Ranchi: पलामू स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के पास 47 करोड़ रुपये के खर्च का कोई हिसाब नहीं है. सरकार ने विश्वविद्यालय को यह रकम आधारभूत संरचना के विकास के लिए दी थी. विश्वविद्यालय के ऑडिट रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है. साथ ही संजय कुमार सिंह, राजीव मुखर्जी सहित चार लोगों को वेतन मद में दी गयी अधिक राशि की वसूली की अनुशंसा की गयी है. इन सभी कर्मचारियों ने वसूली के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. वसूली का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है.
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय को सरकार ने तीन वित्तीय वर्ष के दौरान आधारभूत संरचना आदि के विकास के लिए कुल 47.21 करोड़ रुपये दिये थे. ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि विश्वविद्यालय ने विकास मद की इस राशि को विभिन्न संस्थाओं को दे दिया. लेकिन संबंधित संस्थाओं ने इस राशि के खर्च का हिसाब नहीं दिया. इससे ऑडिट के दौरान इस राशि के खर्च की जांच नहीं की जा सकी. इसलिए इस राशि को आपत्ति के दायरे में शामिल किया गया है.
ऑडिट में पाया गया कि सरकार ने WiFi सहित अन्य तकनीकी विकास के लिए विश्वविद्यालय ने वर्ष 2017 में National Informatics Center Services Inc (नई दिल्ली) को 4.00 करोड़ रुपये दिया था. लेकिन इस राशी के खर्च से संबंधित कोई ब्योरा विश्वविद्यालय में उपलब्ध नहीं है. इससे National Informatics Center Services Inc को दी गयी राशि के खर्च की जांच नहीं की जा सकी. सरकार से आधारभूत संरचना मद में मिली राशि के खर्च से संबंधित बिल, उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि विश्वविद्यालय के पास नहीं है.
ऑडिट के दौरान पाया गया कि सरकार ने विश्वविद्यालय को 2016-17 में 8.00 करोड़, 2017-18 में 12.00 करोड़, 2018-19 में 21.41 करोड़ आधारभूत संरचना के विकास के लिए दिया था. विश्वविद्यालय ने यह राशि झारखंड भवन निर्माण निगम को दे दी थी. लेकिन निगम ने खर्च से संबंधित बिल सहित अन्य ब्योरा विश्वविद्यालय को नहीं दिया. विश्वविद्यालय द्वारा निगम से खर्च और योजना से संबंधित ब्योरे की मांग की गयी. लेकिन निगम ने खर्च से संबंधित ब्योरा और उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया.
इसके अलावा विश्वविद्यालय के पास मरम्मत के नाम पर कार्यपालक अभियंता को दी गयी राशि के खर्च का ब्योरा भी उपलब्ध नहीं है. ऑडिट के दौरान दस्तावेज की जांच में पाया गया विश्वविद्यालय ने भवन निर्माण प्रमंडल पलामू के कार्यपालक अभियंता को मरम्मत के लिए 1.80 करोड़ रुपये दिया था. लेकिन कार्यपालक अभियंता द्वारा खर्च से संबंधित ब्योरा विश्वविद्यालय को नहीं दिया गया. इससे इस राशि के खर्च और उपयोगिता का ऑडिट नहीं किया जा सका.
ऑडिट रिपोर्ट में संजय सिंह, राजीव मुखर्जी सहित चार कर्मचारियों को वेतन मद में दी गयी राशि की वसूली की अनुशंसा की गयी है. इनमें से एक कर्मचारी से वसूली की जा चुकी है. शेष तीन कर्मचारियों से राशि की वसूली के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अपरिहार्य कारणों से अब तक किसी को नोटिस जारी नहीं किया गया है. इस बीच विश्वविद्यालय के इन चारों कर्मचारियों ने ऑडिट रिपोर्ट में की गयी वसूली की अनुशंसा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. इन कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका में यह कहा गया है कि उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा उनका वेतन निर्धारण किया जा चुका है. इसके आलोक में उन्हें अधिक वेतन नहीं दिया गया है. इसलिए वसूली की अनुशंसा के अनुपालन पर रोक लगायी जाये.
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