Ranchi : पलामू में नवजात शिशु को बेचने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए डीसी से चार सप्ताह में विस्तृत अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है.
आयोग ने स्पष्ट कहा है कि जिला प्रशासन ने योजनाओं का लाभ देने का दावा किया है. लेकिन लाभार्थियों को वास्तविक भुगतान और सहायता का कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है.
दरअसल आयोग में शिकायत की गई थी कि लेस्लीगंज प्रखंड के लोटवा गांव की पिंकी देवी को इलाज के लिए मजबूरन अपने नवजात शिशु बेचना पड़ा. परिवार के पास आधार, राशन कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज नहीं थे और वे मंदिर के शेड में रहने को विवश थे.
आरोप यह भी लगाया गया कि स्थानीय प्रशासन ने मदद के नाम पर केवल 20 किलो चावल दिया. जबकि परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था. मामले पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पहले भी पलामू प्रशासन से कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा था.
जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में दावा किया गया कि पीड़िता के बच्चों का स्कूल में नामांकन कराया गया है, आंगनवाड़ी से पोषण सहायता दी जा रही है, स्वास्थ्य जांच कराई जा रही है, आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता और मनरेगा जॉब कार्ड उपलब्ध कराया गया है. साथ ही आवास योजना के लिए भूमि आवंटन की बात भी कही गई.
हालांकि आयोग ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद पाया कि लाभ दिए जाने के दावों के बावजूद वास्तविक भुगतान, राशन वितरण, मनरेगा मजदूरी, या अन्य योजनाओं के लाभ के संबंध में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया. इसे गंभीर मानते हुए आयोग ने डीसी को निर्देश दिया है कि लाभों के वास्तविक वितरण का प्रमाण सहित विस्तृत रिपोर्ट 4 जून 2026 तक प्रस्तुत करें.
Leave a Comment