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हैंड-फुट एंड माउथ डिजीज की चपेट में आ रहे नवजात, ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान

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  • हाथ-पैर से लेकर मुंह के भीतर तक लाल छाले, दाने, चकते हो रहे
  • रिम्स समेत प्राइवेट अस्पतालों में हर दिन पहुंच रहे मरीज
  • गंभीर नहीं है यह बीमारी. 5 से 10 दिन में ठीक हो जाता है संक्रमण
Ranchi: दुनिया में वायरस आए दिन तबाही मचाते हैं. एक खत्म नही होती है कि दूसरा आ धमकता है. कोविड संक्रमण, मिस-सी बीमारी के बाद अब नवजात से 7 साल तक के बच्चों में होनी वाली एक और बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है. इस बीमारी के चपेट में आते ही बच्चों के शरीर में रैशेज, छाले, दाने, चकते जैसे निशान हो जा रहे हैं. सिर्फ यहीं नहीं, चेचक की तरह फफोले भी निकल रहे हैं. ऐसे लक्षण दिखने के बाद माता-पिता की परेशानी बढ़नी शुरू है. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स समेत शहर में बच्चों के अस्पताल, डॉक्टरों के क्लीनिक व ओपीडी में प्रतिदिन 100 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे हैं. जिसके बाद चिकित्सक लक्षण देखने के बाद अभिभावकों को बीमारी की जानकारी दे रहे हैं. दरअसल, ये लक्षण बच्चों में वायरस के कारण होने वाली बीमारी हैंड-फुट एंड माउथ डिजीज (एचएफएम) की है. इसके बारे पूछने पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यह बीमारी कॉक्ससैवी और ईको वायरस के कारण फैलता है. पांच साल पहले यानी 2017 में इसका प्रकोप शुरू होने के बाद मरीज मिलने बंद हो गए थे. लेकिन यह एक बार फिर एक्टिव हुआ है. डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, इस बीमारी में हाथ-पैर व मुंह के भीतर तक लाल धब्बे व दाने पड़ने लगते है. इसे पढ़ें- रिम्स">https://lagatar.in/delegation-of-rims-junior-doctor-association-met-minister-banna-gupta-demanded/">रिम्स

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इससे बच्चों के शरीर में जहां भी ऐसे निशान होते है वहां दर्द बढ़ जाता है. मुंह और गले में छाले पड़ जाते है. लोगों को जागरूक करते हुए डॉ. राजेश ने बताया कि इस बीमारी में डेथ रेट शून्य है. 5 से 10 दिनों में यह ठीक होने लगता है. साथ ही शरीर के धब्बे भी खत्म हो जाते हैं. लोग इसे चेचक समझ लेते है पर यह चेचक नहीं है. इसमें बच्चों को ओपीडी परामर्श के बाद जरूरी दवाएं दी जाती हैं. जिससे यह आसानी से ठीक हो जाता है.

एक से दूसरे बच्चे में फैलती है बीमारी

चिकित्सक बताते हैं कि हैंड-फुट एंड माउथ डिजीज से जो बच्चा चपेट में आ चुका है, उससे दूसरे बच्चों के संपर्क में आने से रोकने की जरूरत है. एक संक्रमित बच्चा अपने संपर्क में आए दर्जनों बच्चों को संक्रमित कर सकता है. कोविड की तरह की इस बीमारी का भी प्रसार होता है. डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि जिन बच्चों में इस तरह के लक्षण होते हैं उन्हें स्कूल भूल कर भी न भेजे. खेलने पर भी एक सप्ताह के लिए पाबंदी लगाएं.

रिम्स ओपीडी में पहुंचे 150 से ज्यादा मामले

रिम्स में इस बीमारी की चपेट में आने के बाद पिछले कुछ सप्ताह में करीब 150 से ज्यादा बच्चे अभिभावकों के साथ अस्पताल पहुंच चुके हैं. जबकि बालपन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भी बच्चा भर्ती है. वहीं ओपीडी में प्रतिदिन यहां 8 से 10 बच्चे इसी बीमारी को लेकर पहुंचते है. इसे भी पढ़ें- धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-automation-necessary-in-mining-accidents-will-be-prevented-by-trained-personnel-director-general-of-mines-safety/">धनबाद

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क्या हैं इसके लक्षण

- इस बीमारी से पहले बच्चों को तेज बुखार का आना, इसमें बुखार की दवा दी जाती है. - हाथ-पैर से लेकर शरीर के दूसरे हिस्सों में लाल दाग, रैशेज जैसे निशान, चेचक जैसे फोड़े होने लगते हैं. - मुंह के भीतर छाले पड़ते हैं. इसमें एंटीबायोटिक के अलावा छाले की दवा दी जाती है. [wpse_comments_template]  
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