- हाथ-पैर से लेकर मुंह के भीतर तक लाल छाले, दाने, चकते हो रहे
- रिम्स समेत प्राइवेट अस्पतालों में हर दिन पहुंच रहे मरीज
- गंभीर नहीं है यह बीमारी. 5 से 10 दिन में ठीक हो जाता है संक्रमण
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का शिष्टमंडल मंत्री बन्ना गुप्ता से मिला, रखी मांगें इससे बच्चों के शरीर में जहां भी ऐसे निशान होते है वहां दर्द बढ़ जाता है. मुंह और गले में छाले पड़ जाते है. लोगों को जागरूक करते हुए डॉ. राजेश ने बताया कि इस बीमारी में डेथ रेट शून्य है. 5 से 10 दिनों में यह ठीक होने लगता है. साथ ही शरीर के धब्बे भी खत्म हो जाते हैं. लोग इसे चेचक समझ लेते है पर यह चेचक नहीं है. इसमें बच्चों को ओपीडी परामर्श के बाद जरूरी दवाएं दी जाती हैं. जिससे यह आसानी से ठीक हो जाता है.
एक से दूसरे बच्चे में फैलती है बीमारी
चिकित्सक बताते हैं कि हैंड-फुट एंड माउथ डिजीज से जो बच्चा चपेट में आ चुका है, उससे दूसरे बच्चों के संपर्क में आने से रोकने की जरूरत है. एक संक्रमित बच्चा अपने संपर्क में आए दर्जनों बच्चों को संक्रमित कर सकता है. कोविड की तरह की इस बीमारी का भी प्रसार होता है. डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि जिन बच्चों में इस तरह के लक्षण होते हैं उन्हें स्कूल भूल कर भी न भेजे. खेलने पर भी एक सप्ताह के लिए पाबंदी लगाएं.रिम्स ओपीडी में पहुंचे 150 से ज्यादा मामले
रिम्स में इस बीमारी की चपेट में आने के बाद पिछले कुछ सप्ताह में करीब 150 से ज्यादा बच्चे अभिभावकों के साथ अस्पताल पहुंच चुके हैं. जबकि बालपन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भी बच्चा भर्ती है. वहीं ओपीडी में प्रतिदिन यहां 8 से 10 बच्चे इसी बीमारी को लेकर पहुंचते है. इसे भी पढ़ें- धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-automation-necessary-in-mining-accidents-will-be-prevented-by-trained-personnel-director-general-of-mines-safety/">धनबाद: खनन में ऑटोमेशन जरूरी, ट्रेंड कर्मियों से रुकेंगी दुर्घटनाएं : खान सुरक्षा महानिदेशक

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