जताया

New Delhi : नीदरलैंड  से भारतीय इतिहास और संस्कृति की महानता दर्शानेवाली खबर आयी है. नीदरलैंड यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को वहां की सरकार ने 11वीं सदी के ऐतिहासिक चोल ताम्र पत्र (Chola Copper Plates) सौंप दिये हैं.   

 

 

यह जानकारी खुद पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर दी है. नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में चोल राजवंश से जुड़े ताम्रपत्र भारत को सौंप दिये. प्रधानमंत्री मोदी  डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां ताम्रपत्र सौंपे गये.

 

पीएम मोदी ने नीदरलैंड सरकार और लीडेन विश्वविद्यालय का आभार जताते हुए. पीएम ने इसे  भारतीयों के लिए गर्व का पल करार दिया है. दरअसल भारत  2012 से ही अनाइमंगलम ताम्रपत्रों की वापसी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा था. बता दें कि  नीदरलैंड में  इन चोल ताम्र-पत्रों को लीडेन प्लेट्स के नाम से जाना जाता है.


 
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, चोल युग के ताम्रपत्र भारत वापस लाये जा रहे हैं. यह हर भारतीय के लिए खुशी का क्षण है. उन्होंने जानकारा दी कि इन ताम्रपत्रों में 21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्र शामिल हैं.

 

इन पर मुख्य रूप से तमिल भाषा में शिलालेख अंकित हैं. इन ताम्रपत्रों का संबंध चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम से रहा है. ताम्रपत्रों में उनके पिता राजाराजा चोल प्रथम द्वारा दिये गये मौखिक वचन हैं.

 

 पीएम मोदी ने आगे लिखा कि  ये वचन चोल साम्राज्य की महानता और गौरव का वर्णन  करते हैं भारत को चोल संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर गर्व है. 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार चोलताम्रपत्र तमिलनाडु के नागपट्टिनम स्थित चूलामणिवर्म विहार को दिये गये अनुदान का दस्तावेज हैं. इनमें तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओं में लेख अंकित हैं.  

 

30 किलोग्राम वजन वाले य ताम्रपत्र एक कांस्य की अंगूठी से जुड़े हुए हैं, जिस पर चोल राजा की शाही मुहर लगी है. इन्हें 19वीं शताब्दी से नीदरलैंड के लीडेन विश्वविद्यालय में सुरक्षित रखा गया था. 

 

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