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झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में नई व्यवस्था, कैलेंडर से लेकर रिजल्ट तक की समय सीमा

Ranchi News: अधिनियम की धारा 96 के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय को शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले आगामी वर्ष के लिए परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर प्रकाशित करना होगा. विश्वविद्यालयों को निर्धारित परीक्षा कैलेंडर का अनुपालन करना होगा. यदि किसी कारण से विश्वविद्यालय निर्धारित कैलेंडर के अनुसार परीक्षा आयोजित नहीं कर पाता है, तो संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष देरी के कारणों का उल्लेख करते हुए तर्कपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा.
 
फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र, परीक्षा, मूल्यांकन और प्रवेश व्यवस्था को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. अधिनियम के अध्याय-VII में छात्रों के प्रवेश, परीक्षा, परीक्षाफल, पाठ्येतर गतिविधियों और छात्र शिकायतों से संबंधित व्यवस्थाओं को निर्धारित किया गया है. नए प्रावधानों में विश्वविद्यालयों के लिए परीक्षा कैलेंडर का पालन और परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने पर विशेष जोर दिया गया है.

 

अधिनियम की धारा 96 के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय को शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले आगामी वर्ष के लिए परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर प्रकाशित करना होगा. विश्वविद्यालयों को निर्धारित परीक्षा कैलेंडर का अनुपालन करना होगा.

 

यदि किसी कारण से विश्वविद्यालय निर्धारित कैलेंडर के अनुसार परीक्षा आयोजित नहीं कर पाता है, तो संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष देरी के कारणों का उल्लेख करते हुए तर्कपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा. परीक्षा कार्यक्रम में देरी के मामले में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा.

 

धारा 97 में परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर भी समयसीमा निर्धारित की गई है. विश्वविद्यालय को अंतिम परीक्षा समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर परीक्षाफल घोषित करने का प्रयास करना होगा.

 

हालांकि किसी भी परिस्थिति में परीक्षाफल घोषित करने की अवधि 45 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए. यदि 45 दिनों के भीतर परिणाम घोषित नहीं होता है, तो देरी के कारणों की जवाबदेही तय की गई है.

 

ऐसी स्थिति में परीक्षा नियंत्रक को कुलपति के माध्यम से राज्य सरकार के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा, जिसमें परिणाम जारी करने में हुई देरी के कारणों का उल्लेख किया जाएगा.

 

अधिनियम की धारा 94 में विश्वविद्यालयों में प्रवेश की व्यवस्था निर्धारित की गई है. विश्वविद्यालय के विभागों, अंगीभूत महाविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश मेधा (Merit) और राज्य सरकार की लागू आरक्षण नीति के अनुसार किया जाएगा.

 

अधिनियम में प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया है. प्रवेश के बिंदु पर किसी विद्यार्थी के नामांकन को मनमाने तरीके से अस्वीकार नहीं किया जा सकेगा.

 

प्रवेश से संबंधित विवादों के समाधान के लिए अधिनियम में छात्र शिकायत निवारण समिति (Student Grievance Redressal Committee-SGRC) की व्यवस्था की गई है. धारा 100 के तहत छात्र अपनी शिकायतों और प्रवेश से जुड़े विवादों के निवारण के लिए निर्धारित व्यवस्था का सहारा ले सकेंगे.

 

धारा 99 में विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर खेलकूद, सांस्कृतिक और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के लिए विद्यार्थियों के चयन से संबंधित प्रावधान किया गया है.

 

विश्वविद्यालय या कॉलेज का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों का चयन खुली योग्यता प्रतियोगिता (Open Merit Competition) के माध्यम से किया जाएगा. इसमें चयन के लिए किसी अन्य आधार का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

 

नए अधिनियम के इन प्रावधानों से विश्वविद्यालयों की परीक्षा व्यवस्था में समयबद्धता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है. खास तौर पर परीक्षा कैलेंडर में देरी होने पर 30 दिनों के भीतर कारण बताने और परिणाम में 45 दिनों से अधिक की देरी होने पर परीक्षा नियंत्रक से रिपोर्ट लेने की व्यवस्था की गई है.

 

इससे विश्वविद्यालयों में परीक्षा और परिणाम से जुड़ी प्रक्रियाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर रहेगी. साथ ही प्रवेश और छात्र शिकायतों के लिए भी अधिनियम में स्पष्ट व्यवस्था की गई है.

 

मुख्य बिंदु

परीक्षा कैलेंडर पहले से जारी होगा: हर विश्वविद्यालय को शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले अगले वर्ष की परीक्षाओं का पूरा कैलेंडर जारी करना होगा.

 

परीक्षा में देरी पर जवाब देना होगा: अगर विश्वविद्यालय तय कैलेंडर के अनुसार परीक्षा नहीं करा पाता है, तो संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के अंदर राज्य सरकार को देरी का कारण बताते हुए रिपोर्ट देनी होगी.

 

रिजल्ट 30 दिन में देने का प्रयास: अंतिम परीक्षा खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय को 30 दिनों के अंदर रिजल्ट जारी करने का प्रयास करना होगा.

 

45 दिन की अधिकतम सीमा: किसी भी स्थिति में रिजल्ट जारी करने में 45 दिनों से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए.

 

रिजल्ट में देरी पर परीक्षा नियंत्रक जिम्मेदार: 45 दिन के बाद भी रिजल्ट जारी नहीं होने पर परीक्षा नियंत्रक को कुलपति के माध्यम से राज्य सरकार को देरी की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी.

 

मेरिट के आधार पर एडमिशन: विश्वविद्यालय और कॉलेजों में प्रवेश मेधा/मेरिट और राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुसार होगा.

 

मनमाने तरीके से एडमिशन नहीं रोका जा सकेगा: प्रवेश के स्तर पर किसी छात्र का नामांकन बिना उचित आधार के अस्वीकार नहीं किया जा सकेगा.

 

एडमिशन विवाद के लिए समिति: प्रवेश से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए Student Grievance Redressal Committee (SGRC) की व्यवस्था है.

 

खेल में प्रतिभा को मौका: खेलकूद में विश्वविद्यालय या कॉलेज का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों का चयन Open Merit Competition के आधार पर होगा.

 

सांस्कृतिक गतिविधियों में भी मेरिट: सांस्कृतिक और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के लिए भी प्रतिनिधित्व का चयन खुली योग्यता प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाएगा.

 

मुख्य उद्देश्य: नए नियमों का मकसद विश्वविद्यालयों में समय पर परीक्षा, जल्दी रिजल्ट, पारदर्शी एडमिशन और छात्रों के लिए जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना है.

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